जेलअधीक्षक द्वारा अब तक ग्रामीण चिकित्सा ऑथारिटी के बदले विशेषज्ञ डॉक्टर की व्यवस्था हेतु कोई उपाय नहीं किये गये

जगदलपुर MyNews36 प्रतिनिधि- केंद्रीय जेल में कैदी के दाखिले के समय हाईकोर्ट के द्वारा जारी दिशा निर्देश का बिल्कुल भी पालन नहीं होना बताया जा रहा है ।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक के बाद एक केन्द्रीय जेल के करीब 40 से अधिक अथवा विचाराधीन कैदी के कोरोना होने की जानकारी मिली है।लातूर जिला प्रशासन द्वारा जेल दाखिले के समय विचाराधीन कैदी की संपूर्ण जांच हेतु उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिये गये है। किंतु केन्द्रीय कारागृह जगदलपुर में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण पूरी तरह से कैदियों के जांच में परेशानी आ रही है।

कोरोना संक्रमण काल प्रारंभ होते ही महिला कैदियों की स्थिती राम भरोसे जैसी

केन्द्रीय कारागृह में पुरूष वार्ड में जांच की व्यवस्था लगभग ठीक है किंतु महिला कारागृह जो अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है वहां एक ग्रामीण चिकित्सा ऑथारिटी जिसे आर्मी डॉक्टर कहते है उसके भरोसे चल रही है । पिछले दिनों भी कुछ महिला कैदियों के बीच वार्ड में सही ढंग से उनके चिकित्सीय परीक्षण नहीं करने की बात सामने आई थी किंतु किसी भी प्रकार आनन फानन में उक्त बातें को पूरी तरह से संभाल लिया गया किंतु कोरोना संक्रमण काल प्रारंभ होते ही इन महिला बंदी की स्थिती राम भरोसे जैसी हो चली है।

महिला वार्ड के ही आरएमए डॉक्टर जिनकी योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए उसे वर्षों से महिला वार्ड का प्रभारी बनाकर रखा गया है अब इस संक्रमण काल में वह किस प्रकार बंदियों की जांच करेगी ऐसे सवाल उठने लगे है।जेल में चिकित्सकों की भर्ती मैनुअल में कम से कम एमबीबीएस डॉक्टर ही लिये जाते है किंतु स्थानीय केन्द्रीय जेल के अधीक्षक द्वारा किस आधार पर आरएमए डॉक्टर की सेवा ली जा रही है। अन्य मिली जानकारी के अनुसार कुछ माह पूर्व 2 विचाराधीन कैदियों की मौत भी चिकित्सा अव्यवस्था के कारण इस जेल से ले जाते वक्त हो चुकी है किंतु केन्द्रीय जेल के अधीक्षक द्वारा अब तक ग्रामीण चिकित्सा ऑथारिटी के बदले विशेषज्ञ डॉक्टर की व्यवस्था हेतु कोई उपाय नहीं किये गये है। वर्तमान में जब समूचा प्रदेश कोरोना है। संक्रमण काल से जूझ रहा है जिला प्रशासन पूरी तरह स्वास्थ सेवा उपलब्ध कराकर लोगों की जान बचाने में जुटी है।

वहीं जगदलपुर केन्द्रीय जेल के अधीक्षक जिला प्रशासन के
अलावा उच्च न्यायालय के देशों की पूरी तरह से अवहेलना कर रहे है । वही सुप्रीम कोर्ट दाखिला देने की हिदायत दे चुका है किंतु वर्तमान हालात में जब इस जेल में एक के बाद एक कोरोना संक्रमित मरीज कैदी मिलने लगे है तब भी जेल प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उच्च शिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति न कर आरएमए के हवाले महिला जेल वार्ड को छोड़ रखा है। जेल सूत्रों के ही अनुसार अब तक करीब 50 से अधिक विचारधीन कैदी महिला कई प्रकार के रोग से ग्रसित है जिनका सही समय पर उचित चिकित्सा सेवा नही दी जा रही है।

MyNews36 प्रतिनिधि एस.डी.ठाकुर की रिपोर्ट

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