कोरोना संकट के इस मुश्किल दौर में…..अमेरिका ने छोड़ा भारत का साथ,मदद के सवाल पर दिया ये जवाब…….

कोरोना वायरस के चलते इस समय भारत के हालात बेहद खराब हैं औऱ देश बेहद भयावह स्थिति से गुजर रहा है।भारत में शुक्रवार को रिकॉर्ड कोरोना संक्रमण के 3.32 लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए।इसके साथ ही भारत में संक्रमितों की संख्या बढ़कर अब 1,62,63,695 हो चुकी है जबकि 24 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। भारत में एक तरफ, जहां अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों के लिए मारामारी है तो दूसरी तरफ वैक्सीन उत्पादक कंपनियों को कच्चे माल की कमी की वजह से दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस मुश्किल वक्त में जब भारत ने अमेरिका का रुख किया तो उसने भी मदद करने से इंकार कर दिया।

अमेरिका ने कोविड वैक्सीन में इस्तेमाल वाले कुछ जरूरी कच्चे माल के निर्यात पर लगी पाबंदी का बचाव किया है। कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए आवश्यक इन सामग्रियों के निर्यात पर भारत ने प्रतिबंध हटाने की मांग की थी लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि बाइडेन प्रशासन का पहला दायित्व अमेरिकी लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना है इसलिए वह ऐसा नहीं कर सकता।

अमेरिका का यह रुख तब समय सामने आया है जब भारत ने उसके लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर लगी रोक हटा ली थी। पिछले साल ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारत ने हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के निर्यात पर पाबंदी को हटाकर अमेरिका को निर्यात किया था लेकिन अब भारत को कोरोना वैक्सीन के लिए कच्चे माल की भारत को जरूरत पड़ी है तो अमेरिका ने सबसे पहले अपने नागरिकों के वैक्सीनेशन का हवाला दिया है।जब बाइडन प्रशासन से पूछा गया कि भारत के टीके के कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के अनुरोध पर क्या निर्णय करेगा तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, ‘अमेरिका अपने महत्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में लगा हुआ है। अमेरिका सबसे पहले अपने नागरिकों के वैक्सीनेशन में जुटा हुआ है।’

नेड प्राइस ने कहा कि यह न सिर्फ अमेरिकी हित में है बल्कि बाकी दुनिया के भी हित में । असल में, यह देखा गया कि कोरोना के वैक्सीन के निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण कच्चे माल के निर्यात में मौजूदा कठिनाई मुख्य रूप से एक नियम के चलते है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को घरेलू खपत को प्राथमिकता देनी होती है। बता दें कि वैक्सीन बनाने के लिए कच्चे माल की कमी से भारत में वैक्सीनेशन के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है. इसीलिए दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अमेरिका से कच्चे माल की मांग की है।

असल में, शुरू में कोरोना की दूसरी लहर से पहले भारत ने दुनिया भर में वैक्सीन भेजी। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने दुनियाभर के गरीब और विकासशील देशों को करीब 2 बिलियन वैक्सीन भेजी है। वैक्सीन बेचने और बांटने के बाद स्थिति यह हो गई कि भारत में ही टीके की कमी सामने आ गई। इसे देखते हुए भारत ने अपने नियमों में बदलाव किए और Pfizer जैसी कंपनी से वैक्सीन के निर्यात और रूस के Sputnik V वैक्सीन को भी मंजूरी दी ।

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