केंद्र सरकार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार को आगाह किया है कि अगर ग्रामीण आवास योजना को सही तरीके से लागू करने में विफल रहता है तो केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय अपनी अन्य प्रमुख योजनाओं के समर्थन पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) को 1 अप्रैल 2016 से लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य मार्च 2024 तक सभी के लिए आवास प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को लिखे पत्र में ग्रामीण विकास सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने उल्लेख किया है कि इस संबंध में कई पत्रों और बैठकों के बावजूद राज्य सरकार ने संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाई है।

राज्य के हिस्से के 562 करोड़ रुपये जारी नहीं किए

सिन्हा ने पत्र में कहा, यदि राज्य पीएमएवाई-जी को लागू करने में असमर्थ है, तो मंत्रालय को अन्य प्रमुख ग्रामीण विकास (मंत्रालय) योजनाओं/कार्यक्रमों के लिए अपने समर्थन पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय के विभिन्न स्तरों से छत्तीसगढ़ सरकार को कई दौर के संचार के बावजूद इसने न तो संतोषजनक प्रगति दिखाई है और न ही 562 करोड़ रुपये के राज्य के हिस्से को जारी किया है, जिसके परिणामस्वरूप पीएमएवाई-जी का काम रुक गया है।

यह रेखांकित करते हुए कि राज्य सरकारों द्वारा इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू किया गया है, सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने 2020-21 में संबंधित राज्य के हिस्से को जारी नहीं करने के कारण आवंटित 6.48 लाख घरों के लक्ष्य में से अधिकांश को वापस लेना पड़ा। सिन्हा ने कहा कि 2021-22 में ग्रामीण विकास मंत्रालय को लगभग 7.82 लाख घरों के आवंटित लक्ष्य को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, ऐसा राज्य के हिस्से का 562 करोड़ रुपये जारी करने में असमर्थता के कारण हुआ।

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