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रायपुर-विभिन्न राज्यों के दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम निकलने लगे हैं।जो स्टूडेंट सफल होने के साथसाथ उम्मीद के मुताबिक नंबर पाने में सफल रहे हैं, खुशी से उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे होंगे।स्व-प्रेरित ऐसे बच्चे आगे अपने सपनों को पूरा करने को लेकर उत्साह से भरे होंगे।लेकिन जिन बच्चों के नंबर कम आए हैं या फिर किसी कारण फेल हो गए हैं, उन्हें निकम्मा कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।उन्हें शर्मिंदा करने या उन्हें डांटने-फटकारने की बजाय उनका हौसला बढ़ाने और उनकी पसंद की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।

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हम आमतौर पर सीबीएसई बोर्ड के 85 से 90 प्रतिशत स्टूडेंट्स के सफल होने और उनके द्वारा 90, 95 और यहां तक कि 100 प्रतिशत अंक लाने की बात सुनते रहे हैं, लेकिन दो दिन पहले आये सबसे बड़े यूपी बोर्ड (माध्यमिक शिक्षा परिषद) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में क्रमश: 80.07 और 70.06 प्रतिशत छात्र-छात्राओं के सफल होने और उनके द्वारा भी 97-98 प्रतिशत अंक लाने से यही साबित होता है कि अब राज्य बोर्डों द्वारा नियंत्रित सरकारी और निजी स्कूलों में भी पढ़ाई का स्तर तेजी से ऊपर उठ रहा है।

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में जहां कानपुर के ओंकारेश्वर एसवीएन इंटर कॉलेज के गौतम रघुवंशी ने 97.17 प्रतिशत अंक हासिल किए, वहीं बाराबंकी के शिवम ने 97 और बाराबंकी की ही तनुजा विश्वकर्मा ने 96.83 प्रतिशत अंक हासिल किए।दूसरी ओर, इंटर में बड़ौत, बागपत की तनु तोमर ने 97.80 प्रतिशत अंक हासिल किए।सबसे अच्छी बात यह है कि पढ़ाई और प्रदर्शन के मामले में लड़कियां लगातार आगे निकल रही हैं।इस बारे में तनु तोमर भी कहती हैं,‘लड़कियां किसी भी तरह लड़कों से कम नहीं हैं।


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बस जरूरत कड़ी मेहनत करने की और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की है।सकारात्मक सोच और मेहनत के दम पर लड़कियां आसमान छू सकती हैं।

सोच बदलने की जरूरत

जो स्टूडेंट सफल रहे हैं, उनकी सफलता में उनकी सकारात्मक सोच और उनके माता-पिता सहित शिक्षकों का भी बड़ा योगदान रहा है।लेकिन जो छात्रछात्राएं किसी कारण फेल हो गए हैं या जिन्हें अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, उन्हें भी निराश और हताश होने की कतई जरूरत नहीं है।हो सकता है कि मेहनत करने के बावजूद किसी कारण उनके पेपर अच्छे नहीं हुए हों।कोई पारिवारिक, शारीरिक या आर्थिक परेशानी रही हो या फिर जो विषय उन्हें दिलाए गए हों, उनमें रुचि न होने के कारण उनका मन नहीं लगता हो और इस कारण वे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता|

जो भी हो, इसके लिए उन छात्र-छात्राओं को डांटने-फटकारने या उन्हें शर्मिंदा करने की बजाय यह समय उनके साथ खड़े होने का है।यूपी बोर्ड से कुछ दिन पहले आए तेलंगाना राज्य बोर्ड की परीक्षा परिणाम के बाद वहां के करीब 19 बच्चों ने आत्महत्या जैसा नकारात्मक कदम उठा लिया था।इसके पीछे के कारणों की तो पड़ताल की जा रही होगी, लेकिन माता-पिता और अध्यापकों का यह फर्ज बनता है कि वे अपने बच्चों और स्टूडेंट्स का एक समान ध्यान रखें। सभी बच्चे एक जैसी प्रतिभा के नहीं होते और सभी से एक ही तरह के परिणाम की भी उम्मीद नहीं की जा सकती|

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