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रायपुर- डायबिटीज आज पूरी दुनिया में बहुत तेजी के साथ फैल रहा है।इसकी चपेट में न केवल वयस्‍क बल्कि बच्‍चे भी आ रहे हैं।भारत में काफी बड़ी मात्रा में बच्‍चे डायबिटीज के शिकार हैं।यह एक ऑटोइम्‍यून बीमारी है।यह शरीर में रोग प्रतिरक्षा प्रणाली अग्‍नाशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्‍ट कर देती है, जिससे बच्‍चों की सेहत पर इसका बहुत ही बुरा असर पड़ता है।इसके प्रमुख संकेत यदि बच्‍चे के पेट में दर्द,उल्‍टी,सिर में दर्द,थकान और बार-बार पेशाब जाना हो सकता है।यह सभी लक्षण डायबिटीज की बीमारी की तरफ इशारा करते हैं।

डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं- टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है।इसे काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है।जबकि टाइप 2 डायबिटीज में ब्‍लउ शुगर लेवल बहुत ज्‍यादा बड़ जाता है।जिसको नियंत्रण करना मुश्किल है।टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्‍त लोगों का ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।इस स्थिति में रोगी को प्‍यास ज्‍यादा लगती है,बार-बार पेशाब आना और भूख लगने जैसी समस्‍याएं होती हैं।यह वयस्‍कों की तुलना में बच्‍चों में अधिक देखा जाता है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का स‍ही तरीके से प्रयोग नही कर पाता।

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प्रोसेस्ड जंक फूड्स से दूरी

डायबिटीज को स्‍वस्‍थ खान-पान से नियंत्रण में रखा जा सकता है।आजकल के लाइफसटाइल के कारण डायबिटीज की समस्‍या ज्‍यादा बढ़ रही है।क्‍योंकि लोग जंक फूड्स और शुगरी फूड्स व ड्रिंक्‍स का ज्‍यादा सेवन करते हैं।जिसे वह अपने बच्‍चों को भी इसके सेवन से नही रोकते। बच्‍चे भी इस खान-पान को ज्‍यादा पसंद करते हैं जो डायबिटीज के खतरे को बढ़ावा देता है।इसलिए जंक फूड्स व प्रोसेस्‍ड फूड्स के सेवन से बचें। माता-पिता अपने बच्‍चों को हेल्‍दी फूड खिलाएं जिससे बच्‍चा आपका बच्‍चा स्‍वस्‍थ रहे।

जीवनशैली में बदलाव

डायबिटीज काफी हद तक अनुवांशिक कारणों की वजह से भी होता है।यदि माता-पिता या फिर परिवार के किसी सदसय को डायबिटीज की समस्‍या है,तो बच्‍चों में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा ज्‍यादा होता हैृ।छोटी उम्र से ही बच्‍चों को हेल्‍दी फूड्स खिलाने से टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को टाला जा सकता है।इसलिए माता पिता बच्‍चों को हेल्‍दी और न्‍यूट्रीशन से भरपूर खाना खिलाएं। जैसे आप अपने बच्‍चों के खाने में हेल्‍दी फैट, साबुत अनाज और लो-फैट डेयरी शामिल कर सकते हैं।

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