importance of public relations
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PR-Public Relations
PR-Public Recognition/policy Recognition
PR- Performance Recognition
PR-Propurality Recipt

History and Growth of PR in India

सार्वजनिक संबंध दुनिया भर में एक सदी से अधिक पुराने होने के बावजूद, 1990 के दशक की शुरुआत में भारत में शुरू हुए। हालांकि कई व्यक्ति और छोटी कंपनियां थीं जो इससे पहले भी शुरू हुई थीं,उन्होंने पीआर को केवल मीडिया संबंधों के सीमित दायरे के साथ पेश किया। यह केवल स्वाभाविक था कि इन सेवाओं को शुरू करने वाले उद्यमी पत्रकारिता की पृष्ठभूमि से आए, जिन्हें नवजात पीआर उद्योग के लिए प्राकृतिक शिकार के रूप में देखा गया।

1990 के दशक में भारत में शुरू होने वाली एजेंसियां

भारत पीआर के संदर्भ में कई फायदे के साथ आया -इसने अर्थव्यवस्था की लगातार उच्च विकास दर को दिखाया,पीआर की शुरुआती पैठ विकास की बहुत कम गुंजाइश थी,इंटरनेट और पारंपरिक मीडिया ने भी तेजी से प्रवेश किया जिससे भारत में पीआर का तेजी से विकास हुआ।हालांकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय पीआर एजेंसियां ​​(आमतौर पर विज्ञापन एजेंसियों की ऑफशूट) जैसे कि ओगिल्वी पीआर 1980 के दशक के मध्य में भारत में आधार स्थापित करती थीं,विशेष रूप से विज्ञापन सेवाओं में मुख्य रूप से बने रहने के बाद से वे विशेष रूप से एक मजबूत पायदान पाने के लिए उतावली थीं।पहली स्वतंत्र पीआर एजेंसियों में से एक चंडीगढ़ में 1986 अक्टूबर में एक पीआर पेशेवर चरणजीत सिंह द्वारा स्थापित किया गया था,जिन्होंने पीएफज़र के के.एस.नीलकंदन,एयर के अजीत गोपाल जैसे तत्कालीन पीआर स्टालवार्ट्स की मेंटरी के तहत कोरपीआर स्थापित करने के लिए एक जर्मन कंपनी से इस्तीफा दे दिया था।भारत और गुडइयर के अनिल बसु।1990 के दशक के प्रारंभ में,भारतीय अर्थव्यवस्था के खुलने के बाद,कई अन्य पीआर एजेंसियों ने 1996 में लेक्सिकॉन पीआर की तरह अकेले पीआर पर एक मुख्य फोकस के साथ शुरुआत की।इस दशक में विज्ञापन कारकों की तरह भारतीय आईपीओ एजेंसियों के आगमन को भी देखा जाने लगा। पीआर सेवाएं उनके आईपीओ सेवाओं के साथ एक फ्रीबी के रूप में।ये हाल के बी 2 पी संबंध चेन्नई में एक सर्वश्रेष्ठ पीआर अभ्यास के रूप में उभर रहे हैं।और दक्षिण भारत में मीडिया की निगरानी अब बी 2 पी संबंधों के माध्यम से संभव हो गई है।

2000 के दशक में भारत में शुरू होने वाली एजेंसियां

यदि 90 के दशक में भारतीय पीआर क्षेत्र के लिए शुरुआती ब्लॉक था, तो अगले दशक का विकास युग था।इस समय में महत्त्वपूर्ण था कि बर्सन मार्स्टेलर द्वारा जेनेसिस की पूरी खरीद,और एक पब्लिसिस कंपनी MS & L द्वारा [हैमर एंड पार्टनर्स] में निवेश।एडेलमैन पीआर के भव्य बूढ़े रोजर पेरियरा को लेकर भारत में प्रवेश किया।2002 में,ब्लू लोटस कम्युनिकेशंस जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों ने हेल्थकेयर,प्रौद्योगिकी,वित्त और ब्रांड्स जैसे विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके जन्म लिया।एक दशक के करीब आने के साथ, 2008 ने i9 कम्युनिकेशंस को उपभोक्ता संचार में विशेषज्ञ के रूप में देखा,जिसमें ब्रांड्स,लाइफस्टाइल,एंटरटेनमेंट और हॉस्पिटैलिटी पीआर पर विशेष ध्यान दिया गया।इस तरह की कई बुटीक एजेंसियां ​​देश के अन्य हिस्सों में भी शुरू हुईं।आर्थिक मंदी और परिणामी बाजार के दुनिया भर में क्रैश होने के बाद, कई अंतरराष्ट्रीय पीआर एजेंसियों को भारी नुकसान हुआ जब ग्राहकों ने मार्केटिंग बजट में कटौती की। इससे इन एजेंसियों को भारत और चीन जैसे उच्च विकास बाजारों की ओर रुख करना पड़ा।भारत ने स्वाभाविक रूप से अपने बड़े अंग्रेजी बोलने वाले आधार, स्थिर राजनीतिक शासन और लगातार कानूनी ढांचे के कारण उच्च प्राथमिकता ली।इस दशक में बाजार का रंग ग्रे से नीला हो गया है और छवि निर्माण और रणनीतिक पीआर के लिए कॉर्पोरेट की जरूरत को बहुत अच्छी तरह से समझा और स्वीकार किया गया है।

पॉल होम्स (होम्स रिपोर्ट के लेखक) द्वारा तैयार द स्टेट ऑफ द पब्लिक रिलेशंस इंडस्ट्री पर 2007 की रिपोर्ट के अनुसार, पीआर की पश्चिमी वृद्धि लगभग 9% से 11% तक स्थिर सीमा तक पहुंच गई है,विकास की भौगोलिक स्थिति के साथ भारत (चीन भी) पश्चिमी गति से चार गुना बढ़ रहा है। रिपोर्ट को उद्धृत करने के लिए, “विकास का सबसे बड़ा भविष्य चीन और भारत में आने की उम्मीद है,पूर्वी यूरोप में विकास की अच्छी संभावनाओं के साथ (विशेष रूप से उन देशों को जो हाल ही में यूरोपीय संघ में भर्ती हुए हैं) और मध्य पूर्व में (बहुत छोटे से यद्यपि) आधार) “।हालांकि, 2012 में, बाजार के भीड़भाड़ के कारण पीआर बाजार धीमा हो गया। 2008 & 2009 की मंदी ने भारत में एक और शब्दावली को जन्म दिया –Regional PR और उन कंपनियों को,जो एक समय में गुलाबी कागज पर झुकी हुई थीं,क्षेत्रीय दैनिक समाचार पत्रों में उपस्थिति की तलाश कर रही थीं।रीजनल पब्लिक रिलेशंस ने देश की पहली ऐसी एजेंसी स्थापित की,जहाँ कोर फोकस टियर- II और टियर- III शहरों पर था।स्वाभाविक रूप से तब,भारत और इसी तरह की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक पीआर फर्मों के लिए इस बाजार से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पसंदीदा स्थान बन गई हैं। कई वैश्विक बड़ी कंपनियों द्वारा देर से एहसास कि भारत में चीन की तुलना में एक समान या बेहतर क्षमता है,ने बाजार में हिस्सेदारी की दौड़ में काफी कुछ छोड़ दिया है।हालांकि,2012 में,बाजार की भीड़भाड़ के कारण पीआर बाजार बहुत धीमा हो गया था,बहुत कम के लिए बहुत अधिक लड़ाई के साथ।वर्ष 2009 फिर से इस उद्योग के उदय का गवाह है लेकिन टियर II बाजारों में अधिक है।कुछ क्षेत्रीय विशेषज्ञ माध्यमिक बाजारों में विशाल पीआर व्यवसाय की सेवा के लिए बहुत तेजी से आए। रीजनल पब्लिक रिलेशंस पहली ऐसी पीआर एजेंसी थी, जो केवल टियर -2 मार्केट से लुढ़की थी।स्पार्कलिंग स्टोरीज़, एक प्रसिद्ध पुणे स्थित पीआर एजेंसी भी इस दशक में स्थापित की गई थी।यह प्रतिभाओं और व्यवसायों के लिए बड़ी क्षमता के साथ अधिक प्रदर्शन देने के लिए एक दृष्टि के साथ शुरू हुआ। एक छोटे से समय में इसने फिल्मों, खेल और उपभोक्ता उत्पादों के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया।फैशन और मीडिया के बारे में विभिन्न प्रकाशनों में चित्रित होने के साथ-साथ संस्थापक प्राची धराप को एक अग्रणी महिला उद्यमी चैनल द्वारा एक उपलब्धि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

