रोजाना लग रही सैकड़ों मरीज़ों की भीड़ ,कोविड प्रोटोकॉल का खुलेआम उल्लंघन

राजनांदगांव MyNews36 प्रतिनिधि- घुमका में विगत पखवाड़े से लगातार कोरोना पॉज़िटिव केस मिलने से स्थिति बिगड़ती जा रही है।सबसे पहले थाना से एक हवलदार के पीड़ित होने के बाद परिजनों समेत 7 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है।इसके बाद शिक्षक, फल व्यवसायी, बुज़ुर्ग महिला और समीपवर्ती गांवों को मिलाकर 12 केस मिल चुके हैं।

माना जा रहा है कि संक्रमण की शुरुआत थाना से हुई है।इन सबके बावजूद स्वास्थ्य विभाग पंचायत और प्रशासन की ओर से एहतियात नहीं बरतना ज्यादा नुकसानदेह हो रहा है चूँकि कोविड 19 के संक्रमण रोकने केंद्र और राज्य सरकार ने महामारी एक्ट के तहत भीड़ जमा करने को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए दूरी का पालन करने का निर्देश दिया है।परन्तु कोरोना को लेकर संवेदनशील हो चुके घुमका एवं आसपास के हालात को देखते हुए भीड़ जमा करना विस्फोटक हो सकता है और इसी तरह की भीड़ क्षेत्र में आये दिन जमा हो रही है।

खासकर भ्रम और भय के चलते ग्रामीण सरकारी अस्पताल के बजाय झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच रहें हैं ज्यादातर झोलाछाप चिकित्सकों की दुकानदारी चल रही है जिसके चलते कोरोना का कहर टूट सकता है।सबसे खराब स्थिति समीपस्थ ग्राम भरदाखुर्द में बताया जा रहा है जहां एक आयुर्वेद चिकित्सा के आड़ में कथित वैद्य रोजाना 50 से 100 मरीजों को गठिया बात लकवा जोड़ों के दर्द जैसी गम्भीर बीमारियों के इलाज का दावा करते हुए मरीजों का कोरोनाकाल मे भीड़भाड़ के बीच स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के नाक के नीचे धड़ल्ले से करते हुए कोरोना के गम्भीर खतरे में हज़ारों लोगों को डाल रहा है जबकि उसी गांव के दुर्ग में पदस्थ एक शासकीय कर्मचारी को कोरोना हो चुका है। यही नहीं विगत लम्बे समय से उक्त कथित वैद्य बिना किसी डिग्री और पंजीयन के इलाज करते आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच तक नहीं किया।

जबकि जानकर सूत्रों के अनुसार उक्त वैद्य की योग्यता बमुश्किल हाई स्कूल तक नहीं है सूत्रों के मुताबिक प्रतिदिन मरीजों की संख्या के हिसाब से उक्त झोलाछाप वैद्य की कमाई 50 हज़ार रुपये के ऊपर बतायी जा रही है।कोरोना को लेकर आशंकित आसपास गांव के ग्रामीणो में झोलाछाप वैद्य के घर कोविडप्रोटोकॉल के खिलाफ कथित मरीज़ों की जमा हो रही भीड़ को लेकर काफी दहशत है। परंतु प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नज़र नहीं पड़ना काफी चिंताजनक है।

उक्त मामले को लेकर चिकित्सा विभाग के जानकार सूत्रों के अनुसार कुछ मरीज़ों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि आयुर्वेद के आड़ में आधुनिक चिकित्सा के एलोपैथी के स्टेरॉयड (डेक्सामेथासोंन) जैसे अति खतरनाक ग्रुप की दवाइयों को चूर्ण में मिलाकर दिए जाने की शिकायतें भी बतायी जाती हैं। इस एलोपैथी दवाई से मरीजों को तत्काल कुछ दिन के लिए राहत मिल जाती है।जिससे मरीजों को वैद्य के चमत्कारी होने का आभास होता है।परन्तु मान्यता प्राप्त अनुभवी डॉक्टरों के अनुसार उक्त दवाइयों गम्भीर परिणामस्वरूप किडनी और लिवर फेल होने का भी खतरा है बहरहाल उक्त फ़र्ज़ी वैद्य के चलते भरदाखुर्द गांव कोरोना के मुहाने पर है और कथित तौर पर यह भी आशंका जाताई जा रही हैै की पूरा घुमका लॉकडाउन होने के बावजूद स्थाानीय स्वास्थ्य विभाग हो या जिले के विभागीय आला अधिकारियों की झोलाछाप वैद्य को खुली छूट मिली हुई है। तभी यह झोलाछाप वैद्य इतनी दिलेरी से खुलेआम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करता नजर आ रहा है।

उक्त मामला बहुत गंभीर है इसकी जांच के लिए मैं तहसीलदार और स्थानीय पुलिस प्रशासन को निर्देशित करता हूं- मुकेश रावटे,एस डी एम राजनांदगांव

इस तरह से करोना काल मे बिना मान्यता प्राप्त डिग्री के अगर कोई भी झोलाछाप वैध या डॉक्टर किसी का इलाज करता है तो उसपर उचित कार्यवाही की जाएगी- डॉ. विजय खोब्रागडे,बी एम ओ घुमका

MyNews36 प्रतिनिधि मुबारक खान की रिपोर्ट

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