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construction material india :घर बनाने का अच्छा मौका,बिल्डिंग मटेरियल के गिरे दाम

construction material india

रायपुर-बहुत से सेक्टरों के लिए ऑफ सीजन माना जाने वाला बारिश का सीजन आ गया है,लेकिन इसका सीधा-सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को होने लगा है।अगर आप घर बनाने के इच्छुक हैं तो इससे अच्छा मौका और नहीं मिलेगा,क्योंकि बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है।साथ ही दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि-बारिश का सीजन होने के कारण मकानों को मजबूत करने के लिए होने वाली तराई भी आसानी से हो जाती है।दो माह पहले रेत जहां 7500 रुपये तक बिक रही थी,आज की स्थिति में सीधे-सीधे 2200 रुपये सस्ती होकर 5300 रुपये (500 फीट प्रति हाइवा) बिक रही है। कारोबारियों का कहना है कि-अब रेत घाट खुलने से आवक अच्छी हो गई है और कीमतों में और गिरावट आ सकती है। रेत के साथ ही ईंट की कीमतों में भी अभी किसी भी प्रकार से तेजी नहीं है।ईंट इन दिनों 3500 रुपये से 3800 रुपये प्रति हजार है और फ्लाइएश वाली ईंट की कीमत थोड़ी और सस्ती है।

सीमेंट का दाम भी कम

बाजार में कमजोर डिमांड के चलते सीमेंट की कीमतों में भी लगातार गिरावट है।थोक में सीमेंट 220 रुपये प्रति बैग तथा रिटेल में 225-230 रुपये प्रति बैग बिक रहा है।क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पिछले दिनों कंपनियों ने बाजार में अघोषित शॉर्टेज पैदा कर कीमतें बढ़ाने की कोशिश की थी।लेकिन मार्केट ने इसे सपोर्ट नहीं किया और सीमेंट एक बार फिर से सस्ती होने लगी है।

डिमांड कमजोर होने से सरिया भी स्थिर

लोहा बाजार में डिमांड कमजोर होने से सरिया की कीमतों में भी स्थिरता बनी है।क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि इनकी कीमतों में किसी भी प्रकार से बढ़ोतरी के संकेत नहीं है। फैक्ट्रियों में इन दिनों सरिया 43000 रुपये प्रति टन तथा रिटेल मार्केट में 45000 रुपये प्रति टन बिक रहा है।कारोबारियों का कहना है कि बाजार में तो डिमांड बिल्कुल भी नहीं है।इसके बावजूद सटोरियों के हावी होने से कीमतों में उतार-चढ़ाव आ रहा है।

बिल्डरों के प्रोजेक्ट के दाम भी नहीं बढ़े

इन दिनों बिल्डरों ने भी अपने प्रोजेक्टों की कीमतों में किसी भी प्रकार से बढ़ोतरी नहीं की है।साथ ही अपने पुराने बचे हुए प्रोजेक्टों को बेचने आकर्षक ऑफर भी दे रही है।बिल्डरों ने भी पिछले दिनों भवन निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया था, लेकिन कीमतें वापस कम हो गईं।

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