education tips for students

रायपुर-पढ़ाई और करियर का एक साथ होना संभव नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में कभी-कभी करियर की वजह से हायर स्टडीज में  भी ब्रेक लगाना पड़ता है। ऐसे समय में कया किया जाए, यह एक बड़ा सवाल है। अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, ऐसे ही समय में फेलोशिप बड़ी राहत का काम करती हैं। अगर आप भी अपने करियर में भेड़ चाल से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं तो फेलोशिप इस दिशा में एक बेहतरीन मौका देता है। सबसे पहले हम जानते हैं, क्या है फेलोशिप और कैसे यह करियर को दे रहा है नई राह। 

क्या है फेलोशिप

आइये सबसे पहले आपको बता दें कि यह एक लर्निंग प्रोग्राम है जो कई तरह की सोशल एक्टिविटी प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। यदि आप के अंदर समाज के विचारों से अलग हटकर सोचने का हुनर है और साथ ही आप समाज को बदलने का जज्बा रखते हैं तो आपकी इस सोच में फेलोशिप प्रोग्राम आपका साथ देते हैं। आपको बता दें कि ये प्रोग्राम शॉर्ट टर्म से लेकर सालों तक के हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति के प्रोफेशनल विकास पर फोकस किया जाता है। यह प्रोग्राम किसी खास संस्था द्वारा संचालित होते हैं जो किसा एक विषय पर काम करती है। खास बात ये है कि फेलोशिप प्रोग्राम स्नातकों और स्नाकोत्तरों के लिए पेश की जाती है। यंगस्टर्स ध्यान दें फेलोशिप प्रोग्राम पब्लिक पॉलिसी, कला और शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय हैं। आसपास चल रही परेशानियों को बेहतर तरीके से हल करने के लिए पढ़ें-लिखे प्रोग्राम से जोड़कर फेलोशिप करियर के साथ ही साथ समाज को भी और अच्छा बनाने का काम कर रही है। 

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इसके लिए जरूरी योग्यताएं-

  1. फेलोशिप में आवेदन करने से पहले अपनी कैपबिलिटी के बारे में जान लें। 
  2. फैलोशिप के जितने भी प्रोग्राम होते हैं उनके लिए हार्ड वर्कर्स को चुना जाता है। 
  3. चूंकि फेलोशिप में आपको सामाजिक कार्यों से जोड़ा जाता है, इसलिए आपकी नॉलेज और रुचि की परीक्षा होती है। 
  4. आपकी लीडरशिप क्वॉलिटी और कल्चर गतिविधियों को भी परखा जाता है।
  5. दो से चार पन्ने के एप्लीकेशन फॉर्म में आपकी राइटिंग को भी जांचा जाएगा। 
  6. मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत लोगों का इसमें चुनाव होता है। 
  7. वर्किंग लोग भी फेलोशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं। 
  8. फेलोशिप प्रोग्राम का कोई भी हिस्सा बन सकता है। 
  9. ज्यादातर फेलोशिप प्रोग्राम के लिए एप्लीकेशन फॉर्म अक्टूबर से जुलाई तक आते हैं। 
  10. 6 महीने सेे एक साल तक कोर्स की अवधि होती है।

आवेदन ऐसे करें-

फेलोशिप के नाम-

एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि-यदि आज के युवा का रुझान रिसर्च फील्ड के साथ-साथ अकेडमिक फील्ड में भी है तो ये करियर आपके लिए बेहतर है।सबसे अच्छी बात ये है कि-आप पढ़ाई के साथ -साथ इसे कर सकते हो।इसके लिए सरकार भी पूरी मदद करती है। 

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