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कलेक्टर द्वारा जारी शिक्षकों के मुख्यालय में रहने के फ़रमान पर फेडरेशन में आक्रोश

आदेश शिक्षकों की ईमानदारी और छवि धूमिल करने की कोशिश है-मनीष मिश्रा

manish mishra

राजनांदगांव- जिला कलेक्टर ने आदेश निकाला है कि-शिक्षक अपने मुख्यालय में रहने का प्रमाण पत्र दो तिहाई पंचायत प्रतिनिधि और पंचायत सचिव के हस्ताक्षर करवाकर प्रत्येक माह के 20 तारीख़ को जमा करेगा,तभी उनका वेतन जमा किया जायेगा।यह आदेश शिक्षकों की ईमानदारी के साथ खिलवाड़ करने और उनके मनोबल को कमजोर करने वाला है।छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष-मनीष मिश्रा,प्रांतीय सचिव-सुखनंदन यादव प्रांतीय कोषाध्यक्ष-शिव सारथी,अजय गुप्ता,छोटे लाल साहू,सी डी भट्ट,रंजीत बनर्जी,अश्वनी कुर्रे,बसन्त कौशिक,हुलेश चन्द्राकर,संकीर्तन नंद,ने राजनांदगांव कलेक्टर के आदेश को शिक्षकों के मनोबल को कमजोर करने वाला आदेश बताते हुए कहा है कि-जब विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है और सभी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा अपनी उपस्थिति निर्धारित समय पर टेबलेट में दर्ज करना,ये शिक्षकों की ईमानदारी को दर्शाता है।हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में वहां के प्राचार्य के पास डीडी पावर के रहते स्थानीय पंचायत सचिव से अपने वेतन देयक में हस्ताक्षर कराना शिक्षकों की गरिमा को धूमिल करना है और ऐसा आदेश सिर्फ शिक्षा विभाग के लिए है,अन्य विभाग के लिए नहीं है।

कर्मचारियों पर विश्वास नहीं,तो शिक्षा गुणवत्ता में वृद्धि की अपेक्षा ना करें

कलेक्टर सभी विभाग का उच्चाधिकारी होता है,जब विभाग को अपने कर्मचारियों पर विश्वास नहीं है,तो शिक्षा गुणवत्ता में वृद्धि की अपेक्षा करना भी बंद करें,यदि कलेक्टर महोदय चाहते हैं,तो प्रत्येक स्कूली गांव में शिक्षकों के रहने के लिए सर्व सुविधायुक्त आवास दें,इससे सभी शिक्षक अपने मुख्यालय में रहेंगे।

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आदेश वापस नहीं लिया गया तो करेंगे आंदोलन

फेडरेशन क़े प्रांताध्यक्ष-मनीष मिश्रा ने कहा है कि-हम जानते हैं जिलाधीश शिक्षा में उच्च गुणवत्ता चाहते हैं और उन्हें यह भी समझना होगा कि-गुणवत्ता मात्र शिक्षकों को प्रताड़ित करने से नहीं आएगी,बल्कि वो सभी बुनियादी सुविधा भी जरूरी है जो शिक्षा को बेहतर बनाता है।लेकिन शासन को इससे कोई मतलब ही नहीं है वो तो बस प्रशासनिक अधिकारियो के हाथों शिक्षकों पर दबाव बनाकर उन्हें वेदना पहुंचा रहे हैं।अगर ऐसा नहीं है तो प्रशासन शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कार्य करें,न कि ऊल-जुलूल आदेश निकालकर भय पैदा करें।अगर जिला कलेक्टर तत्काल आदेश वापस नहीं करेंगे तो फेडरेशन इसका व्यापक स्तर पर आंदोलन के सहारे विरोध करेगा।

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