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छठ पूजा में होती है सूर्य और छठी मैया की उपासना,जानिए 10 रहस्य

इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 20 नवंबर 2020 के मध्य मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म में सूर्य और चंद्र की गतियों पर आधारित व्रत और त्योहार को मनाए जाने का प्रचलन है। प्राचीनकाल में सौरमास का ज्यादा महत्व था परंतु परंपरा से बाद में चंद्र पर आधरित व्रतों का महत्व बढ़ गया। सूर्य पर आधारित व्रत और त्योहार में संक्रांति और छठ पूजा का अधिक प्रचलन है।

इसी तरह शास्त्रों में माता षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है। इन्हें ही मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि के दिन होती है। षष्ठी देवी मां को ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं। छठी माता की पूजा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी मिलता है।

वेदों के अनुसार सूर्य जगत की आत्मा है और सूर्य की उपासना ही सबसे महत्वपूर्ण है। पौराणिक काल में सूर्य के उपासकों में सुग्रीव के भाई बलि का नाम लिया जाता है जो प्रतिदिन सूर्य आराधना करते थे। द्वापर में दानवीर कर्ण की सूर्य का उपासक ही था। पांच पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी।

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