Aarogya Setu App

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Aarogya Setu App : कोरोना संक्रमण कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग एप आरोग्य सेतु की प्राइवेसी को लेकर शुरू से ही बवाल मचा हुआ है।कई बड़े एथिकल हैकर्स ने भी एप की प्राइवेसी पर सवाल उठाए हैं लेकिन बावजूद इसके महज 41 दिनों में 10 करोड़ लोगों ने आरोग्य सेतु एप (Aarogya Setu App) को डाउनलोड किया है।आरोग्य सेतु एप 12 भाषाओं में उपलब्ध है।आरोग्य सेतु एप की प्राइवेसी को लेकर सरकार ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था जिसमें सरकार ने बड़ा एलान करते हुए आरोग्य सेतु एप के एंड्रॉयड वर्जन को ओपन सोर्स कर दिया है।बता दें कि आरोग्य सेतु एप के 90 फीसदी यूजर्स एंड्रॉयड यूजर्स ही हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि आज यानी 26 मई की आधी रात के बाद एप का सोर्स कोड उपलब्ध करा दिया जाएगा। ओपन सोर्स होने का मतलब है कि दुनिया का कोई भी डेवलपर यह जान सकता है कि आरोग्य सेतु में कौन-कौन सी जानकारी स्टोर हो रही है और एप आपके फोन में क्या कर रहा है।

एक लाख रुपये के इनाम के साथ लॉन्च हुआ बग बाउंटी प्रोग्राम

सरकार ने एप में बग को खोजने के लिए बग बाउंटी प्रोग्राम भी लॉन्च किया है जिसके तहत आरोग्य सेतु एप में कोई बग खोजने पर एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।सरकार ने सभी डेवलपर्स का स्वागत करते हुए कहा कि एप को लेकर यदि उनके मन में कोई सवाल है, कोई कमी है या फिर कोई सुझाव है तो उसका स्वागत है।

सरकार की ओर से कहा गया कि आरोग्य सेतु दुनिया का पहला सरकारी सॉफ्टवेयर या एप है जिसे ओपन सोर्स किया गया है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि आरोग्य सेतु एप ने तीन हजार कोरोना हॉटस्पॉट्स के बारे में 3-17 दिन पहले पता लगाया।

बचा दें कि फ्रांस के सिक्योरिटी एक्सपर्ट और एथिकल हैकर इलियट एंडरसन ने पिछले महीने ट्वीट करके आरोग्य सेतु एप की प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने दावा किया था कि आरोग्य सेतु एप इस्तेमाल करने वालों का डाटा खतरे में है।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि सरकार चाहती है कि लोग आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड करें तो इसके लिए आरोग्य सेतु एप का सोर्स कोड, ओपन सोर्स होना चाहिए, क्योंकि लोगों का यह जानने का हक है कि आखिर यह एप करता क्या है।

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