नार्थ ईस्ट इंडिया की पहली जनसंपर्क एजेंसी,कैब्सफोर्ड पीआर की स्थापना 2002 में नुरुल इस्लाम लस्कर,पूर्व मुख्य प्रबंधक (पीआर एंड कम्युनिटी सर्विसेज बैंकिंग) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा की गई थी।लाइफस्टाइल अब पूर्वोत्तर भारत में काम कर रही गुवाहाटी से संचालित होने वाली बड़ी एजेंसियों में से एक है।

अब PR ने विज्ञापन और विपणन की सीमाओं को छूना शुरू कर दिया है।2016 की शुरुआत में, डिजिटल परामर्श कंपनी #ARM वर्ल्डवाइड ने अपनी समर्पित PR इकाई शुरू की और एक वर्ष के भीतर IPRCA 2016,जैसे प्रतिष्ठित संगठन से विभिन्न प्रशंसा प्राप्त करने के अलावा, अधिकांश रचनात्मक पीआर स्टंट को निष्पादित करने के लिए एक संगठन के रूप में उभरा।फुलक्रम अवार्ड्स 2017 और IAMAI।शीर्ष पीआर एजेंसी की सूची है जो 2000 के दशक में शुरू हुई थी,APCO वर्ल्डवाइड इंडिया, कॉन्सेप्ट, H + K स्ट्रेटेजिज इंडिया,Golinopinion, Cohn & Wolfe सिक्स डिग्री, कम्युनिस्ट इंडिया,PR पंडित, Aim हाई कंसल्टिंग,मैडिसन पब्लिक रिलेशंस, इंटीग्रल, फोर्टुना पीआर उनमें से कुछ हैं।

भारत में पीआर संकट और इसका शमन

7 जनवरी 2009 को, सत्यम लिमिटेड,जो भारत की प्रमुख आईटी फर्म है, के तत्कालीन अध्यक्ष रामलिंग राजू ने कई वर्षों में उनके द्वारा किए गए सचेत धोखाधड़ी और गलत तरीके से प्रवेश का प्रस्ताव बनाया।जिस मीडिया ने उसे तब तक के लिए अलग कर दिया था,उसने अचानक एक प्रतिशोध के साथ उसको बदल दिया,जो सचेत था कि वे भी व्यवसायों के पहरेदारों के रूप में अपने कर्तव्य में विफल हो गए थे।यह संकट, वैश्विक संकट के चरम के साथ मेल खाता है और ब्रांड इंडिया और इसकी आईटी फर्मों के लिए एक विश्वसनीयता और विश्वास के मुद्दे पर स्नोबॉल करने की क्षमता रखता है,जहां हर साल कई अरब डॉलर की सेवाओं को आउटसोर्स किया जा रहा था। इस संकट का असर सत्यम से जुड़ी कई कंपनियों पर भी पड़ा, जिनमें EMRI (इमरजेंसी मेडिकल रिस्पांस इंसिटैड) शामिल है,नॉन-फॉर-प्रॉफिट प्रयास (फ्री एम्बुलेंस सेवाएं चलाने के लिए) जिसमें सत्यम ने 95% बैलेंस के साथ 5% रनिंग कॉस्ट की विभिन्न राज्य सरकारों से आ रहे हैं।

हालाँकि,भारत सरकार ने त्वरित कार्रवाई की और सत्यम के वास्तविक मूल्य का आकलन करने और एक उपयुक्त निवेशक और प्रबंधन की तलाश करने के लिए कंपनी के लिए उद्योग के दिग्गजों से मिलकर एक अंतरिम बोर्ड का गठन किया। महिंद्रा एंड महिंद्रा द्वारा तेजी से आयोजित और जमकर बोली लगाई गई प्रतियोगिता जीती गई और सत्यम को एक ग्रुप आईटी कंपनी में मिला दिया गया।

भारतीय पीआर उद्योग में संकट

2008 में भारतीय सार्वजनिक संबंध एजेंसियों को प्रभावित करने वाली वैश्विक मंदी के बाद नवंबर 2010 में इसे ‘रेडियागेट’ घोटाले के रूप में जाना जाता है।एक्सपोज़ में ओपन मैगज़ीन ने नीरा राडिया की नापाक सत्ता-व्यवहार की कहानी को कवर किया।इनकम टैक्स फोन के टैप ने 5000 से अधिक टेप एकत्र किए और इनमें से सैकड़ों टेप लीक हो गए और आउटलुक पत्रिका की वेबसाइट पर अपना रास्ता खोज लिया।केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राडिया से कई बार पूछताछ की और टेप के नतीजे के रूप में,दूरसंचार मंत्री,ए.राजा, जिनके साथ राडिया के करीबी संबंध थे,को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। कई प्रमुख पत्रकार जैसे बरखा दत्त और वीर सांघवी भी रागात्मकता के बीच में थे,राडिया के साथ सत्ता की पैरवी की बातचीत में पकड़े गए।

प्रचार की परिभाषा?

प्रचार को जनसंपर्क के एक रूप के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो मीडिया में समाचार या सूचना प्रदान करता है।प्रचार यह भी है कि मीडिया में किसी व्यवसाय या संगठन को कैसे माना जाता है।प्रकृति में उनकी निकटता के कारण, प्रचार अक्सर जन संचार के दो अन्य रूपों के साथ गलत तरीके से पेश किया जाता है: विज्ञापन और विपणन।इन सबके बीच अंतर को कोई कैसे बता सकता है? आइए एक नज़र डालते हैं कि प्रचार विज्ञापन और विपणन से कैसे अलग है।

प्रचार बनाम विज्ञापन

प्रचार को विपणन से अलग करने की कोशिश के साथ भ्रम के पीछे का कारण अक्सर होता है क्योंकि वे प्रत्येक एक संगठन के लिए समान लाभ लाते हैं।शुरू करने के लिए, विज्ञापन को किसी उत्पाद या सेवा पर ध्यान देने के लिए डिज़ाइन की गई घटनाओं या गतिविधियों के सेट के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।प्रचार और विज्ञापन प्रत्येक संगठन के उत्पादों या सेवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करते हैं।प्रत्येक के पास एक समान लक्ष्य है,जो संगठन के लिए सफलता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व और बिक्री को बढ़ाना है।

