छत्तीसगढ़ शहर और राज्य समाचार

हाथकरघा ग्रामीणों को दिखा रहा स्वावलंबन की राह- मंत्री गुरु रूद्रकुमार

छत्तीसगढ़ हाथकरघा संघ ने 57 हजार 795 बुनकरों को दिलाया रोजगार

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ हाथकरघा संघ ने ग्रामीणों को स्वावलंबन की राह दिखाई है। मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने एक और जहां छत्तीसगढ़ राज्य बेरोजगारी की दर घटाने के मामले में पूरे देश भर में दूसरे नंबर पर है वहीं ग्रामोद्योग विभाग के छत्तीसगढ़ हाथकरघा संघ ने लगभग 57 हजार 795 बुनकरों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से संलग्न किया है। मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने कहा हाथकरघा संघ में संचालित गतिविधियों सराहना करते हुए कहा कि ग्रामोद्योग ग्रामीण अंचलों के लोगों को रोजगार दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में अपनी सहभागिता निभाई है।

ग्रामोद्योग संचालक सुधाकर खलखो ने बताया कि हाथकरघा संघ ने बीते दो सालों में राज्य में 19 हजार 265 हाथकरघों पर लगभग 57 हजार 795 बुनकर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार में संलग्न हैं। राज्य में 274 कार्यरत बुनकर समितियों में से 234 बुनकर समितियां हाथकरघा संघ में 59 प्रकार के शासकीय वस्त्रों का उत्पादन कर रही है।

साथ ही साथ विगत 24 माह में हाथकरघा बुनकरों द्वारा 368.75 करोड़ रूपए के उत्पादित वस्त्रों की शासकीय विभागों में आपूर्ति की गई है। हाथकरघा संघ द्वारा प्रदेश के बुनकरों को वस्त्र बुनाई हेतु बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम सेे विगत 24 माह में 106.45 करोड़ रूपए के धागों का वितरण किया गया है।

खलखो ने बताया कि शासकीय वस्त्र के उत्पादन से बुनकरों को विगत 24 माह में 104.85 करोड़ रूपए के बुनाई मजदूरी दी गई है।रायपुर में 20 से 22 सितम्बर 2019 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में राज्य के उत्पादित वस्त्रों के विपणन हेतु 06 संस्थाओं टाईटन ‘‘तनेइरा’’ पैरामून इण्डस्ट्रीज मुम्बई, हस्तशिल्प बोर्ड भोपाल, नैफेड दिल्ली, एकगांव टैक्नालॉजी गांधीनगर एवं नेपाल कॉटेज इण्डस्ट्रीज काठमाण्डू से एम.ओ.यू. किया गया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में खुले बाजार के मांग अनुरूप बिक्री हेतु ‘‘ट्रायफेड से एम.ओ.यू. किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के उपरांत विभिन्न मार्केटिंग संस्थाओं को 55.95 लाख रूपए के वस्त्रों का विक्रय किया गया। छत्तीसगढ़ हाथकरघा संघ से जुड़कर जहां ग्रामीणों को स्वरोजगार मिल रहा है वही उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है।

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