कोण्डागांव/MyNews36 प्रतिनिधि- जिले का देवगांव जहाँ के रहवासियों ने एक मिशाल पेश कर दी है सामुहिक एकता और श्रमदान की यहाँ पूरे गाँव वालों ने मिलकर पानी के लिए एक तालाब ही खोद डाला। शासन-प्रषासन के कथनी और करनी में अंतर देखने के इच्छुकों को इन दिनों एक आदिवासी बाहुल्य ग्राम देवगांव में पहुंचना चाहिए। जहां वे अपनी आंखों से देख सकेंगे कि एक ओर छग शासन के मुख्य मंत्री भूपेष बघेल नरवा, गरवा, घुरवा, बाडी का नारा देकर ग्रामीणजनों के चहुंमुखी विकास का स्वप्न देखकर कई ग्राम पंचायतों में गौठानों का निर्माण जोर-षोर से कराया जा रहा है।वहीं देवगांव में निस्तार अथवा सिंचाई आदि सुविधा के लिए नरवा (नदी-नाला) या तालाब नहीं होने के कारण यहां के ग्रामवासियों के द्वारा विगत कुछ वर्षों पूर्व से वन विभाग से लेकर अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों से एक तालाब खोदने की मांग की गई, जिस पर वन विभाग के अधिकारी दो-तीन बार तालाब बनाए जाने योग्य स्थल का निरीक्षण करने आए और नाप-जोख करके चले गए, फिर कभी वापस नहीं लौटे।

निस्तार सहित मवेषियों तक के पीने हेतु देवगांव बस्ती के समीप तालाब नहीं होने से यहां के ग्रामीणजनों के द्वारा बैठकों का आयोजन कर निर्णय लिया कि बस्ती के सभी लोग अपने-अपने परिवार से 2-2 हजार रुपए चंदा करेंगे साथ ही तालाब खोदने के काम में श्रमदान भी करेंगे। सर्व सहमति से निर्णय होने के बाद देवगांववासियों के द्वारा जल्द से जल्द तालाब का निर्माण हो इसके लिए किराए पर जेसीबी लगाकर और श्रमदान से गोदी खोदकर जोर-षोर से तालाब के निर्माण कार्य में जुटे नजर आ रहे हैं। उपर शासन-प्रषासन के कथनी और करनी में अंतर होने का उल्लेख करने की आवष्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि अकसर देखने में यह आता है कि शासन-प्रषासन किसी भी तरह का काम कराती है तो कहती है कि फलां काम जनता की मांग पर की जा रही है, लेकिन यदि सरकार द्वारा हर काम जनता की मांग पर की जाती है तो देवगांववासियों द्वारा तालाब निर्माण कराए जाने की मांग क्यों पूरी नहीं की जा सकी ?

जबकि वहीं वर्तमान में सरकार यह भी दावा कर रही है कि कोविड 19 संक्रमणकाल में किए गए, लंबे लाॅक डाउन में ग्रामवासियों के आर्थिक संकट को दूर करने के लिए मनरेगा के तहत काम कराए जा रहे हैं, तो यहां प्रष्न यह उठता है कि ग्राम देवगांव में निवासरत आदिवासी जनों को रोजगार देने हेतु कोई काम क्यों शुरु नहीं किया गया ? देवगांववासियों को अपने खर्च पर तथा श्रमदान से क्यों तालाब का निर्माण कराने को मजबूर होना पड़ रहा है ? देवगांववासियों द्वारा प्रेस प्रतिनिधियों को उक्त जानकारी देने का मकसद ही यह है कि उनके द्वारा श्रमदान व आपसी चंदे से तालाब खोदे जाने की खबर समाचार पत्रों में प्रकाषित होकर शासन-प्रशासन के जिम्मेदार मंत्री, नेताओं सहित उच्चाधिकारियों तक पहुंचे ताकि वे उनके द्वारा कराए तालाब निर्माण को देखने उनके गांव तक पहुंचे और कोविड 19 संक्रमणकाल में किए गए।

लंबे लाॅकडाउन में ग्रामवासियों द्वारा आर्थिक संकट में होने के बावजूद भी क्यों अपने खर्च पर तालाब का निर्माण कराया जा रहा है उसे महसूस करें और यदि संभव हो तो उनके द्वारा निर्माण कराए जा रहे तालाब निर्माण कार्य को मनरेगा योजना के अंतर्गत शामिल कर निर्माण में लगे समस्त ग्रामवासियों को मजदुरी देकर उनके आर्थिक संकट को भी दूर करें। ग्राम देवगांव नयापारा में पानी की समस्या को देखते हुए चंदा करके तालाब निर्माण कार्य करने की प्रक्रिया में रामनाथ नाग ग्राम पटेल, लैखन नाग वन समिति अध्यक्ष, सिरधर मंडावी पंच, सुखराम पोयाम, पायको पोयाम, बोदाराम, अर्जुन पोयाम, नरसिंह मंडावी आदि के मार्गदर्षन में अन्य समस्त ग्रामीण अपना योगदान दे रहे हैं।

MyNews36 संवाददाता राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

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