हालांकि,यह वह जगह है जहां कई समानताएं समाप्त होती हैं।विज्ञापन एक गतिविधि है जो इसके लिए भुगतान करके प्राप्त की जाती है,जैसे कि व्यावसायिक स्थान के लिए भुगतान करने वाला व्यवसाय जो फिल्म शुरू होने से पहले एक फिल्म थियेटर में प्रसारित होता है।हालांकि, प्रचार एक ऐसी चीज है जिसके लिए भुगतान नहीं करना पड़ता है।उदाहरण के लिए, एक संतुष्ट ग्राहक द्वारा लिखे गए लेख या जब एक स्थानीय समाचार आउटलेट किसी संगठन में किसी रिपोर्ट के लिए किसी व्यक्ति का साक्षात्कार करने का निर्णय लेता है, तो सकारात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रचार प्राप्त किया जा सकता है।प्रचार को अपेक्षाकृत मुफ्त सामग्री माना जाता है जो मीडिया में होता है। विज्ञापन और प्रचार के कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं:

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Example

प्रचार बनाम विपणन

विज्ञापन के साथ,चूंकि विपणन और प्रचार प्रत्येक एक संगठन के समान लाभ लाते हैं,इसलिए कई लोग दोनों को भ्रमित करते हैं।विपणन में कोई भी गतिविधियाँ होती हैं जो उत्पादों या सेवाओं की खरीद या बिक्री से संबंधित होती हैं।विपणन और प्रचार प्रत्येक व्यक्ति को राजस्व बढ़ाने के लिए अंतिम लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करते हैं (और उम्मीद से कम लागत) और यह एक संगठन के उत्पादों और सेवाओं के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के माध्यम से किया जाता है।

जनता की राय (Public opinion)

पब्लिक राय में अधिकांश लोगों की इच्छाएं,चाहतें और सोच शामिल हैं।यह किसी मुद्दे या समस्या पर किसी समाज या राज्य के लोगों की सामूहिक राय है।यह अवधारणा शहरीकरण और अन्य राजनीतिक और सामाजिक बलों की प्रक्रिया के बारे में आई।

वेबस्टर की न्यू इंटरनेशनल डिक्शनरी के अनुसार- कोई उद्योग,यूनियन,कॉर्पोरशन, व्यवसाय, सरकार या कोई संस्था जब अपने ग्राहकों,कर्मचारियों,हिस्सेदारों या जनसाधारण के साथ स्वस्थ और उत्पाद संबंध स्थापित करने और उसे स्थाई बनाने के लिए प्रयत्न करें जिनसे वह अपने आपको अनुकूल बना सके और अपने उद्देश्य को समाज पर व्यक्त कर सके संस्था के इस प्रयत्न को जनसंपर्क कहते हैं।

जनसंपर्क के पितामह-एडवर्ड एल बर्नेस के अनुसार-जनमत में अभियंत्रण का प्रयास ही जनसंपर्क है ।

ए.एल रालमेन के अनुसार- जनसंपर्क जन इच्छाओं को प्रभावित करता है और यह एक द्विपक्षी संचार है जिसमें सभी की सहमति का आधार संपूर्ण सत्य,ज्ञान और पूर्ण सूचनाएं होती है,जिनसे तनाव कम होता है और आपसी संवहार तालमेल उत्पन्न होता है।

जनसंपर्क के कार्य या उद्देश्य-

1. जनमत निर्माण करना|

2.जनमत निर्माण के लिए सुव्यवस्थित कार्य करना।

3.संस्था की छवि बनाना।

4.मानवीय पक्ष को पुष्ठ कर समाजहित को प्रधान बतलाना।

5.अधिकारियों को शिक्षित प्रशिक्षित करना ।

6.संगठन और लक्षित जनसमूह के बीच सद्भाव पूर्ण संबंध स्थापित करना।

जनसंपर्क के साधन-

जनसंपर्क के साधनों का उपयोग समय और परिस्थिति के अनुरूप कब,कहां और कैसे किया जाए यह निर्णय एक कुशल जनसंपर्क अधिकारी पर निर्भर करता है।

जनसंपर्क के साधन निम्नलिखित है-

1.बोला गया शब्द-भाषण,प्रेस कॉन्फ्रेंस

2.जनसंपर्क के साधन- प्रेस,टेलीविजन,रेडियो,

3.मुद्रित शब्द-पुस्तिकाएं,पत्रिकाएं

4.दृश्य श्रव्य माध्यम-फोटोग्राफी, स्लाइड्स

5.प्रदर्शनी और मेले

6.विज्ञापन

7.फ़िल्म

8.इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अन्य साधन आदि।

प्रचार और अधिक प्रचार

विश्व का पहला जनसंपर्क अधिकारी अमेरिकी पत्रकार आई वि ली लेडकेटर थे।

प्रचार मीडिया के माध्यम से किसी उत्पाद,सेवा या अपने कंपनी के लिए सार्वजनिक दृश्यता या जागरूकता प्राप्त करता है,प्रचार विपन्न का ही एक घटक होता है,जिसके द्वारा जनता को प्रभावित करने के लिए और उसका विश्वास अर्जित करने के लिए और उनके व्यवहार में बदलाव लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से संचार माध्यमों का उपयोग उस उत्पाद के प्रचार के लिए किया जाता है।

प्रोपोगेंडा-

झूठ को नियमित रूप से सत्य साबित करने की प्रक्रिया प्रोपोगेंडा कहलाती है प्रोपोगेंडा शब्द लैलिन के प्रोपेजेट्स से बना है जिसका अर्थ जारी रखना होता है और यह प्रचार का ऐसा माध्यम है जिसमें विरोधी पक्ष के मतों का खंडन और स्वपक्ष के मतों का निरूपण अपने समर्थकों की भावनाओं का पुष्टिकरण किया जाता है।

गोब्लज़ के अनुसार- प्रोपोगेंडा राजनीति का वह शास्त्र है,जिसमें वह शक्ति प्राप्त की जाती है जो समाज को नियंत्रित करती है।

जनसंपर्क के आचार संहिता-

जनसंपर्क द्वारा अनेक लोगों को संगठित व प्रभावित करने की व्यवस्था होती है इसलिए आवश्यक है कि-इसमें कुछ नीतियों का पालन किया जाए इसके द्वारा वांछित परिणाम प्राप्त होंगे जनसंपर्क के लिए कुछ नीतियां इस प्रकार है-

1.सच्चाई,ईमानदारी के नैतिक मूल्यों को अपनाना।

2.सद्भाव,समर्थन व सक्रिय सहयोग करना।

3.लोकहित की सामाजिक अवधारणा पर जनसंपर्क का कार्य करना।

4.”मैं श्रेष्ठ हूं” कहने के बजाय इस बात पर जोर देना कि दूसरे कहे “आप श्रेष्ठ है।”

5.संस्था व कर्मचारियों के बीच संवाद का खुलापन।

6.संचार माध्यमों का सही उपयोग करना ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

7.दी जाने वाली सूचनाओं का विश्वसनीय तार्किक होना आवश्यक है।

8.विश्वास एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास करना।

9.जनसंपर्क करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि-ऐसे शब्दों का उपयोग ना किया जाए जिससे कि किसी भी संप्रदाय पक्ष को ठेस पहुंचे।

10.स्वहित को छोड़कर समाज हित के लिए सोच कर कार्य करना।

जनसंपर्क एजेंसी-

जनसंपर्क एजेंसी एक ऐसा फर्म य्या सेवा संगठन है जो आमतौर पर किसी ग्राहक और मीडिया के माध्यम से आमजनता तक पहुंचने का कार्य करती है और जनता के राय को प्रभावित करने के लिए अनेक कार्यों से फेरबदल करती है।

कार्य- फर्म और व्यक्तियों को मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा वृद्धि और निर्माण के लिए जनसंपर्क एजेंसी को नियुक्त करना चाहिए।एक अच्छी एजेंसी उस संगठन का विश्लेषण कर सकती है जिससे कि उसका सकारात्मक संदेश य्या सकारात्मक पहलू खोज़ सके और उन संदेशों को सकारात्मक मीडिया कहानियों से अनुवादित कर सके।उदारीकरण और वैश्वीकरण के पश्चात बहुराष्ट्रीय कंपनियां के विदेशी ब्रांड देश में आने लगे और भारतीय जनसंपर्क एजेंसी ने गहरी रुचि दर्शाई और साथ ही उनको एक सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध कराया।

