रायपुर – एक बार फिर गोठानों में बड़े ही धूमधाम के साथ हरेली तिहार मनाया जाएगा। इसके लिए राज्य के सभी कलेक्टरों को तैयारियों के लिए निर्देशदिया गया है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ राज्य का पहला त्योहार है, जो छत्तीसगढ़ की ग्रामीण कृषि संस्कृति, परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य के तीज-तिहार, परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाने की पहल के चलते हरेली सहित अन्य तिहार जैसे पोला-तीजा, छेर-छेरा पुन्नी आदि का आयोजन बीते तीन वर्षों से बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ना है, ताकि लोग छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला-संस्कृति, तीज-त्यौहार एवं परंपराओं पर गर्व की अनुभूति कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ी तीज-त्यौहारों पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा भी इसी उद्देश्य की पूर्ति का एक हिस्सा ताकि लोग छत्तीसगढ़ी तीज-त्यौहारों के अवसर पर अपनी बढ़-चढ़कर भागीदार सुनिश्चित कर सकें। इस मौके पर ग्रामीणों के मध्य गेड़ी दौड़, कुर्सी दौड़, फुगड़ी, रस्साकशी, भौंरा, नारियल फेंक आदि की प्रतियोगिताएं और छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन आदि की भी प्रतिस्पर्धाएं होंगी।

गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डा. अय्याज तम्बोली ने सभी कलेक्टरों, संभागायुक्तों को पत्र लिखकर गोठानों में पारंपरिक कार्यक्रम के साथ ही गौठान प्रबंधन समिति, स्व-सहायता समूह, ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से हरेली तिहार के दिन गोठानों में कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा के संबंध में चर्चा करने को कहा है।

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