राज्‍यसभा ने महामारी संशोधन विधेयक 2020 को आज पारित कर दिया। इसके जरिए 1897 के महामारी अधिनियम में संशोधन किया गया है और महामारी से निपटने में लगे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की सुरक्षा के उपायों को विधेयक में शामिल किया गया है।यह विधेयक इस साल अप्रैल में जारी किया गया महामारी संशोधन अध्‍यादेश का स्‍थान लेगा। विधेयक में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा से जुडे कर्मियों को नुकसान पहुंचाने, घायल करने या उनके जीवन को खतरे में डालने जैसी गतिविधियों को संज्ञेय अपराध करार देने तथा और उन्‍हें जमानत न देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके लिए तीन से पांच महीने की जेल की सजा और पचास हजार से दो लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान विधेयक में किया गया है।

विधेयक पर चर्चा में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों पर हो रहे हमलों को ध्‍यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है। उन्‍होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्‍पन्‍न स्थिति तथा स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के साथ हुई घटनाओं के मद्देनजर इस बारे में कड़ा कानून बनाना जरूरी हो गया था।

सदन ने भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के बिनॉय विस्‍वम और कांग्रेस के के.सी.वेणुगोपाल ने इस विधेयक से संबंधित अध्‍यादेश को रद्द करने के प्रस्‍तावों को भी खारिज कर दिया।

इससे पहले, बहस शुरू करते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने कथित रूप से अनियोजित तरीके से देश भर में लॉकडाउन लागू करने को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे देश की अर्थव्‍यवस्‍था, रोजगार और प्रवासी मजदूरों के जीवन पर बुरा असर पड़ा है। उन्‍होंने महामारी से निपटने में सरकार की ओर से देरी किए जाने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस के एक और नेता आनंद शर्मा का कहना था कि नियम बनाते समय परामर्श की प्रक्रिया में राज्‍यों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों के बारे में जानकारी दी। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने निजी अस्‍पतालों द्वारा रोगियों से मनमानी राशि वसूलने का मुद्दा उठाया। राष्‍ट्रीय जनता दल के मनोज झा का कहना था कि लोगों की जिंदगी बचाना और किसी भी पहल से ज्‍यादा जरूरी है। भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के बिनॉय विस्‍वम का कहना था कि कोविड महामारी के नाम पर हो रही अनियमितताओं को रोका जाना चाहिए और कोविड योद्धाओं को संरक्षण मिलना चाहिए। राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्‍हाण ने कहा कि इस विधेयक से स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा। आशा कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि महामारी के दौर में उनका संरक्षण भी आवश्‍यक है।

शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल से जुड़े पेशेवर लोगों को पर्याप्‍त सुरक्षा उपकरण और बेहतर वेतन दिए जाने की मांग की। बहुजन समाज पार्टी के वीर सिंह का आरोप था कि इलाज पर लगने वाले भारी खर्च की वजह से कोविड रोगी, महामारी के इलाज के लिए सामने नहीं आ रहे हैं।

भाजपा की सरोज पांडे ने स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के हितों की रक्षा के लिए केन्‍द्र द्वारा किए गए विभिन्‍न उपायों की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने उनकी सुरक्षा और हिफाजत के लिए समय पर कानूनी उपाय किए हैं। भाजपा के एक अन्‍य नेता डॉ अनिल जैन ने विपक्ष पर इतने महत्‍वपूर्ण विधेयक की चर्चा में राजनीति करने का आरोप लगाया।

ऑल इंडिया अन्‍ना डीएमके पार्टी के ए. विजय कुमार, वाई एसआर कांग्रेस के सुभाष चंद्र बोस, तेलुगु देशम पार्टी के के.रवीन्‍द्र कुमार, मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की झरना दास, कांग्रेस के पी एल पुनिया और कई अन्‍य सदस्‍यों ने भी विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्‍सा लिया।

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