नीलामी के दौरान फैंस की नजर इस बात पर रहती है कि किस सीक्वेंस में खिलाड़ी आएंगे, किस खिलाड़ी पर सबसे ज्यादा बोली लगी, कौन-सा खिलाड़ी किस टीम में गया, किस फ्रेंचाइजी ने कितने खिलाड़ी खरीदे। हालांकि, इसके लिए जरूरी नियम क्या हैं, इस बारे में लोग कम ही जानते हैं। हम आपको इसी बारे में बता रहे हैं।

आईपीएल 2022 के लिए आज बेंगलुरु में दोपहर 12 बजे से मेगा ऑक्शन होना है। इस बार 600 खिलाड़ियों की किस्मत दांव पर है। इसमें 377 भारतीय और 223 विदेशी खिलाड़ी हैं। वहीं, 10 टीमों के पास कुल मिलाकर 217 स्लॉट खाली हैं। इस बार कुल 19 देशों के 1214 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 15 देशों के 590 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। नीलामी से ठीक पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने वाले 10 खिलाड़ियों के नाम जोड़े गए। यानी 600 खिलाड़ियों के लिए मंच सज चुका है, अब बस फ्रेंचाइजी को आकर अपनी बेस्ट टीम चुननी है

इस बार मेगा ऑक्शन दो दिनों तक चलेगा। कुछ खिलाड़ियों पर बोली पहले दिन और कुछ खिलाड़ियों पर बोली दूसरे दिन लगेगी। नीलामी के दौरान फैंस की नजर इस बात पर रहती है कि किस सीक्वेंस में खिलाड़ी आएंगे, किस खिलाड़ी पर सबसे ज्यादा बोली लगी, कौन-सा खिलाड़ी किस टीम में गया, किस फ्रेंचाइजी ने कितने खिलाड़ी खरीदे। हालांकि, इसके लिए जरूरी नियम क्या हैं, इस बारे में लोग कम ही जानते हैं। हम आपको इस बार की नीलामी से जुड़े तमाम छोटे-बड़े नियम बता रहे हैं..

नीलामी की शुरुआत मार्की खिलाड़ियों से होगी

नीलामी की शुरुआत मार्की खिलाड़ियों की बोली से होगी। मार्की खिलाड़ी वो होते हैं, जिन्हें लगभग सभी फ्रेंचाइजी खरीदना चाहती है। इस बार 10 मार्की खिलाड़ी चुने गए हैं। इनमें शिखर धवन, डेविड वार्नर, श्रेयस अय्यर, फाफ डुप्लेसिस, क्विंटन डिकॉक, कगिसो रबाडा, पैट कमिंस, मोहम्मद शमी और रविचंद्रन अश्विन शामिल हैं। मार्की खिलाड़ियों के बाद कैप्ड खिलाड़ियों पर बोली लगेगी। 

खिलाड़ियों को ‘सेट’ में बांटा जाता है, फिर बोली लगती है

नीलामी में फाइनल लिस्ट में शामिल खिलाड़ियों को कैप्ड, अनकैप्ड और ओवरसीज (विदेशी) के हिसाब से बांटा जाता है। साथ ही उन्हें बल्लेबाजों, गेंदबाजों, विकेटकीपर और ऑलराउंडर्स के अलग-अलग ग्रुप में रखा जाता है। इसे ‘सेट’ कहते हैं। बल्लेबाज, गेंदबाज के हिसाब से अलग-अलग कई सेट बनाए जाते हैं। इसमें पहले कैप्ड बल्लेबाजों पर बोली लगेगी। फिर कैप्ड ऑलराउंडर्स, विकेटकीपर्स, तेज गेंदबाज और आखिर में स्पिनर्स पर बोली लगेगी। इसके बाद अनकैप्ड खिलाड़ियों पर बोली की शुरुआत होगी।

नीलामी के दौरान क्या-क्या होगा?