भारत के प्रमुख PR कंपनी

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जनसम्पर्क अधिकारी (Public Relations Officer)/PRO

वह व्यक्ति जो अपनी संस्था के विषय में जन रुचि व जनव्यवहार कार्यों का विश्लेषण करता है जनसंपर्क अधिकारी कहलाता है।

एक ऐसा व्यक्ति जो अपने संगठन और संस्थान की नीतियों का व कार्यक्रमों को जनता के समझाता है जनसंपर्क अधिकारी होता है।

वह व्यक्ति जो संगठन की नीतियों व कार्यक्रमों के कारण जनता के मन में संगठन के लिए सद्भावना उत्पन्न करता है और उस संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त करता है जनसंपर्क अधिकारी कहलाता है।

जनसंपर्क अधिकारी के कार्य-

1.जनता और सत्ता के बीच सूत्र बनता है।

2.वह जनता के सुझाव के अनुसार कार्य करने का प्रयास करता है।

3.जनता के विचार और सुझाव का ध्यान रखकर वह सत्ता और प्रशासन के अधिकारियों से संबंध रखता है।

4.वह उनके विचारों को जनता के समक्ष प्रस्तुत करता है।

5.संस्था में कार्यरत कर्मचारियों और प्रबंधकों के बीच एक स्वस्थ संबंध का निर्माण करता है।

6.जनसंपर्क अधिकारी को इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि उसे सत्ता और जनता दोनों के हित में कार्य करना होता है वह किसी एक पक्ष का पक्षधर नहीं हो सकता।

जनसंपर्क अधिकारी की विशेषता-

1.आत्मविश्वास

2.सच्चाई व ईमानदारी

3.विवेक व चतुराई

4.मधुर भाषी

5.आथित्यकार

6.जनरुचि का विश्लेषक आदि।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस क्या है?

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मीडिया से आधिकारिक तौर पर जानकारी वितरित करने और सवालों के जवाब देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम है। विशिष्ट जनसंपर्क मुद्दों के जवाब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की भी घोषणा की जाती है। कॉर्पोरेट प्रेस सम्मेलन आमतौर पर कंपनी के कार्यकारी प्रबंधन या एक प्रेस संपर्क या संचार अधिकारी के नेतृत्व में होते हैं। सीमित संसाधनों को देखते हुए, विशेष रूप से त्रैमासिक या वार्षिक आय के समय के दौरान, प्रमुख मीडिया का ध्यान आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है जब तक कि किसी कंपनी के पास साझा करने के लिए वास्तव में अद्वितीय या नई घोषणा न हो।प्रेस सम्मेलन निगमों और अन्य व्यवसायों, राजनेताओं और अन्य सरकारी अधिकारियों द्वारा आयोजित किए जाते हैं।

प्रेस सम्मेलन कंपनियों या व्यक्तियों द्वारा आयोजित किए जाते हैं और मीडिया द्वारा भाग लिए जाते हैं।घटना के दौरान, एक या एक से अधिक बोलने वाले उपस्थित लोगों को संबोधित कर सकते हैं। रिपोर्टर तब सवाल पूछने में सक्षम हो सकते हैं।एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होने से पहले,एक कंपनी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सकती है,जो घटना की प्रकृति को रेखांकित करती है।कई बार,ये सम्मेलन से पहले जारी किए जाते हैं।

एक कंपनी के पास विशेष घटनाओं के लिए प्रेस को आमंत्रित करके अपने सबसे अनुकूल प्रकाश में एक समाचार कहानी पेश करने का अवसर है।अन्य मामलों में, कम-प्रसिद्ध कंपनियां मीडिया इवेंट्स को कवर करने के लिए समाचार एजेंसियों के लिए आसान बनाने से मीडिया में अपना कद बढ़ाना चाहती हैं।

अनुकूल मीडिया एक्सपोजर प्राप्त करके,कंपनियां बाजार में अधिक से अधिक ब्रांड पहचान और अधिकार हासिल करने में सक्षम हैं,आमतौर पर व्यापक विज्ञापन अभियान के लिए आवश्यक कम लागत पर।प्रेस सम्मेलनों को समाचार सम्मेलन भी कहा जाता है।जब कोई आधिकारिक बयान या कोई प्रश्न अनुमति नहीं है,तो घटना को फोटो सेशन कहा जाता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों करें?

कई कारण हैं कि कंपनियां प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना क्यों पसंद करती हैं।उन्हें निम्नलिखित में से कोई भी करने के लिए कहा जा सकता है|

कमाई,अन्य समाचार और / या विवादों का जवाब दें।

नई कार्यकारिणी के प्रस्थान या परिवर्धन की घोषणा करें।

एक नई उत्पादन सुविधा का अनावरण करें।

एक नए उत्पाद की रिहाई की घोषणा करें।

बेशक,ये केवल कुछ उदाहरण हैं जब कोई कंपनी एक सम्मेलन बुला सकती है।कुछ मामलों में,कंपनियां किसी भी समाचार को तोड़ने से पहले अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय दे सकती हैं।

प्रेस रिलीज

एक प्रेस विज्ञप्ति, समाचार रिलीज, मीडिया रिलीज, प्रेस स्टेटमेंट या वीडियो रिलीज एक आधिकारिक बयान है जो समाचार मीडिया के सदस्यों को सूचना प्रदान करने, एक आधिकारिक बयान या घोषणा करने के उद्देश्य से दिया जाता है। एक प्रेस विज्ञप्ति पारंपरिक रूप से नौ संरचनात्मक तत्वों से बना है। प्रेस विज्ञप्ति को शारीरिक और इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों से मीडिया के सदस्यों तक पहुंचाया जा सकता है।

प्रेस रिलीज़ सामग्री मीडिया निगमों को लाभान्वित कर सकती है क्योंकि वे लागत को कम करने में मदद करते हैं और एक निश्चित समय में एक निश्चित मात्रा में उत्पादन कर सकते हैं। सामग्री पूर्व-पैक होने के कारण, प्रेस विज्ञप्ति पत्रकारों के समय को बचाती है, न केवल एक कहानी लिखने में, बल्कि पहली बार समाचार को पकड़ने के लिए समय और पैसा भी लगता है।

हालांकि एक प्रेस विज्ञप्ति का उपयोग करने से कंपनी का समय और पैसा बच सकता है, यह वितरित मीडिया के प्रारूप और शैली को बाधित करता है।डिजिटल युग में,उपभोक्ता अपनी जानकारी तुरंत प्राप्त करना चाहते हैं जो समाचार मीडिया पर अधिक से अधिक सामग्री के उत्पादन के लिए दबाव डालता है। इससे समाचार मीडिया कंपनियों को कहानियों को बनाने के लिए प्रेस विज्ञप्ति पर बहुत अधिक भरोसा करना पड़ सकता है

गृह पत्रिका या हाउस जनरल-

सेम ब्लैक के अनुसार-गृह पत्रिका बिना लाभ का नियत कालीन प्रकाशन है जिसे संस्था अपने कर्मचारियों और जनता से संपर्क स्थापित करने के लिए प्रकाशित करता है।

बारबरा केस्टल के अनुसार-सूचना पहुंचाकर ही हम किसी को अपनी ओर आकर्षित कर अपने अनुकूल बना सकते हैं तथा उनका मत पाने में सफल हो सकते हैं।

हाउस जनरल तीन प्रकार के होते हैं-

1.इंटरनल हाउस (आंतरिक गृह पत्रिका)

