लोडि़ंग के नाम पर मची लूट, सरपंच-सचिव दे रखे हैं खुली छूट

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तिवारी,अंगू,चंद्राकर की चल रही दुकान,प्रशासन भी मेहरबान?

राजनांदगांव।खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के बरछाटोला के रेत की कहानी तो आपने सुनी ही है और आखिर हश्र क्या हुआ ये भी देखा ही है,अब सुनिए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के निर्वाचन विधानसभा क्षेत्र ग्राम पंचायत खुटेरी के रेत की कहानी।यहां शिवनाथ नदी में तीन से चार माफियाओं ने मिलकर पिछले महीने भर से रकबा 512 में रेत पर अवैध कमाई करने का खुंटा गाड़ दिया है।हालाकि ग्राम पंचायत खुटेरी के पास बकायदा रेत खदान का लीज है पर ये आप भली भांति जानते हैं कि लीज होती है पंचायत के नाम पर किन्तु खदान चलाते हैं कोई और ठीक इसी तरह यहां भी ऐसा ही कुछ हुआ है।खदान पहुंचने पर पता चलता है कि खदान तो कोई तिवारी,अंगू और चंद्राकर मिलकर चला रहेे हैं पंचायत का काम सिर्फ रायल्टी पर्ची काटना है।

अब क्या पुछना इन तीनों-चारों की जुगलबंदी में लोडिंग के नाम पर जबरदस्त लूट मची हुई है।जाहिर सी बात है कि-इनकी लूट को ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव का सरंक्षण मिला होगा क्योंकि पोकलैड मशीन खदान में जबरदस्ती तो घुंसी नहीं होगी?रेत लोडिंग के नाम पर गाड़ी पीछे ढाई से तीन हजार रूपए लिए जा रहे है यानी प्रतिदिन दो से ढाई लाख रूपए में तिवारी,अंगू और चंद्राकर का बंटवारा हो रहा है।पोकलैंड किसी चंद्राकर ने लगा रखी है।अब अहंम सवाल यह है कि-क्या ग्राम पंचायत खुटेरी ने उस पोकलैंड मशीन लगाने वाले के साथ अनुबंध किया है?यदि अनुंबंध किया है तो किन-किन शर्तो पर किया है? रेत खुदाई के किन-किन नियमों को जानकारी उसे दी गई है? पोकलैड का किराया क्या निर्धारित किया गया है? यदि किराया पर मशीन लगाई गई है तो क्या पंचायत में इसका प्रस्ताव किया गया है? पोकलैंड मशीन वाले को अब तक पंचायत के किस मद से किस दर पर भुगतान किया गया है।ग्राम पंचायत के सचिव सिवारे के पास ऐसे किसी भी सवाल का जवाब नहीं है।उनका तो यह कहना है कि-रेत खदान के बारे में उन्हे कोई जानकारी नहीं है?सब चीज सरपंच हैडिंल कर रहे हैं।यहीं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि-रेत का पूरा खेल कहां से हुआ है,कैसे हुआ है और किसके इशारे पर हुआ है?

पर्यावरण नियमों के कटघरे में खदान

खुटेरी का रेत खदान पूरी तरह से राज्य स्तर पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण छत्तीसगढ भारत सरकार पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पर्यावरण स्वीकृति कंडिकाओं के नियम,निर्देशों के कटघरे में है।

यदि जिला प्रशासन,माईनिंग,राजस्व और पुलिस इन नियमों की जांच में उतर आए जो वही हश्र होगा जिसमें डोंगरगांव जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत भोथली-संबलपुर में कुछ सालों पूर्व रेत खनन के मामले में ‘सागर’ की गहराई नाप दी गई थी,सरपंच-सचिवों को जेल भेज दिया गया था।पर्यावरण स्वीकृति कंडिकाओं के आधार पर यहां के खदान में एक नहीं दस खामियां है।इन खामियों के मामले में सीधे-सीधे वे लोग ही दोषी माने जाएंगे जिनकी मशीन लगी है,जिन्होने मशीन लगवाया है और जिन्होने ऐसे काम की सहमति दी है?आगे इस मामले में और भी कई दस्तावेजी प्रमाण और खुलासे किए जाएंगे।

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