राज्य शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों की बैठक ली

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और मंडी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर अद्यतन स्थिति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव जैन ने विभागीय अधिकारियों को राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यो की नियमित रूप से मॉनिटरिंग और समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य रूप से गोधन न्याय योजना, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा गौठानों में आय उपार्जक गतिविधियों के संचालन, फसल चक्र परिवर्तन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने और मंडियों की अनुपयोगी जमीन का विमुद्रीकरण (मोनेटाइजेशन) पर चर्चा की गयी।

मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी गौठानों में गोबर खरीदी के पश्चात निर्धारित प्रतिशत में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन अनिवार्य रूप से हो, यह सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन बढ़ाए जाने के संबंध में प्रयास किए जाए। उन्होंने कहा है कि आदर्श गौठानों की स्थापना के लिए स्पष्ट मापदण्ड निर्धारित किए जाए और उनके अनुरूप गौठानों को आदर्श और स्वावलंबी बनाने के दिशा में कार्य किए जाए। वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण और विक्रय से प्राप्त राशि का वितरण महिला समूहों और गौठान समितियों को नियमित रूप से किए जाने के निर्देश दिए गए।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा गौठान समितियों की आय में बढ़ोत्तरी करने के लिए कृषि और उद्यानिकी विभाग के समन्वय से गतिविधियों का संचालन करने के निर्देश मुख्य सचिव जैन ने दिए है। उन्होंने कहा है कि गौठान समितियों द्वारा उन्हीं सामग्रियों का उत्पादन और निर्माण सुनिश्चित किया जाए, जिनका सहजता से विक्रय स्थानीय बाजार में किया जा सके। रोजगार गारंटी योजना के तहत प्राथमिकता वाले कार्यो का चिन्हांकन करने पंजीकृत परिवारों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने राज्य के किसानों को धान के अतिरिक्त अन्य फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि राज्य के उन्नतशील किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के लिए कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जाए और धान के अतिरिक्त दलहन, तिलहन, मक्का जैसे अन्य फसलों के उत्पादन के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।

जैन ने नए मंडियों के निर्माण के पश्चात अनुपयोगी पुरानी मंडियों की जमीनों का चिन्हांकन करने और इनका जनहित में अन्य गतिविधियों में उपयोग करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने एजेंसी निर्धारित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में कृषि विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग आर. प्रसन्ना, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक हिमशिखर गुप्ता उपस्थित थे।

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