केशकाल में आर्थिक घोटाला,घटिया निर्माण और बिना निविदा के निर्माण की शिकायत कलेक्टर से

केशकाल MyNews36 प्रतिनिधि- आर्थिक घोटाला, घटिया निर्माण एवं बगैर निविदा के निर्मांण कार्य के लिए सुर्खियों में रहने वाले नगर पंचायत केशकाल के कारगुजारी के संबंध में जिले के नवपदस्थ कलेक्टर को लिखीत शिकायत किया गया है। कलेक्टर प्रफुल्ल कुमार मीणा ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक जांच टिम गठित कर दिया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि जांच टिम बहुत जल्दी ही केशकाल पहुंचकर जांच आरंभ कर देगी।

मिली जानकारी अनुसार नगर पंचायत क्षेत्र में विकाश कार्य कराने और नगरवासियों को मूलभूत सुविधा सुलभ कराने विभीन्न मदों से सरकार द्वारा प्रदत्त किये जाने वाले धनराशि में से अधिक से अधिक धनराशि का बंदरबांट कर लेने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैय्यार करके तथा प्रस्ताव प्राक्लन एवं मापदंण्ड को दरकिनार रखते हुए कागजी खानापूर्ति कर धनराशि आहरंण कर लेने की चली आ रही पिछली परंपरा सत्यता परिवर्तन के बाद भी थम नहीं रहा है। जिससे नगरवासी हैरत में हैं।

नगर पंचायत केशकाल में पदस्थ इंजिनियर पर बगैर स्थल निरीक्षंण किये मंशानुरूप प्राक्लन बना देने और प्राक्लन के विपरीत घटिया निर्माण कार्यों का एम बी भरकर घोटाले में अपनी मुख्य भूमिका अदा करने का भी आरोप लगाया जा रहा है। सब इंजीनियर के चलते ही बिजली आफिस जाने के मार्ग पर बन चुके सड़क, बांबी तालाब सौंदर्यीकरण का तथा शेड निर्माण उन्नयन मरम्मत का फर्जी प्राकलन प्रस्ताव बना लिया गया और कूटरचित अभिलेख तैय्यार कर निविदा निकालने स्वीकृृत करने तथा कार्य आदेश जारी करने का खेल भी मिलजुलकर कर लिया गया। जिसके संबंध में कलेक्टर का ध्यान आकर्षित किये जाने की खबर है। नगर पंचायत केशकाल के सुरडोंगर सिंचाई जलाशय में बगैर तकनिकी प्रस्ताव प्राकलन एवं स्वीकृति के पिकनिक स्थल विकसीत करने के नाम पर जिस तरह से अचानक प्रशासकिय शक्तियों का दुरूपयोग करते काम आरंभ करना दिया गया और नगर पंचायत के पार्षद निधि से तथा जिला योजना मंण्डल की धनराशि भुगतान कर कराकर काम को आधे अधूरे पर बंद करा दिया गया उसको लेकर नगरवासियों में रोष व्याप्त हैं।नगरपंचायत केशकाल में पार्षद निधि और अध्यक्ष निधि से कराते गये काम दिखाई नहीं देते और जो दिखाई देते भी हैं उनकी लागत राशि और हुये निर्मांण कार्य को देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं और आश्चर्य व्यक्त करते कहते हैं कि दो लाख में बस ये कार्य ।

अभी हाल में ही कोंण्डागांव जिले की कमान संभालने वाले युवा कलेक्टर प्रफुल्ल कुमार मीणा से यह निवेदन किया गया है कि केंद्र एवं राज्य सरकार से आदिवासी बाहुल्य कोंडागांव जिले एवं उसके अंतर्गत आने वाले नगरीय निकाय क्षेत्र के विकास के नाम से आने वाली लाखों करोड़ों रूपयों में से बहुत बड़ा हिस्सा बंदरबांट में चला जाता है बचे खुचे धनराशि से गुणवत्ता विहिन निम्न स्तर का काम कर कराकर महज लिपापोती करने की एक परंपरा चली आ रही है जिस पर अंकुश लगाना यंहा के विकास से लोगों के खुशिहाली के लिए जरूरी है। कलेक्टर को शिकायत होने और जांच टिम गठित होने की खबर संबधितों को लग जाने से नगर पंचायत केशकाल के अधिकारी सब इंजीनियर एवं ठेकेदारों में खलबली मच चुकी है और अब अपने आपको बचाने की जुगत लगानें में जुट गये हैं। कार्यालय के दस्तावेज से लेकर फिल्ड तक इधर उधर करने और लीपापोती करने का हर कवायद शुरू कर दिया गया है।

Mynews36 प्रतिनिधि राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

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