2.एक्सटर्नल हाउस जनरल (बाह्य गृह पत्रिका)

3.मिक्स्ड हाउस जनरल(संयुक्त गृह पत्रिका)

बैटन आरकेन फील्ड के अनुसार- गृह पत्रिका व्यापारिक, व्यवसायिक संस्थानों द्वारा प्रकाशित की जाती है ताकि इसके माध्यम से अपने सदस्यों को व्यापारिक और व्यवसायिक तकनीकों से सूचना दे सके साथ ही संस्था के क्रियाकलापों की व्याख्या,सदस्य की सहभागिता प्राप्त करके उनकी संख्या में वृद्धि करने के साथ-साथ उनकी विशिष्ट सेवाओं की पहचान करती रहे। उदाहरण-गृह पत्रिका हेलो 6E

EIEA- यूरोपियन इंडस्ट्रीयल एडिटर एसोसिएशन के अनुसार- व्यवसायिक पत्रिका द्वीमार्गी संप्रेषण के माध्यम के रूप में अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है,वह एक और अपनी नीतियों की व्याख्या करती है और दूसरी और प्रतिक्रिया और आलोचना के साथ-साथ सुझाव भी प्रस्तुत करती है।

गृह पत्रिका के उद्देश्य-

1.महत्वपूर्ण नीतियों का प्रचार-प्रसार।

2.समय संदर्भ के अनुसार सूचनाएं प्रकाशित करना।

3.बिना एक दूसरे के सामने आए परस्पर विचार-विमर्श का साधन या पत्रिका बनती है।

4.गृह पत्रिका की सहायता से संस्थान के छवि का कार्य किया जाता है।

5. इसमें प्रकाशित तथ्य सत्य पर आधारित होंगे तो इसका प्रभाव अधिक समय तक लोगों पर पड़ेगा या रह पाएगा।

इंटरनल हाउस (आंतरिक गृह पत्रिका)-

बी.आर.कांफील्ड के अनुसार- पत्रिका द्वारा किया गया सम्प्रेषण,कर्मचारियों, सहकर्मियों व प्रबंधकों के बीच सहयोग व सहकारिता की भावना को विकसित करना है ।

उद्देश्य-आंतरिक गृह पत्रिका का मुख्य उद्देश्य अपने कर्मचारियों और निकट के लोगों को जानकारी देना होता है।इस पत्रिका का प्रकाशन किसी बड़े संस्थान ,औद्योगिक घराने आदि के लिए इसलिए प्रकाशित किया जाता है, क्योकि-

1. उस संस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या बहुत अधिक होती है।

2.इसमें केवल सूचनाएं,छापने का मुख्य उद्देश्य यही होता कि उस संस्था में जो उच्च अधिकारी और कर्मचारी कार्य करते है।उन्हें संस्था से जुड़ी सूचनाए देना आवश्यक होता है,लेकिन, उस संस्था से जुड़े,दुकानदारों,वितरकों,एजेंट आदि को सूचनाए देना आवश्यक नहीं होता है।

3.प्रथम स्तर पर यह प्रबंधन मंडल की बात कर्मचारियों तथा उनकी प्रतिक्रिया प्रबंधकों तक पहुँचती है।

4.कर्मचारियों की जो प्रतिक्रिया ,सुझाव,विचार, प्रस्तुत किए जाते है, वे पिछली पत्रिका की प्रतिक्रिया स्वरूप प्रकाशित की जाती है।

5.इसमें नई नई योजनाओं तथा उससे संबंधित नीतियों की सूचना प्रकाशित की जाती है|

6.इस पत्रिका में संस्था के सभी घटनाक्रम विशिष्ट व्यक्तियों के आगमन,स्वर्ण जयंती अथवा सम्मान प्राप्ति साथ ही नई उपलब्धियों की सूचना दी जाती है और सभी स्टाफ की सृजनात्मक प्रतिभा व प्रतिक्रिया का आकलन होता है|

7.कर्मचारियों की स्वास्थ्य की रक्षा से जुड़ी नीतियों की सूचना इस पत्रिका के माध्यम से दी जाती है।

8.इन सबके अलावा संस्था का मूल उद्देश्य अपने संस्थान की प्रतिष्ठा एवं साख में वृद्धि करना होता है जिसके लिए गृह पत्रिका प्रकाशित की जाती है।

9.कर्मचारियों की सृजनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ उसकी व्यक्तिगत सफलताओं की सूचना देकर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है|

विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक संबंध का निर्माण(ROLE OF PUBLIC RELATIONS IN DIFFERENT SECTORS)

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह केवल बीसवीं सदी में है कि जनसंपर्क को एक पेशे के रूप में संहिताबद्ध, औपचारिक और व्यवहारिक बनाया गया था। हालाँकि, यह मानव जाति जितनी ही पुरानी है। प्रत्येक संगठन, संस्था और व्यक्ति के बीच जनसंपर्क होता है या नहीं, इस तथ्य को मान्यता दी जाती है। जब तक लोग हैं, समुदायों में एक साथ रह रहे हैं, संगठनों में एक साथ काम कर रहे हैं और एक समाज बना रहे हैं, उनके बीच रिश्तों का एक जटिल वेब होगा।जनता की भलाई की इच्छा सबसे बड़ी संपत्ति है जो किसी भी संगठन के पास हो सकती है। एक सार्वजनिक जो अच्छी तरह से और तथ्यात्मक रूप से सूचित है, न केवल महत्वपूर्ण है; इसके बिना, एक संगठन लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है। इसलिए, किसी भी संगठन में अच्छे जनसंपर्क के लिए शुरुआती बिंदु ध्वनि नीतियों का विकास है जो सार्वजनिक हित में हैं। सार्वजनिक समझ और अनुमोदन के लायक होने से पहले उन्हें अर्जित किया जाना चाहिए।

विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क की भूमिका-

सरकारी क्षेत्र में पीआर की भूमिका-

1. सार्वजनिक नीति का कार्यान्वयन।

2.सरकारी गतिविधियों के कवरेज में समाचार मीडिया की सहायता करना।

3.एजेंसी की गतिविधियों पर नागरिकता की रिपोर्ट करना।

4.एजेंसी के आंतरिक सामंजस्य को बढ़ाना।

5.एजेंसी की अपनी जनता के प्रति संवेदनशील बढ़ाना।

6.एजेंसी के लिए समर्थन का एकत्रीकरण।

सार्वजनिक क्षेत्र में पीआर की भूमिका-

सार्वजनिक क्षेत्र को पीआर की आवश्यकता क्यों है?

1.राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है

2.लाभदायक और उत्पादक कोर सेक्टर है।

3.सामाजिक प्रतिबद्धता है

4.बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार में योगदान देता है

5.पीआर का प्राथमिक कार्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की छवि बनाना और दुनिया को लोगों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लिए किए गए योगदान के बारे में बताना है।

NGO में पीआर की भूमिका-

1.फंड जुटाने के लिए पीआर सपोर्ट की जरूरत होती है।

2.एनजीओ सार्वजनिक धारणा पर जीवित रहता है और इस संचार के लिए समर्थन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

3.एनजीओ स्वयं को वित्तीय सहायता के लिए धर्मार्थ ट्रस्टों और दाताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक सेवा-उन्मुख संगठन के रूप में प्रोजेक्ट करता है।

4.यह सेवाओं और योजनाओं के बारे में जानकारी के प्रसार से संबंधित है ताकि लोगों को उनकी बेहतरी के लिए उनका उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सके।

5.एनजीओ अच्छे मीडिया संबंधों को बनाए रखता है ताकि मीडिया दानदाताओं और लाभार्थियों तक संदेश पहुंचाए और एक संगठन की छवि का निर्माण करे।

6.एनजीओ को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका विज्ञापन के रूप में महंगा नहीं है और जब ठीक से संभाला जाता है तो पीआर फंड जुटाने, मीडिया कवरेज और संगठन के प्रक्षेपण में अधिक सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

स्टार्टअप्स में पीआर की भूमिका-

गो सोशल- फेसबुक और ट्विटर की शक्ति आपको उभरने में मदद करने के लिए विपणन उपकरणों के रूप में मदद कर सकती है

अपने ज्ञान को साझा करें – ब्लॉग प्रकाशित करके नियमित रूप से अपने ज्ञान को साझा करना, लेख या समाचार पत्र लिखना आपके लिए एक महान प्रशंसक ला सकता है।

कॉर्पोरेट पीआर क्या है?

