Ajit Jogi Biography
Federation association with Jogi

बिलासपुर- बात सन 2011 की है जब छत्तीसगढ़ प्रदेश के सारे शिक्षाकर्मी संगठन मात्र छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी को छोड़कर एक मंच में आये और सम्पूर्ण संविलियन की माँग को लेकर हड़ताल करने का निश्चय किये।संयुक्त मोर्चा का नाम दिया गया शिक्षाकर्मी फेडरेशन इसके प्रतिनिधित्व कर्ता थे कृष्ण कुमार नवरंग,वीरेंद्र दुबे,केदार जैन,साथ में अन्य यह एक ऐसा मंच बना जिसमें छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा शामिल नही थे,मन मे संसय भी था कि सबसे अनुभवी और काबिल नेता के बगैर आंदोलन सफल होगा भी की नही खैर मानसिक उपपोह के बीच आंदोलन की शुरुआत हुई।

आंदोलन सामान्य प्रक्रियाओं की भांति ब्लाक और जिला से राजधानी रायपुर स्थान्तरित होते ही शिक्षाकर्मीयो का हुजूम उमड़ पड़ा और तत्कालीक मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सरकार के माथे में बल आ गया यही कारण था कि राज्य सरकार दमनकारी नीति अपनाते हुए हमारे दो जांबाज और क्रांतिकारी नेता केदार जैन और वीरेंद्र दुबे को पुलिस हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल रायपुर में अनिरुद्ध कर दिया।उनके गिरफ्तार होते ही बाकी शीर्ष नेताओ की गिरफ्तारी की डर हमें सताने लगा और हुआ भी वही कृष्ण कुमार नवरंग को रायपुर पुलिस सरगर्मी से तलाशने लगी,ऐसे में हम लोगो ने उन्हें भूमिगत हो जाने की सलाह दिए।नवरंग उस समय पहले बूढ़ा तालाब स्थित बूढ़ादेव मंदिर में छुपकर आंदोलन का संचालन करने लगे और उनके दिशा निर्देश पर हम सभी द्वितीय पंक्ति के शिक्षक नेता मैं (शिव सारथी),जितेंद्र शर्मा,चंद्रशेखर तिवारी सहित अन्य साथी आंदोलन स्थल पर आंदोलन सहित टीवी मीडिया को कवर करते रहे अचानक नवरंग जी को पता चल जेल में बंद केदार जैन और वीरेंद्र दुबे अपने साथ बन्द अन्य शिक्षकों के साथ भूख हड़ताल में बैठ गए।नवरंग जी ने अन्य प्रांतीय नेताओ से रॉय मशवरा उपरांत जेल भरो आंदोलन का आगाज करना पड़ा,फिर क्या था पूरे प्रदेश भर के शिक्षकों का रायपुर आकर जेल जाने का सिलसिला चालू हो गया।पहले दिवस तो यह सामान्य रहा लेकिन दूसरे दिन तो प्रदेश के राजधानी रायपुर के आसपास के सभी जेल शिक्षकों से भर गए शासन ने रायपुर सहित आसपास के स्टेडियम को अस्थायी जेल बनाया और हमारे शिक्षको को गिरफ्तार करके वहां रखने लगे।

उस समय मैं (शिव सारथी) और जितेंद्र शर्मा रायपुर सेंटर जेल के मैदान/प्रांगण में महिला साथियो को जिन्हें गिरफ्तार किया गया था सांत्वना देते उनके बीच दिन-रात डटे रहे और गांधी भजन- ” रघुपति राघव राजा राम ” सहित अन्य प्रेरणादायक भजम से साथियो का हौसला बढ़ाते रहे।इसी बीच ऐसा भी आया कि महिला शिक्षिकाओं ने भी जेल में बंद दोनों नेताओं का अनुसरण करते हुए जेल प्रबन्धन से असहयोग आंदोलन आरम्भ कर दिया,इससे उनके गोद में दुधमुहे बच्चे भूख प्यास से रोने बिलखने लगे।जेल प्रशासन के साथ हम भी परेशान हो गए उधर जेल अंदर से लगातार खबर आ रही थी कि केदार जैन और वीरेंद्र दुबे सहित तमाम शिक्षकों के लिए शौचालय और यूरिनल रूम में ताला जड़ दिया गया जिससे उनके स्वास्थ्य खराब होने लगा ऐसे में परेशान बेहाल हमारे बीच के एक साथी ने उस समय के युवा कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय को फोन करके बुला लिया वे उस समय पैर से घालय थे फिर भी हाकी टेकते जेल पहुँचे पर जेल प्रशासन उन्हें हमारा सहयोग नही करने दिया इसके बाद विकास उपाध्याय सम्मानीय अजीत जोगी को फोन करके हमारी स्थिति के बारे में बताए और जेल में बंद साथियो के स्वाथ्य की भी जानकारी दिए।