नीलामी के दौरान ऑक्शनर लिस्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों की बेस प्राइस बताएगा। फिर फ्रेंचाइजी पैडल उठाकर बोली लगाना शुरू करती हैं। एक खिलाड़ी पर कई फ्रेंचाइजी बोली लगा सकते हैं। आखिर में उस खिलाड़ी पर जो फ्रेंचाइजी सबसे बड़ी बोली लगाएगी, खिलाड़ी उस टीम का हो जाता है। इसके बाद उस खिलाड़ी को ‘सोल्ड’ कैटेगरी में डाल दिया जाता है। इसी प्रकार 600 खिलाड़ियों पर बोली लगेगी। खिलाड़ी उस सूरत में नहीं बिकता है, जब किसी भी फ्रेंचाइजी ने उसके लिए बोली ना लगाई हो या ऑक्शन कराने वाले को प्रक्रिया में किसी तरह का खलल महसूस हो। ऐसे खिलाड़ियों को अनसोल्ड कहते हैं।

इस बार कुल मिलाकर 62 सेट बनाए गए

मार्की सेट को मिलाकर इस बार खिलाड़ियों को कुल 62 सेट में बांटा गया है। पहले दिन (शनिवार) 161 खिलाड़ियों पर बोली लग सकती है। इस दौरान आराम-आराम से बोली लगेगी। वहीं, अगले दिन सभी फ्रेंचाइजी को बाकी बचे 439 खिलाड़ियों में से उन खिलाड़ियों को चुनने के लिए कहा जाएगा, जिनमें उन्हें दिलचस्पी है। चुने गए खिलाड़ियों पर रविवार को बोली लगेगी। यह प्रक्रिया जल्दी-जल्दी होगी और इसे ‘एक्सलरेटेड बिडिंग प्रोसेस’ कहते हैं। इस बार के ऑक्शन की जिम्मेदारी ह्यूज एडमीड्स पर होगी। उन्होंने 2018 में रिचर्ड मेडली को रिप्लेस किया था और पिछले चार साल से ऑक्शन कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कैप्ड और अनकैप्ड प्लेयर का मतलब?

ऐसा खिलाड़ी जो अपने देश के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय में से किसी एक में भी खेल चुका हो, वो कैप्ड श्रेणी में आता है। वहीं, अनकैप्ड का मतलब ऐसे खिलाड़ी जो अपने देश के लिए तीनों में से किसी भी फॉर्मेट में न खेला हो। उदाहरण के तौर पर ईशांत शर्मा, दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर ऑक्शन पूल में कैप्ड खिलाड़ी हैं, क्योंकि उन्होंने भारत के लिए मैच खेले हैं। वहीं, अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले यश धुल, राज अंगर बावा, डेवाल्ड ब्रेविस अनकैप्ड प्लेयर हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने सीनियर लेवल पर अपने देश के लिए एक भी मैच नहीं खेला है।

मेगा ऑक्शन क्या है?

