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Guideline release: छत्तीसगढ़ में अब ऐसे होगी रेत खदानों की नीलामी

Guideline release
file photo

रायपुर। रेत खदानों का ठेका रिवर्स बिडिंग के माध्यम से होगा।इसमें रेत खदान की अधिकतम दर सरकार तय करेगी।टेंडर में शामिल ठेकेदार उस रेट के आधार पर घटते दर पर बोली लगाएंगे। सबसे कम दर पर बेचने के लिए राजी होने वाले ठेकेदार को टेंडर मिलेगा।

सरकार ने रेत खदानों की नीलामी के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है।रेत खदानों का आवंटन अब जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।समिति रेत खदानों के क्लस्टर का चिन्हांकन करेगी।क्लस्टर के लिए बिक्री दर का निर्धारण जिला स्तरीय समिति ही करेगी।

दो वर्ष के लिए मिलेगा ठेका

गाइडलाइन के अनुसार रेत खनन और लदान के लिए उच्चतम निर्धारित मूल्य (बिक्री दर) के विरूद्ध खदान स्थल पर न्यूनतम प्रति घनमीटर बोली (रिवर्स बीडिंग) के आधार पर ठेकेदार का चयन किया जाएगा।पट्टे के निविदा अनुबंध की अवधि दो वर्ष की होगी,जिसे आवश्यकतानुसार एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा।

ओवरलोड पर सख्ती,आनलाइन होगा पंजीयन

कम मात्रा में रेत का उपयोग करने वाले उपभोक्ता व्यापारियों के माध्यम से रेत प्राप्त कर सकेंगे।इसके लिए जिले में रेत के व्यवसाय के लिए व्यापारियों का आनलाइन पंजीयन विभागीय पोर्टल पर किया जाएगा।रेत के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेत परिवहन करने वाले वाहनों और परिवहनकर्ताओं का विभागीय पोर्टल पर आनलाइन पंजीयन भी किया जाएगा।

उचित दर पर रेत की उपलब्धता के लिए आवश्यकतानुसार परिवहन की दर का निर्धारण भी किया जाएगा। किसी वाहन को तीन बार से अधिक अवैध परिवहन करते पाए जाने पर उसे आनलाइन पंजीयन से अलग करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निकायों को 25 फीसद अधिक रायल्टी दी जाएगी

गाइडलाइन में पंचायत या नगरीय निकायों को रेत खदानों से रायल्टी देने का प्रावधान रखा गया है।पिछले 5 सालों में उन्हें प्राप्त अधिकतम वार्षिक रायल्टी राशि में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर समतुल्य राशि अगले वित्तीय वर्ष से प्रदान की जाएगी। 

जांच के लिए उड़नदस्ता 

रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला और संचालनालय स्तर पर विशेष उड़नदस्ते तैनात किए जाएंगे। इस व्यवस्था से नदियों और जल स्त्रोतों के पर्यावरणीय संरक्षण के साथ ही उपभोक्ताओं को सुगमता से उचित मूल्य पर रेत उपलब्ध हो सकेगी।साथ ही सरकार को रायल्टी के साथ डीएमएफ,पर्यावरण व अधोसंरचना उपकर सहित नीलामी राशि और पट्टों के अनुबंध निष्पादन से स्टाम्प ड्यूटी के अलावा पंजीयन शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।

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