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नई दिल्ली- वाल्टर जे लिंडनर जर्मनी के भारत में नए राजदूत हैं और हाल ही में उन्होंने यह पदभार संभाला है।लेकिन लिंडर की खासियतें उन्हें सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर आम भारतीयों के बीच भी मशहूर बना रही हैं। लिंडर को प्यार है कभी देश की सड़कों और राजनीतिक हस्तियों की शान रही हिन्दुस्तान एंबेसडर से। लिंडर एक ऐसे देश के राजदूत हैं, जो कार इंजीनियरिंग का गढ़ माना जाता है। जहां ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सडीज, पोर्शे और फॉक्सवैगन जैसी शानदार लग्जरी कारों का जन्म हुआ।

लाल रंग की अंबेसडर कार पूरी दिल्ली में मशहूर

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लिंडनर की हिन्दुस्तान एंबेसडर कार के साथ आमोखास से लेकर बड़े से बड़े अधिकारी यहां तक कि देश के राजनेता भी फोटो खिंचवाना पसंद करते हैं। हिंदुस्तान एंबेसडर और फिएट पदमिनी देश की दो ऐसी कारें हैं जिनको चलाना विदेशी ऑटो एक्सपर्ट भी पसंद करते हैं। वहीं लिंडनर की लाल रंग की अंबेसडर कार पूरी दिल्ली में मशहूर है।

कार को रीस्टोर कराया

लिंडनर अकसर अपनी कार की फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. वहीं इस कार के फैन भी अपनी फोटो उनकी कार के साथ डाल कर उन्हें टैग करते रहते हैं। शायद हिन्दुस्तान मोटर्स ने भी कभी लाल रंग की एंबेसडर लांच नहीं की थी, लेकिन लिंडर ने न केवल इस कार को नया करवाया बल्कि शानदार लाल पेंट भी कराया। वहीं अब लिंडनर इस कार को और शानदार बनाना चाहते हैं और इस बारे में अकसर सुझाव मांगते रहते हैं।

‘आंटी एंबी’ कह कर पुकारते हैं

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लिंडनर हाल ही में राष्ट्रपति भवन भी गए थे और वो भी अपनी इसी लाल रंग की शानदार कार में। हाल ही में नई सरकार के शपथग्रहण समारोह में लिंडनर अपनी इसी शानदार कार से हिस्सा लेने पहुंचे थे और वहां कारों की भीड़ में जर्मनी का झंडा लगी उनकी कार एकदम जुदा नजर आ रही थी। लिंडनर अपनी इस कार को ‘आंटी एंबी’ कह कर पुकारते हैं। वे कहते भी हैं उन्हें एंबेसडर कार बेहद पसंद है और यकीनन इस कार की बराबरी कोई और कार नहीं कर सकती।

हिन्दी में दिया जवाब

हाल ही में लिंडनर 21 मई को देश के राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे थे और अपने औपचारिक दस्तावेज देने आए थे। लेकिन उनकी उपस्थिति ने राष्ट्रपति के साथ देशवासियों का भी दिल जीत लिया। जब वे उतरे तो वहां तैनात अधिकारी भी उनकी इस अदा को लेकर खुश हो गए। राष्ट्रपति भवन में मुलाकात के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा बोला कि राष्ट्रपति भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। उन्होंने दस्तावेज सौंपते वक्त राष्ट्रपति से हिन्दी में बातचीत की, वहीं ओपन एयर प्रेस काफ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब भी हिन्दी में दिया।

रिक्शे में बैठे भी दिखाई दे जाते हैं

वाल्टर अकसर वाराणसी में साधुओं के साथ अपनी फोटो शेयर करते रहते हैं, वहीं दिल्ली के खारी बावली में रिक्शे में बैठे भी दिखाई दे जाते हैं। वाल्टर जब 21 साल के थे, तो 1977 में वे वाराणसी भी गए थे। उनके पसंदीदा शहरों में श्रीनगर, जयपुर, देहरादून, ऋषिकेश और बनारस हैं।

भारत बहुत भाता है

संगीत से प्यार रखने वाले वाल्टर को भारत बहुत भाता है और वे न केवल यहां का अध्यात्म और संस्कृति बेहद पसंद है बल्कि यहां की भाषा से भी बेहद प्यार करते हैं। भारत आने वाले ज्यादातर अधिकारी अपनी कार विदेश से ही आयात करते हैं और महंगी लग्जरी कार में ही बैठना पसंद करते हैं। वहीं सरकार भी भारत में दूतावासों की आयात गाड़ियों पर टेक्स नहीं लगाती है। लेकिन वाल्टर इसके अपवाद हैं।

हिन्दुस्तान एंबेसडर का प्रोडक्शन 1957 में शुरू हुआ

हिन्दुस्तान एंबेसडर देश की पहली मेड इन इंडिया कार थी और इसका उत्पादन 1957 में शुरू हुआ, जो 2014 तक जारी रहा। अभी भी कुछ एंबेसडर कारें कोलकाता में दिखाई दे जाती हैं। एंबेसडर में 1.9 लीटर का पेट्रोल इंजन लगा था, जो 75 पीएस की पावर और 130 एनएम का टॉर्क देता था। वहीं 2 लीटर का डीजल इंजन 56 पीएस की पावर और 112 एनएम का टॉर्क देता है।

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