कॉर्पोरेट पीआर में आंतरिक और बाहरी कार्यों सहित कई अलग-अलग मंच हो सकते हैं।कॉर्पोरेट पीआर के आंतरिक कार्य कर्मचारी सोशल मीडिया,जैसे कि एक ब्लॉग,एक आंतरिक न्यूज़लेटर से लेकर कर्मचारी मामलों पर प्रकाश डाल सकते हैं।निगमों के लिए बाहरी पीआर विस्फ़ोटक हो सकता है और इसमें विभिन्न संदेशों के लिए कई संदेश शामिल हो सकते हैं।निगमों में पीआर का एक और,और अधिक प्रचारित कार्य संकट संचार है।संकट संचार को आमतौर पर घर में अंजाम दिया जाता है और मौजूदा पीआर टीम का एक हिस्सा होता है,हालांकि, कंपनी के आकार और स्थिति की गंभीरता के आधार पर,किसी विशेष मामले का आश्वासन देने के लिए संकट संचार टीमों को लाया जा सकता है।हाल ही में,निगम अपने सोशल मीडिया और सोशल मीडिया कॉन्टेस्ट का उपयोग कर रहे हैं,ताकि वे अपने पब्लिक से जुड़ सकें।

कॉर्पोरेट पीआर का मुख्य कार्य विभिन्न सार्वजनिकों के साथ जुड़ना है,जैसे कि प्रेस विज्ञप्ति,सोशल मीडिया, उत्पादों और घटनाओं के निर्माण और प्रबंधन संबंधों को सुविधाजनक बनाने के लिए।कोई फर्क नहीं पड़ता कि-आपने किस पीआर उद्योग को चुना है,एक ही बात बनी हुई है, अपने दर्शकों को जानना एक प्रभावी पीआर रणनीति को चलाने और निष्पादित करने के लिए आवश्यक है।

Case Studies

अक्सर पाठ्यपुस्तकों में चित्रण के रूप में या अच्छी प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है। यह पत्र पीआर रणनीतियों की मूल बातें समझने के लिए केस स्टडी के उपयोग की जांच करता है।कनाडाई पुरस्कार जीतने वाले संचार अभियानों का विश्लेषण संचार सिद्धांतों के आधार पर एक मॉडल के माध्यम से किया जाता है।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002-

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (Competition Act, 2002) भारत का एक अधिनियम है जो भारत में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पारित की गयी थी।इस अधिनियम ने एकाधिकार तथा अवरोधक व्यवहार अधिनियम 1969 का स्थान लिया।इसके अन्तर्गत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना हुई।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India / CCI) भारत की एक विनियामक संस्था है। इसका उद्देश्य स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढावा देना है ताकि बाजार उपभोक्ताओं के हित का साधन बनाया जा सके। 21 जून 2012 को अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 11 सीमेंट कंपनियों को व्यापार संघ बनाकर कीमत का निर्धारण करने का दोषी ठहराते हुए 6000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया।

परिचय- बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वस्तुओं और सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला तक सुगम पहुंच को सुनिश्चित करती है। व्यावसायिक उद्यम अपने हितों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रकार की रणनीतियों और युक्तियों को अपनाते हैं। वे अधिक शक्ति और प्रभाव प्राप्त करने के लिए एक साथ मिल जाते हैं जो उपभोक्ताओं के हितों के लिए हानिकारक हो सकता है और कई बार उनके द्वारा गलत प्रकार से मूल्य निर्धारण, कीमत बढ़ाने के लिए जानबूझकर उत्पाद आगत में कटौती, प्रवेश के लिए अवरोध का निर्माण, बाजारों का आवंटन, बिक्री में गठजोड़, अधिक मूल्य निर्धारण और भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण जैसी पद्धतियां अपनाई जाती हैं जिसका विभिन्न हित समूहों के समाजिक और आर्थिक कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए न केवल एकाधिकार अथवा व्यापारिक संयोजनों के गठन को रोकना आवश्यक है बल्कि एक निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना भी आवश्यक है ताकि उपभोक्ताओं को अपनी खरीद का बेहतर मोल प्राप्त हो सके।

अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सृजन और इस संदर्भ में ‘सबको समान अवसर प्रदान करने’ के लिए भारतीय संसद द्वारा 13 जनवरी 2003 को प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 को लागू किया गया।

इसके उपरान्त 14 अक्टूबर 2003 से केन्द्र सरकार द्वारा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की स्थापना की गई।इसके बाद प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इस अधिनियम में संशोधन किया गया।

20 मई 2009, को प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते और प्रमुख स्थितियों के दुरुपयोग से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों को अधिसूचित किया गया। यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर के अलावा संपूर्ण भारत में लागू होता है।

एक अध्यक्ष और 6 सदस्यों के साथ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग पूरी तरह से कार्यात्मक है। प्रतिस्पर्धा आयोग चार प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केन्द्रित करता है-

1.प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते
2.प्रमुख स्थितियों का दुरुपयोग,
3.संयोजन विनियमन और
4.प्रतिस्पर्धा हिमायत।

प्रतिस्पर्धा की जांच के लिए अधिनियम व्यवहारजन्य दृष्टिकोण पर बल देता है।यह एमआरटीपी अधिनियम के दृष्टिकोण से अलग है जिसमें संरचनात्मक दृष्टिकोण को अपनाया गया था।

उद्देश्य- भारत के आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धा अधिनियम में प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना का प्रावधान है ताकि निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके-

1.प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली पद्धतियों को रोकना।
2.बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और इसे बनाए रखना।
3.उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना।
4.भारतीय बाजार में अथवा इसके अलावा आनुषांगिक जुडे मामलों के लिए अन्य प्रतिभागियों द्वारा किए जाने वाले व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।

प्रतिस्पर्धा आयोग के कार्य- भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग को जांच प्रक्रिया द्वारा प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते और एकाधिकार के दुरुपयोग को रोकने तथा संयोजनों (विलयन अथवा गठजोड अथवा अधिग्रहण) के नियामन का कार्य करना चाहिए।किसी भी कानून (सांविधिक अधिकार) के तहत गठित प्राधिकरण/केन्द्र सरकार से प्राप्त संदर्भ के संबंध में प्रतिस्पर्धा मुद्दे पर अपना मत देना चाहिए।

सीसीआई को प्रतिस्पर्धा मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा की हिमायत,जन जागरुकता और प्रशिक्षण भी प्रदान करने का अधिदेश है।केन्द्र सरकार अथवा कोई राज्य सरकार अथवा किसी भी कानून के तहत गठित प्राधिकरण जांच के लिए संदर्भ दे सकता है। आयोग के द्वारा स्वंय अपनी जानकारी अथवा ज्ञान के आधार पर जांच शुरु की जा सकती है। प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते और प्रमुख स्थितियों के दुरुपयोग के मामलों में आयोग निम्नलिखित आदेश पारित कर सकता है-

