कैसे पहचानें असली और नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन में अंतर? इन 9 प्वाइंट्स से होगी पहचान

असली और नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन के बीच का अंतर कैसे समझें? बाजार में इन द‍िनों नकली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बीते द‍िनों यूपी,एमपी और सीजी में कुछ लोग फेक दवा बेचते हुए पकड़े गए थे, ऐसे में आप भी जान ल‍ीज‍िए क‍ि कोरोना से पीड़‍ित गंभीर मरीजों को लगाए जाने वाले असली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन की पहचान कैसे की जाती है। असली और नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन का अंतर समझाने के ल‍िए IPS ऑफिसर मोनिका भारद्वाज ने ट्वीट कर लोगों को ये समझााया क‍ि दोनों में फर्क कैसे समझा जाए।इसके ल‍िए उन्‍होंने 9 प्‍वॉइंट्स बताए।अगर आप इन्‍हें समझ लें तो पैकेट देखते ही आप समझ जाएंगे क‍ि दवा असली है या फेक।चल‍िए जानते हैं दोनों में अंतर को कैसे पकड़ा जाए।

रेमडेस‍िव‍िर की क‍िल्‍लत ने बढ़ाई कालाबाजारी

कई अस्‍पतालों से कोरोना मरीजों को दी जाने वाली ये दवा आउट ऑफ स्‍टॉक हो रही है ऐसे में कुछ लोगों ने इस इंजेक्‍शन की कालाबाजारी शुरू कर दी है। रेमड‍ेस‍िव‍िर की कम सप्‍लाई का फायेदा उठाते हुए लोग नकली दवा बेच रहे हैं। जि‍न लोगों को दवा की जरूरत है वो नकली दवा ऊंचे दाम देकर खरीद लेते हैं पर उसका कोई असर मरीज के शरीर पर नहीं पड़ता। असली और नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन के पैकेट में कुछ मुख्‍य फर्क है ज‍िसे आप ध्‍यान दें तो आसानी से समझ पाएंगे।

1. दवा के नाम से पहले Rx ल‍िखा होना चाह‍िए

अगर आप दवा के नाम पर ध्‍यान दें तो नाम से ठीक पहले Rx ल‍िखा हुआ है और ये ही असली इंजेक्‍शन की पहचान है जबक‍ि जो नकली इंजेक्‍शन है उसके पैकेट पर आपको दवा के नाम से पहले Rx ल‍िखा हुआ नजर नहीं आएगा।

2. ‘100 mg/Vial’ में V बड़ा होना चाह‍िए

दूसरा फर्क ये है क‍ि असली पैकेट की तीसरी लाइन में 100 mg/Vial ल‍िखा है जबक‍ि जो नकली दवा है उसके पैकेट पर 100 mg/vial ल‍िखा है। नकली पैकेट में v कैप‍िटल लैटर में नहीं है मतलब v छोटा है जबक‍ि वो बड़ा होना चाह‍िए।

3. ‘Vial’ में V बड़ा होना चाह‍िए

तीसरा फर्क है क‍ि असली दवा में Vial ल‍िखा है, इसमें भी V कैप‍िटल यानी बड़े अक्षर में है जबकि नकली दवा के पैकेट पर vial ल‍िखा है। इसी से आप समझ जाइए क‍ि दवा फेक है।

4. ‘For use in’ में F बड़ा होना चाह‍िए

असली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन में For use in ल‍िखा है जबक‍ि जो नकली इंजेक्‍शन है उसमें भी कैप‍िटलाइजेशन एरर है। यानी for use in ल‍िखा है। f अक्षर छोटा है तो मतलब दवा का पैकेट नकली है।

5. वार्न‍िंग लेबल का रंग लाल होना चाह‍िए

असली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन के पीछे ल‍िखा वार्न‍िंग लेबल लाल रंग का है जबक‍ि नकली इंजेक्‍शन का वार्न‍िंग लेबल काले रंग का है।

6. वार्न‍िंग लेबल के नीचे कंपनी का नाम होना चाह‍िए

वार्न‍िंग लेबल के ठीक नीचे दी गई मुख्‍य सूचना में कंपनी का नाम द‍िया हुआ है, जबक‍ि नकली पैकेट में कंपनी का नाम नहीं द‍िया हुआ है। “Covifir [brand name] is manufactured under the licence from Gilead Sciences, Inc” ये लाइन केवल आपको असली इंजेक्‍शन में ही म‍िलेगी।

7. पैकेट पर ‘India’ में I बड़ा होना चाह‍िए

असली इंजेक्‍शन के पैकेट पर India ल‍िखा है जबक‍ि नकली पैकेट पर India का I बड़ा होने के बजाय छोटा है, इसी से आप समझ जाइए क‍ि पैकेट नकली है। असली दवा में I बड़ा ही होगा।

8. तेलंगाना की सही स्‍पेल‍िंग Telangana होनी चाह‍िए

रेमडेस‍िव‍िर के पैकेज‍िंग पर तेलंगाना की सही स्‍पेल‍िंग Telangana ल‍िखी होगी जबक‍ि नकली दवा पर Telagana ल‍िखा हुआ है। इसल‍िए असली और नकली का अंतर समझने के ल‍िए आप स्‍पेल‍िंग पर गौर करें।

9. ‘COVIFOR’ के ठीक ऊपर गैप नहीं होना चाह‍िए

रेमडेस‍िव‍िर के पैकेज‍िंग पर COVIFOR जहां ल‍िखा है उससे ठीक ऊपर गौर करें क‍ि कोई गैप न हो। असली दवा के पैकेजिंग पर इस शब्‍द से पहले कोई गैप नहीं है जबक‍ि नकली दवा के पैकेज‍िंग पर इस शब्‍द से ठीक पहले गैप द‍िया हुआ है।

तो इन 9 प्‍वॉइंट्स की मदद से आप असली और नकली रेमडेस‍िव‍िर में अंतर को अच्‍छी तरह समझ पाएंगे।

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