होटल मालिक पर मेहरबान पुलिस का दामन दागदार

राजनांदगांव MyNews36 प्रतिनिधि- रेवाडीह स्थित थ्री स्टार होटल राज इंपीरियल में पकड़े गए साढे छह लाख रूपए के जुआ कार्रवाई में न जाने ऐसा क्या बवाल हो गया है कि कार्रवाई में शामिल रहे एक आरक्षक क्रमांक 1316 अजय जोशी का जिले के सघन नक्सल प्रभावित क्षेत्र के थाना कोहका तबादला कर दिया गया है।आरक्षक का कोहका तबादला उनके जुए की कार्रवाई में शामिल रहने के ईनाम बतौर मिला है या फिर जुएं में हुए घालमेल की सजा बतौर.. ये तो पुलिस के आला अधिकारी ही बताएंगे, किंतु राजनांदगांव के नामी होटल में पहली बार प्रक्षिशु महिला डीएसपी रूचि वर्मा की कार्रवाई पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने अभी तक होटल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है, जबकि कोराना गाईड लाईन के उलंघन और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत होटल मालिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है। बीस जुलाई को हरेली के दिन होटल राजइंपीरियल में पुलिस ने करीब साढे छह लाख रूपए के जुए का मामला उजागर किया था।मामले में तेरह जुआरी सहित होटल के मैनेजर के श्रीकांत बंधे के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।

बताया जाता है कि इस कार्रवाई में प्रशिक्षु महिला डीएसपी बसंतपुर थाना प्रभारी रूचि वर्मा सहित दो हेडकांस्टेबल और दस आरक्षक शामिल थे। पुलिस महकमे से जो जानकारी छनकर सामने आ रही है उसके मुताबिक कमरा नंबर 301 में सबसे पहले दो आरक्षक पहुंचे थे। पुलिस की रेड भांपकर जब जुआरी इधर-उधर भागने लगे इस दौरान बाकि कुछ आरक्षक फड़ में पड़े रूपए को समेटने में लग गए थे, बाकि टीम जुआरियों को दबोचने में लग गई। बाद में जब पुलिस की ओर से खुलासा किया गया है उसमें चार लाख, 22 हजार, दो सौ साठ रूपए फड़ से और दो लाख, 27 हजार 410 रूपए जुआरियों के पास से बरामद किया जाना शो किया गया है।

वास्तव में फड से और जुआरियों के पास से कितनी रकम जब्त की गई ये तो पुलिस की ईमान और धरम ही जाने पर फड़ से प्राप्त चिल्हर रकम दो सौ साठ रूपए इस आशंका को बल देता है कि लाखों के जुए के दांव में क्या पचास और दस के नोट भी दांव में फेंके गए रहे होंगे? बहरहाल साढे छह लाख के जुए के मामले में पुलिस की ईमानदार व्यवस्था में छेद कहां से हुआ…, क्या हालात निर्मित हुए…, ये तो ईमानदार अधिकारी ही बताएंगे पर कहीं न कहीं लाखों के जुए के मामले में आधी-अधूरी कार्रवाई से पुलिस के हाथ भी रंगे हुए दिख रहे हैं।

गुरूजोत का नाम सामने लाने के पीछे भी छिपा बार का लाईसेंस बचाने का राज?

होटल राजइंपीरियल में कोरोना लाकडाऊन के बीच पकड़ में आए जुआ के मामले में पुलिस के एक अधिकारी ने होटल मालिक के रूप में गुरूजोत का नाम सामने लाया है। इसमें भी पुलिस और होटल मालिक के बीच बार का लाईसेंस बचाने के एक बड़े षडयंत्र की बू सामने आने लगी है।दरअसल जिस जमीन पर होटल राजइंपीरियल बना हुआ है उसके ताजा राजस्व रिकार्ड के अनुसार व्यपवर्तित भूमि स्वामी का नाम हरजीत सिंह, जसविंदर सिंह आत्मज स्व. हरवंश सिंह और सुरेंदर कौर पति स्वं. हरवंश सिंह है। सवाल यह उठता है कि जब जमीन के भूमि स्वामी कोई और है तो फिर होटल और बार के मालिक दूसरा कैसे हो जाएंगे? सूत्रों की माने तो बार संचालन के लिए प्रतिवर्ष शासन को एक एफीडेविड भी देना होता है जिसमें यह बताना होता है कि बार या होटल संचालनकर्ता के खिलाफ कोई अपराध तो नहीं हैं?

यदि अपराध का उल्लेख सामने आएगा तो बार के लाइसेंस के रद्द होने का अंदेशा रहता है। शायद यह भी कारण हो सकता है कि होटल मालिक ने असली नाम को छिपाते हुए गुरजोत का नाम सामने लाया होगा? बहरहाल इस मामले में पुलिस का दामन इसलिए दागदार होते जा रहा है क्योंकि असली कार्रवाई के राज को दफन करने पुलिस की अपनी गढ़ी कहानी सामने आ रही है।

MyNews36 प्रतिनिधि पूरन साहू की रिपोर्ट

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