जोगी जी तत्काल बिना समय गवाय देवदूत की भांति चंद मिनटों में सेंट्रल जेल के मुख्यद्वार पर थे वे अपनी स्पेशल मिनी बस से व्हील चेयर से पिछले दरवाजे से बाहर उतरे हम शिक्षको का जोश दोगुना हो गया और शासन विरोधी नारों से पूरा रायपुर दहल उठा।जोगी जी को जेलर ने वही गेट पर रोक दिया।अपने तेवर के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री शेर की भांति गरजे और जेलर को बोले आई जी और एसपी को बुलाओ जब दोनों अधिकारी सामने आए तो किसी बादशाह की भांति जोगी जी गरज रहे थे मेरे शिक्षकों को कुछ हुआ तो जेल को आग लगा दूंगा मुझे काटो तो खून नही मैं सन्न रह गया।किसी पूर्व सी.एम.का यह तेवर वाकई में प्रभावशाली था।दोनों पुलिस अफसर सॉरी बोलते हुए जेल का दरवाजा खोले जोगी जी की स्वचलित व्हील चेयर सीधा जेल के मुख्य कपाट के पास था,मुख्य द्वार खोला गया शाम 7 बजे भी यह हुआ अमूमन ऐसा नही होता जोगी जी अंदर गए 15 मिनट बाद वापस आ कर जेल परिसर में ही हमें सम्बोधित करने लगे सम्बोधन के अंत में मैने उन्हें बताया हमारे महिला साथी भी जेल परिसर में गिरफ्तार किए गए है उनके मासूम बच्चे भूख से रो रहे है तथा शाम-रात को भी हमारे गिरफ्तारी का सिलसिला शासन द्वारा चलाया जा रहा है,जिसमें महिला शिक्षाकर्मी भी शामिल है जिन्हें गरियाबंद,महासमुंद और राजनादगांव सहित दुर्ग के जेलों में ले जाया जा रहा है जबकि संवैधानिक रूप से शाम के बाद महिलाओ को गिरफ्तार करने का प्रवधान नही है यह विधि विरुद्ध है जिस पर एक बार फिर घायल शेर की दहाड़ सुनाई दिया जोगी जी जेलर सहित उपस्थित आई जी,एस पी को आदेशात्मक लहजे में बोले ये सब रुकना चाहिए वरना मैं अभी जिंदा हूँ कल सुबह फिर आऊंगा।

उनके जाते ही किसी मुखिया का फोन आया सभी बच्चों के लिए दूध-फल की व्यवस्था होने लगीं,जेल से आम शिक्षकों के शपथ भरवाकर छोड़ा जाने लगा सुबह होते-होते हमारे पक्ष में ग्यारह आदेश निकल चुका था,जिसमें शिक्षाकर्मी से नाम परिवर्तन कर शिक्षक पंचायत संवर्ग,अंशदायी पेंशन कटौती,क्रमोन्नति सहित अन्य आदेश थे।मैने रायपुर के सेंट्रल जेल की सर जमी को प्रणाम किया और जोर से अजीत जोगी जिंदाबाद की नारा बुलंद कर बिलासपुर के लिए प्रस्थान किया,यह सोच कर की हमने आदरणीय जोगी जी के सानिध्य पाकर एक जंग जीत लिया।धन्यवाद जोगी जी,आप हमारे लिए सदा अमर रहेंगे।विनम्र श्रद्धांजलि

✍️ शिव सारथी (सहायक शिक्षक)

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