  • आखिरी मेगा ऑक्शन 2018 में हुआ था, क्योंकि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स की टीम दो साल का बैन झेलने के बाद लीग में वापस आई थी। 2018 में 182 स्लॉट के लिए 13 देशों के 578 खिलाड़ियों को चुनने के लिए आठ टीमों ने बोली लगाई थी।
  • 2018 मेगा ऑक्शन में 578 खिलाड़ियों में से केवल 169 खिलाड़ी ही बिके थे। उनमें 113 भारतीय और 56 विदेशी खिलाड़ी थे। 2018 मेगा ऑक्शन में इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स सबसे महंगे खिलाड़ी रहे थे। उन्हें राजस्थान ने 12.5 करोड़ रुपये में खरीदा था।
  • अब दो नई टीमों के जुड़ने के बाद इस साल मेगा ऑक्शन होगा। लखनऊ और अहमदाबाद दो नई टीमें हैं और इनके आने से स्लॉट की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। इस साल 217 खिलाड़ियों के लिए स्लॉट खाली है। हालांकि, इतने बिकें ऐसा जरूरी नहीं है।
  • मेगा ऑक्शन में पहले फ्रेंचाइजी को ज्यादा से ज्यादा पांच खिलाड़ियों को रिटेन करने की इजाजत होती थी, जो कि इस बार चार कर दी गई। बाकी खिलाड़ियों को ऑक्शन में उतरना होगा। इन्हें कोई भी फ्रेंचाइजी नीलामी में खरीद सकती है। इसमें नए सिरे से टीमें बनती हैं।
  • इसके अलावा पहले तीन खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी शुरुआती राउंड में रिटेन कर सकती थी और दो खिलाड़ियों को ऑक्शन के दौरान राइट टू मैच कार्ड के जरिए अपने साथ जोड़ सकती थी, लेकिन इस बार चार खिलाड़ियों को पहले ही रीटेन करने को कहा गया। राइट टू मैच का ऑप्शन हटा दिया गया है।
  • आईपीएल के नए नियम के मुताबिक दोनों नई टीमों को ऑक्शन पूल से तीन-तीन खिलाड़ियों को ही चुनना था। इसमें से सिर्फ एक ही विदेशी हो सकता था। वहीं, आठ पुरानी टीमों को ज्यादा से ज्यादा चार खिलाड़ियों को रीटेन करना था। इसमें भी सिर्फ दो विदेशी खिलाड़ी हो सकते थे। वहीं, दो नई टीमों को तीन में से सिर्फ एक विदेशी खिलाड़ी को चुनने की इजाजत थी।
  • आठ टीमों ने पिछले साल 30 नवंबर को ही अपने-अपने रिटेन किए गए खिलाड़ियों की घोषणा कर दी थी। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स ने सबसे ज्यादा चार-चार खिलाड़ियों को रिटेन किया था। वहीं, हैदराबाद, राजस्थान और बैंगलोर ने तीन-तीन खिलाड़ी रिटेन किए थे। पंजाब ने सबसे कम दो खिलाड़ियों को रिटेन किया। 
  • 2022 के लिए सभी टीमों के पर्स में कुल 90 करोड़ रुपये दिए गए थे, जो रिटेन खिलाड़ियों की कीमत के मुताबिक कटते गए। अब सभी फ्रेंचाइजी पर्स में बची राशि के साथ नीलामी में उतरेगी।

खिलाड़ियों की बेस प्राइस कितनी और कैसे तय होती है?

2019 आईपीएल ऑक्शन के दौरान अनकैप्ड और कैप्ड खिलाड़ियों की बेस प्राइस में बदलाव किया गया था। अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए बेस प्राइस के लिए 20, 30 और 40 लाख की नई श्रेणी बनाई गई है। पहले यह 10, 20 और 30 लाख थी। वहीं, कैप्ड खिलाड़ियों के लिए पांच अलग-अलग बेस प्राइस रखे गए हैं। इसमें 50 लाख, 75 लाख, 1 करोड़, 1.5 करोड़ और दो करोड़ की श्रेणी शामिल है। कैप्ड खिलाड़ी इच्छा अनुसार अपना बेस प्राइस चुन सकता है। 
 

एक टीम में मैक्सिमम और मिनिमम कितने खिलाड़ी होंगे?

हर एक फ्रेंचाइजी अपनी टीम में रिटेन किए गए खिलाड़ियों को जोड़कर मैक्सिमम 25 और मिनिमम 18 खिलाड़ी रख सकती हैं। किसी भी टीम में ज्यादा से ज्यादा आठ विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं। जितने विदेशी खिलाड़ियों को रिटेन किया जाता है, आठ में से संख्या घटती जाती है। मौजूदा हालात में पंजाब किंग्स ने सबसे कम दो खिलाड़ियों को रिटेन किया, ऐसे में टीम के पास सबसे ज्यादा 23 स्लॉट खाली हैं।

वहीं, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई के पास सबसे कम 21 स्लॉट खाली हैं, क्योंकि इन्होंने चार खिलाड़ियों को रिटेन किया था। लखनऊ, राजस्थान, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद ने तीन-तीन खिलाड़ियों को रिटेन किया, ऐसे में इनके पास 22 स्लॉट खाली हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इतने खिलाड़ी खरीदे ही जाएं, लेकिन कुल खिलाड़ियों की संख्या 18 से ऊपर होनी चाहिए। 

किस फ्रेंचाइजी के पर्स में कितनी रकम बची है?

