उज्जैन: महाकाल की नगरी उज्जैन रंग-बिरंगी है। यहां रहने वाले लोगों के जीवन जीने का अंदाज ही अलग है। भोले की भक्ति के साथ जिंदगी को कैसे खुशी और आनंद से भरना है, वो यहां रहने वाले लोगों के सीखा जा सकता है। इसी तरह के खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी हैं ‘स्वामी मुस्कुराके’ यानी पंडित शैलेंद्र व्यास। व्यास अपने अनोखे अंदाज के चलते सिर्फ उज्जैन में ही नहीं, बल्कि देशभर में मशहूर हैं। साल 2004 में इन्हें राष्ट्रपति के हाथों देश में शिक्षकों के सबसे बड़े सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इतना ही नहीं, इनकी गाड़ियों के नंबरों में कहीं न कहीं ‘420’ नंबर आ ही जाता है।

गौरतलब है कि ‘स्वामी मुस्कुराके’ का उद्देश्य लोगों को हंसाना और उनकी जिंदगी की खुशनुमा बनाना है। अलग-अलग रंगों के कपड़े, रंग-बिरंगी टोपियां, पगड़ी, मुकुट, अंगूठी, कान में बाले और गले में बड़ी-बड़ी मालाएं उनका शौक है। ये जहां भी जाते हैं, लोग इन्हें देखकर मुस्कुराते और हंसते हैं। उज्जैन के स्वामी पैलेस, 41, शिवाजी पार्क में रहने वाले पंडित शैलेंद्र व्यास का घर भी रंग-बिरंगा है।


घर है जैसे म्यूजियम
दरअसल, इस घर को आप म्यूजियम भी कह सकते हैं। क्योंकि यहां रंग बिरंगी ढेर सारी पोशाकें, अजीबो-गरीब पगड़ियां और मुकुट वॉर्डरॉब में भरे पड़े हैं। वॉर्डरॉब में देश के कोने कोने से अलग-अलग टाइम पीरियड की पगड़ियां हैं। यहां मुगल से लेकर मराठा युग के आउटफिट्स देखने को मिल जाएंगे। बाकायदा इनकी प्रदर्शनी यहां देखने को मिलती है। इन्हीं के चलते स्वामी व्यास की ड्रेसिंग स्टाइल और मुस्कुराट अनोखी हो जाती है।


अवार्ड्स और ट्रॉफी की भरमार
‘स्वामी मुस्कुराके’ का घर इन रंग-बिरंगे कपड़ों के अलावा अवार्ड्स और ट्रॉफी से भी सजा हुआ है। उनका कहना है कि उहें भारतीय संस्कृति और इसकी विविधता बेहद पसंद है। उन्होंने हर युग की पोशाक, पगड़ी और मुकुट का पहले गहरा अध्ययन किया और फिर उन्हें इकट्ठा भी किया। वे सालों से बाबा की सवारी का हिस्सा बनते आ रहे हैं। वे पेश से एक शिक्षक हैं। उनका प्रभाव उनके छात्रों पर भी देखने को मिलता है। उनके स्टूडेंट्स भी खुशमिजाज हैं।

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