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Big News: 11 करोड़ की सूक्ष्म सिंचाई,अफसरों की मलाई!

अपनी जेब भरने जल संसाधन विभाग ने बना डाली अनुपयोगी कार्ययोजना

Micro-irrigation of 11 crores,Micro-irrigation of 11 crores

 Micro-irrigation of 11 crores

राजनांदगांव- धामनसरा,मोहड़,जंगलेशर, खैरा, रवेली, सिंगदई ये राजनांदगांव विकासखंड के ऐसे गांव है जो जीवनदायिनी शिवनाथ नदी के तटवर्टी इलाके में बसे होने के कारण जल संकट की समस्याओं से काफी हद तक मुक्त रहते हैं।यहीं नहीं इन गांवों के अधिकांश किसानों के पास खुद के बोरवेल्स जैसी सिंचाई सुविधा की भी संपन्नता है। ऐसे इलाके के किसानों के लिए यदि बिना किसी ठोस प्लानिंग के सूक्ष्म सिंचाई सुविधा के नाम पर करोडों रूपए की योजना बना दी जाए तो सीधा- सीधा समझ में आता है कि सफेद पोशों को अपनी जेब में रखकर सरकारी कारिंदों ने एक सोची समझी प्लानिंग के तहत अपना उल्लू सीधा करने की एक बड़ी कार्ययोजना को अंजाम दिया है? ऐसे मामले का एक बड़ा उदाहरण है जल संसाधन संभाग राजनांदगांव।

इस विभाग ने राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ‘धामनसरा-मोहड एनीकट से पाईप माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई योजना’ के नाम पर 11 करोड़ पैतीस लाख रूपए की योजना बनाकर योजना को विभागीय अधिकारियों के अलावा ठेकेदार की कमाई का जरिया बना दिया है।योजना के अनुबंध दो साल पूरे होने जा रहा है पर काम पूरी तरह से आधा अधूरा पड़ा पड़ा हुआ है।शिवनाथ नदी में मोखला एनीकट के ठीक बाजू में चल रहे इस कार्य को देखने से ऐसा लगता है कि भाजपा की सत्ता बदलने के साथ ही इस कार्य के प्रति विभागीय अधिकारियों के सुर भी बदल गए हैं।कार्य पूर्ण कराने की दिशा में जल संसाधन संभाग राजनांदगांव के ईई, एसडीओ, सबइ इंजीनियर की कोई रूचि नहीं होने से ऐसा लगता है कि या तो वे इस योजना के तहत मिले मोटी कमीशन में बंध गए हैं या फिर उनकी मंशा इस योजना को लंबे समय तक खींचकर धीरे धीरे मलाई खाते रहने की बन गई है।तीन नवंबर 2017 को हुए इस कार्य के अनुबंध के अनुसार कार्य को अक्टूबर 2018 में पूरा हो जाना था किन्तु कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

करोडों की मशीन की कोई रखवाली नहीं

इस कार्य में 60 एचपी के पंप के अलावा नदी से पानी खींचने के लिए करोडों रूपए की लागत के मशीनें लगाए गए है पर इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। जल संसाधन विभाग राजनांदगांव के अधिकारियों को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यदि सरकारी संपत्ति चोरी चली जाए, तो उनके बात का क्या जाएगा? यहां मशीन कक्ष में न तो ताले लगे हैं न ही कोई चौकीदार रहता है। मशीनों को खुला छोड़ दिया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि किसी ने रात में मशीनों की चोरी कर ली या फिर मशीनों में आग लगा दी तो फिर किसका नुकसान होगा? इस कार्य के ठेकदार कोठारी एग्रीटेक प्राईवेट लिमिटेड मोरारजी पेठ सोलापुर महाराष्ट के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश देवांगन का कहना है कि कार्य स्थल की देखरेख के लिए लोकल के चौकीदार रखे गए हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर के इस कोरे झूठ की सच्चाई तब पकड़ में आई जब उन्हे मौके से ही मोबाईल पर यह पूछा गया कि यहां का चौकीदार कौन है? प्रोजेक्ट मैनेजर श्री देवांगन के अनुसार अभी साढे छह करोड रूपए के काम हुए हैं।

परिसर बना शराबखोरी और अय्याशी का अड्डा

मौके पर महीनों से कार्य बंद होने के कारण कार्य स्थल पूरी तरह से शराब खोरी और अय्याशी का अडड़ा बन गया है। परिसर में पड़ी बीयर और शराब की बोतलें यह बता रही थी कि लोगों ने इसे अभी से शराब पीने का एक सुरक्षित अड्डा बना लिया है। चुंकि यह कार्य शिवनाथ नदी किनारे होने के कारण प्रेमी जोडों ने भी सेल्फी के लिए सुंदर, मनोरम और सुरक्षित ठिहा समझ लिया है। मंगलवार को यहां दो प्रेमी जोडे पाए गए जो खबरनवीशों को देखते ही चलते बने। कार्य स्थल में दो बड़े बड़े हाल, कमरे भी बनाएं गए है जिसकी उपयोगिया समझ से परे है। इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रात में यहां कभी कभी कार, मोटर खड़ी रहती है इससे ऐसी आशंका है यह परिसर शराबखोरी के साथ-साथ अय्याशी का सुरक्षित ठिहा है। आशंका ऐसी भी विभाग वाले भी यहां रात में खाने-पीने और मौज मस्ती के लिए आते जाते होंगे? बहरहाल सूक्ष्म सिंचाई के नाम की 11 करोड़ पैतीस लाख वाली एक महती योजना मूर्त रूप लेने से पहले ही जल संसाधन संभाग राजनांदगांव के अधिकारियों की उदासिनता और लापरवाही के चलते मटियामेट होनेे की स्थिति में जाती दिख रही है।

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