रायपुर – छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 2023 विधानसभा चुनाव के पहले एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार राज्य में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए अलग अलग विभागों का गठन करने जा रही है। इस फैसले से राज्य के इन तीनों प्रमुख वर्गों को कांग्रेस की सरकार साधने में जुट गई है। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी इन्हीं तीन वर्गों के सहयोग से मिलती है। लिहाजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिशन 2023 से पहले ही अपना मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है।

ओबीसी विभाग गठित करने का निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में कैबिनेट में लिया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद का गठन किया गया। ओबीसी सलाहकार परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल होंगे और भारसाधक मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। परिषद में कुल 40 सदस्य होंगे। जिसमें राज्य विधान सभा में अन्य पिछड़ा वर्ग के निर्वाचित कम से कम 10 सदस्य होंगे और बाकी सदस्य राज्य शासन द्वारा मनोनीत होंगे।वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए पहले से ही विभाग गठन किया गया है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग का बड़ा दबदबा है। छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति की है। करीब 13 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति और 47 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़ा वर्ग का है। इसलिए छत्तीसगढ़ में जातिगत समीकरण के आधार पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सबसे बड़ा दखल ओबीसी वर्ग का है। राज्य में सर्वाधिक ओबीसी वोटर है। इसलिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ओबीसी वर्ग को साधने के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सीट है। इनमें से 39 सीट आरक्षित है। इसमें 29 सीट अनुसूचित जनजाति और 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वहीं 51 सीट सामान्य है और इसमें से अधिकांश सीट ओबीसी वर्ग के नेताओं के प्रभाव में है। इसमें से खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी है। छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में ओबीसी वर्ग के लोग ज्यादा रहते हैं। इन्हीं इलाकों में ओबीसी वोटरों की संख्या बढ़ती जा रही है।

ओबीसी वर्ग के नेताओं को मिल रहा नेतृत्व

छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग के नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक पार्टियों ने अपना रुख साफ कर दिया है। राज्य भाजपा और कांग्रेस ओबीसी वर्ग के नेताओं को तवज्जो दे रही है। कांग्रेस ने भूपेश बघेल को अपना मुख्यमंत्री बनाया। वहीं अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के काट के लिए बीजेपी ने आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष को हटा कर ओबीसी वर्ग के लोकसभा सांसद अरुण साव को छत्तीसगढ़ बीजेपी की कमान सौंपी है। इसके अलावा विधानसभा में भी बीजेपी ने ओबीसी वर्ग के नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में ओबीसी कार्ड कितना अहम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.