आईपीएल के इस सीजन में फ्रेंचाइजी के सैलरी पर्स (बजट) में पांच करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यानि इस बार सभी टीमों को पर्स में 90 करोड़ रुपये दिए गए थे। फ्रेंचाइजी के खिलाड़ियों को रिटेन करने या न करने पर इसी 90 करोड़ में से तय रकम काटा गया है। पिछले दो सीजन में कोरोना की वजह से रकम में इजाफा नहीं किया गया था और यह 85 करोड़ रुपये था। वहीं, 2019 में फ्रेंचाइजियों को खर्च करने के लिए 80 करोड़ रुपये और 2018 में 66 करोड़ रुपए दिए गए थे। 

2022 ऑक्शन के दौरान सबसे ज्यादा रकम पंजाब के पास है, क्योंकि उसने दो ही खिलाड़ियों को रिटेन किया था। पंजाब ने सबसे कम खिलाड़ियों को रिटेन किया और 18 करोड़ रुपये खर्चे। ऑक्शन में पंजाब की टीम 72 करोड़ रुपये के साथ उतरेगी। दिल्ली ने अपने खिलाड़ियों को रिटेन करने में सबसे ज्यादा खर्च किए। उन्होंने 42.5 करोड़ रुपये खर्च किए और सबसे कम 47.5 करोड़ रुपये के साथ यह फ्रेंचाइजी ऑक्शन में उतरेगी। नियमों के तहत इस बार एक फ्रेंचाइजी का न्यूनतम खर्च 90 करोड़ रुपये में से 67.5 करोड़ रुपये होना चाहिए।

फ्रेंचाइजी पर्स में कितनी रकम बची (करोड़ रुपये)
चेन्नई सुपर किंग्स
48
दिल्ली कैपिटल्स
47.5
कोलकाता नाइट राइडर्स
48
लखनऊ सुपर जाएंट्स
59
मुंबई इंडियंस
48
पंजाब किंग्स
72
राजस्थान रॉयल्स
62
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर
57
सनराइजर्स हैदराबाद
68
टीम अहमदाबाद
52

क्या अनसोल्ड खिलाड़ी बिकेंगे?

अनसोल्ड खिलाड़ी तभी बिक सकते हैं, जब कोई फ्रेंचाइजी इन्हें दोबारा खरीदने की इच्छा जताएगी। यह नीलामी के अंतिम चरण में होगा। 2018 के मेगा ऑक्शन में लासिथ मलिंगा, डेल स्टेन, ईशांत शर्मा, हाशिम अमला और जो रूट जैसे कई खिलाड़ी अनसोल्ड रहे थे।

2022 ऑक्शन में कोरोना प्रोटोकॉल

नीलामी में शामिल होने वाले सभी लोगों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही उन्हें नीलामी में शामिल होने की अनुमति मिलेगी।  

अगर किसी फ्रेंचाइजी का कोई अधिकारी नीलामी से 15 दिन पहले विदेश से आया है तो उसे कम से कम सात दिन तक क्वारैंटीन रहना है। इसके बाद आठवें और नौवें दिन दो बार उसे कोरोना टेस्ट करना होना था। दोनों टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही वह नीलामी में शामिल होगा।

नीलामी में भाग लेने के लिए हर टीम के अधिकारी 11 फरवरी को बेंगलुरू के होटल पहुंचे। इस दौरान बीसीसीआई के अधिकारी ध्यान रखा कि किसी में कोरोना के लक्षण तो नहीं हैं। अगर किसी के अंदर कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो उसे बाकी लोगों से अलग कर दिया जाएगा और वह अधिकारी नीलामी में भाग नहीं लेगा। 

आज नीलामी से पहले सभी का कोरोना टेस्ट होगा। ताकि नीलामी प्रभावित न हो और अगर कोई कोरोना से संक्रमित है तो उसे पहले ही बाकी लोगों से अलग कर दिया जाए। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.