1.जांच के दौरान आयोग एक पार्टी को प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते अथवा प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग से रोककर अंतरिम राहत प्रदान कर सकता है।
2.उद्यम के सकल कारोबार का अधिकतम 10 प्रतिशत जुर्माना और कार्टेल के संबंध में कार्टेल से प्राप्त लाभ की तीन गुना राशि अथवा उद्यम के सकल कारोबार का दस प्रतिशत, जो भी अधिक हो।
3.जांच के बाद आयोग दोषी उद्यम को प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते अथवा प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग से दूर रहने और इसमें दोबारा प्रवेश न करने का निर्देश दे सकता है।
4. मुआवजा प्रदान करवाना
5.समझौते में सुधार लाना
6.यदि कोई उद्यम प्रभावशाली स्थिति का लाभ उठा रहा है तो केन्द्र सरकार को इसके विभाजन की संस्तुति करना।

जनसंपर्क का उद्भव एवं विकास-

जनसंपर्क नाम नया है पर अभियान पुराना है पौराणिक संदर्भ के आधार पर देवर्षि नारद को जनसंपर्क का प्रथम प्रवर्तक माना जाता है इस काल में सामाजिक निर्माण के साथ पारंपरिक संबंधों और संपर्क का विकास भी हुआ ऐसे रामायण काल में स्वयंवर,महाभारत काल में कृष्ण अर्जुन संवाद गीता के रूप में लिपिबद्ध मिलता है।राजा सूर्य यज्ञों की व्यवस्थाओं से शिलालेख चित्तौड़ का कृति स्तंभ, अकबर के फतेहपुर सिकरी,लोकगीत,लोक नाटक व लोकउत्सव प्राचीन काल के जनसंपर्क के साधन के रूप में विद्यमान रहे हैं।लोकजीवन में संपर्क का व्यापक रूप त्यौहार, उत्सव, मेले के रूप में देखा जाता है।महात्मा बुद्ध 623 से 543 ई. पूर्व और आदि शंकराचार्य 822 से 780 ई. पूर्व में अपने धार्मिक उद्देश्यों के जरिए,समाज के हर वर्ग में धर्म का प्रचार-प्रसार करना ही जनसंपर्क रहा है।प्राचीन काल में सामाजिक स्थिति भिन्न थी समाज कभी लोग वंशों और परिवारों में विभाजित सामाजिक व्यवस्था,सामाजिक गतिविधियों को विभिन्न समाज में प्रचार-प्रसार करने के लिए विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करते थे।

आधुनिक काल में जनसंपर्क का सर्वप्रथम प्रवर्तन काल 1903 ई. पारकर ऐडली ने किया।पर उसे जनसंपर्क के नाम से नहीं पुकारा जाता था।1920 के आसपास जनसंपर्कताओं ने जनता को सूचित करने की प्रक्रिया मात्र ना रहकर जन की सहमति,प्रकृति, विश्वसनीयता पर बल दिया जाता है।एडवर्ड बर्नेस जे.डब्ल्यू.हिल, जेम्स स्वस स्वयं ने जनसंपर्क संस्थाओं का गठन किया।इसी समय प्रथम विश्व युद्ध काल में सत्ता की प्रोपेगेंडा का भी उद्धभव हुआ।1930 के आसपास आर्थिक तंगी के कारण जनसंपर्क कार्यक्रम प्रभावित हुआ पर व्यवसाय,प्रबंधन में जनसंपर्क की आवश्यकताओं को महसूस किया गया।

पाल गैरेट ने 1913 में जनरल मोटर कारपोरेशन के एकमात्र व्यवस्थापक नियुक्त किए।उस समय संस्था एवं जनता के बीच संप्रेषण की गहरी आवश्यकता महसूस की गई।साथ ही स्वीकार किया गया था कि-जनसंपर्क की स्थापना के लिए जनसंपर्क विज्ञापन,भाषण सभी पारंपरिक रूप में एक ही उद्देश्य की पूर्ति करते है।कालांतर में जनसंपर्क जनता की सेवा,सामाजिक दायित्व के रूप में विकसित हुआ और जनसंपर्क माध्यमों का विस्तार भी हुआ।

आर्थिक,सामाजिक,राजनीतिक,शैक्षणिक,धार्मिक संस्थाओं द्वारा सिर्फ जनमत अपनाने के कारण जनसंपर्क का तेजी से विकास हुआ। जनसंपर्क के प्रारंभिक इतिहास को जन संचार साधन के अभाव का काल कहा जा सकता है क्योंकि छोटे-छोटे राज्यों में सीमित साधनों के माध्यम से राजा या राज्य को सीमित लोगों से ही संपर्क करना होता था।यह संपर्क सीधा या संपर्क के रूप में होता था।इन राज्यों से कोई एजेंसी व्यवस्था बनाए रखती थी,जिससे राज्य का संबंध प्रजा के विशेष तक बना रहे और राज्य,देशों की सूचना जनता तक पहुंच सके और ऐसा ना होने पर दंड दिया जाता था।अतः जनसंपर्क एक ऐसा माध्यम है जो प्राचीन काल से अब तक निरंतर गतिमान है।

पेशेवर संघ (Professional Organization)- एक पेशेवर संघ एक विशेष पेशे को आगे बढ़ाने के लिए उस पेशे में लगे व्यक्तियों के हितों और सार्वजनिक हित की तलाश करता है।

IPRA- International Public Relations Association)

IPRA, इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन,1955 में स्थापित किया गया था, और पीआर पेशेवरों के लिए उनकी व्यक्तिगत क्षमता में अग्रणी वैश्विक नेटवर्क है।IPRA का उद्देश्य विश्वसनीय संचार और जनसंपर्क के नैतिक अभ्यास को आगे बढ़ाना है।हम नेटवर्किंग,पेशे की हमारी आचार संहिता और बौद्धिक नेतृत्व के माध्यम से ऐसा करते हैं।

IPRA जनसंपर्क की वार्षिक वैश्विक प्रतियोगिता,गोल्डन वर्ल्ड अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस (GWA) का आयोजक है।IPRA की सेवाएं पीआर पेशेवरों को सहयोग करने और मान्यता प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं। सदस्य हमारे विचार नेतृत्व निबंध,सोशल मीडिया और संयुक्त राष्ट्र के साथ हमारी परामर्शी स्थिति के माध्यम से सामग्री बनाते हैं।गोल्डन वर्ल्ड अवार्ड(GWA) के विजेता PR उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं।IPRA उन सभी का स्वागत करता है जो हमारे उद्देश्यों को साझा करते हैं और जो दुनिया भर में IPRA का हिस्सा बनना चाहते हैं।

इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन (IPRA)

95 देशों तक की सदस्यता के साथ वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क अधिकारियों के लिए एक पेशेवर संघ।सदस्यों को नेटवर्किंग और पेशेवर वित्तीय और बौद्धिक सलाह प्रदान करता है।

IPRA,IPRA परिषद द्वारा चुने गए निदेशक मंडल द्वारा चलाया जाता है,जो विभिन्न देशों में हमारे सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।बोर्ड की अध्यक्षता फिर से एक अध्यक्ष द्वारा की जाती है जिसे IPRA परिषद द्वारा चुना जाता है और परिषद द्वारा सहमत किए गए Bylaws के एक सेट के भीतर संचालित होता है।

इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशन एसोसिएशन के 5 कार्य

इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन, या IPRA, आज एक, आधिकारिक एसोसिएशन में जनसंपर्क पेशेवरों का संघ है। इस विशेष उद्योग में काम करने वालों को आईपीआरए के साथ सदस्यता से जुड़े रहने या बनाए रखने के द्वारा अच्छी तरह से सेवा दी जाती है। एसोसिएशन द्वारा निभाई गई भूमिकाओं का आकार और मात्रा काफी है। यहां, हम विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय जनसंपर्क संघ के पांच आवश्यक कार्यों पर चर्चा करते हैं।

संसाधन हब

सभी चीजों के जनसंपर्क में अग्रणी प्राधिकारी के रूप में, IPRA का एक प्रमुख लक्ष्य सदस्यों और गैर-सदस्यों के लिए एक संसाधन के रूप में कार्य करना है। गैर-सदस्यों को आधिकारिक वेबसाइट पर जनसंपर्क और आईपीआरए मानकों के साथ-साथ कई अन्य तरीकों से शिक्षित होने के लिए आमंत्रित किया जाता है। सदस्यों को आईपीआरए बेचान और मान्यता, सूचना संसाधनों की मात्रा और उद्योग संचालन के सभी शिष्टाचार में सहयोग का पूरा समर्थन के साथ और अधिक लाभ होता है।

उद्योग नीतिशास्त्र कम्पास

जनसंपर्क उद्योग में नैतिकता हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ अमेरिका द्वारा कवर किए गए वाक्य भी इस पेशे को आदर्श बनाम प्रतिनिधित्व के नैतिकता के कड़े कदम के रूप में स्वीकार करते हैं। इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन उद्योग में किसी के लिए एक सख्त आचार संहिता और उचित नैतिकता प्रदान करता है। ये कोड सार्वजनिक संबंध कार्यकर्ताओं के लिए एक नैतिक कम्पास प्रदान करते हैं, जो निर्णय लेने की स्थितियों में सबसे मुश्किल है।

सूचना का मुक्त प्रवाह

जनसंपर्क उद्योग के मुख्य, निहित लक्ष्यों में से एक सूचना के मुक्त प्रवाह को सुविधाजनक बनाना है।निजी पार्टियों और सार्वजनिक दुनिया के बीच संचार जो जनसंपर्क कार्यकर्ता करते हैं।जैसा कि ऊपर कहा गया है, नैतिकता के निर्देशों का पालन करने में,सूचना का यह आवश्यक आदान-प्रदान अप्रभावित रहता है।इसलिए यह IPRA का एक बाद का लक्ष्य है कि इस तरह के मामलों में उद्योग की देखरेख करना, सदस्यता की आवश्यकता, मान्यता, और अधिक आवश्यक होने पर अधिक लाभ उठाना।

गोपनीयता बनाए रखें

फिर, इस पेशे की जटिलता को उजागर करना, गोपनीयता मानकों का रखरखाव,यहां तक ​​कि प्रकटीकरण विशेषज्ञ के रूप में,जनसंपर्क कार्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है।पीआर कार्यकर्ताओं को यह जानना चाहिए कि कौन सी जानकारी कब, कहां, कैसे और किन कारणों से बताई जा सकती है।यह बहुत अच्छी तरह से अल्ट्रा स्थितिजन्य जागरूकता के रूप में वर्णित किया जा सकता है।अपनी सभी विभिन्न भूमिकाओं में, साथ ही साथ सदस्य व्यवहार के अपने निरीक्षण के माध्यम से, अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक संबंध संघ आवश्यक गोपनीयता जानकारी के एक महान रक्षक के रूप में कार्य करता है।

अभ्यास का एकीकरण

शायद जनसंपर्क उद्योग के लिए आधिकारिक एसोसिएशन के रूप में आईपीआरए का सबसे बड़ा कार्य स्वयं की व्यापक सेवा है। यह उद्योग को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता रखता है। यह जनसंपर्क संचालन के अभ्यास और नैतिकता में आधिकारिक, कंबल मानकों को बनाए रखता है। यह उद्योग में सेवा करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए एक सामूहिक संघ और प्रतिनिधित्व भी प्रदान करता है। यह आधार समारोह 1955 में इसके मूल गठन का आधार था।

जैसा कि अधिकांश व्यावसायिक उद्योग एक बड़े, ओवरसाइज़िंग निकाय के तहत आयोजित किए जाते हैं, जनसंपर्क उद्योग के लिए, वह संस्था IPRA है। इच्छुक लोगों के लिए, अधिक उपयोगी जानकारी आधिकारिक IPRA वेबसाइट https://www.ipra.org/ पर देखी जा सकती है। इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन उन संसाधनों या सहायता के लिए 24/7 उपलब्ध है।

पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया( Public Relations Society of India)

जनसंपर्क सोसायटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई),जनसंपर्क चिकित्सकों की राष्ट्रीय संघ की स्थापना 1958 में एक पेशे के रूप में जनसंपर्क की मान्यता को बढ़ावा देने के लिए और एक रणनीतिक प्रबंधन समारोह के रूप में जनता के उद्देश्यों और संभावनाओं को जनता के लिए तैयार करने और व्याख्या करने के लिए की गई थी।

समाज ने 1966 तक एक अनौपचारिक निकाय के रूप में कार्य किया जब यह 1961 के भारतीय समाज अधिनियम XXVI के तहत मुंबई में मुख्यालय के साथ पंजीकृत था।भारत में पेशेवर पीआर प्रैक्टिशनर्स के पिता, काली एच।मोदी,1966 से 1969 तक PRSI के संस्थापक अध्यक्ष थे।मुंबई,दिल्ली में अध्याय शुरू किए गए।1969 तक चेन्नई और कोलकाता।

इससे पहले 1965 में, एक और पेशेवर निकाय,पब्लिक रिलेशन सर्कल ”कोलकाता में स्थापित और पंजीकृत किया गया था। यह पूर्वी भारत में पेशेवर पीआर चिकित्सकों का पहला संघ था और सराहनीय काम कर रहा था।हालाँकि,1968 में प्रथम अखिल भारतीय पीआर सम्मेलन,नई दिल्ली में जनसंपर्क सर्कल, कोलकाता के सदस्यों ने सर्वसम्मति से क्षेत्रीय संगठन को राष्ट्रीय निकाय को मजबूत करने के लिए भंग करने का निर्णय लिया, इस प्रकार 1969 में पीआरएसआई के कोलकाता अध्याय का गठन किया गया।भारत के जनसंपर्क समाज का प्रबंधन राष्ट्रीय परिषद में निहित है,जिसमें सभी क्षेत्रीय अध्यायों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शामिल हैं।समाज के सदस्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सरकार से जनसंपर्क व्यवसायी हैं।सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों और पीआर सलाहकार।

कॉपीराइट अधिनियम, 1957

भारतीय कॉपीराइट अधिनियम 1957 को समय-समय पर संशोधित किया गया और भारतीय कॉपीराइट नियम,1958 (नियम) भारत में कॉपीराइट की व्यवस्था को नियंत्रित करता है। कॉपीराइट एक अधिकार है जो कानून द्वारा साहित्यिक, नाटकीय,संगीत और कलात्मक कार्यों के निर्माता और सिनेमाई फिल्मों और ध्वनि रिकॉर्डिंग के निर्माताओं को दिया जाता है।

Emerging PR trends

1. सभी स्तरों पर विशेषज्ञता को बढ़ावा देना।अतीत में, केवल शीर्ष-स्तरीय अधिकारियों को संगठन के उद्योग विशेषज्ञों के रूप में सामने रखा गया था। 2.पीआर खर्च में समग्र वृद्धि। 3.विशेषता पीआर फर्मों पर बढ़ती निर्भरता। 4.डिजिटल की ओर एक बदलाव। 5.Social डार्क सोशल ’को विकल्प प्रदान करना 6.मात्रात्मक बनाम गुणात्मक माप।

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