अगर यूं कहा जाए कि आज का दौर मोबाइल फोन का है, तो शायद इसमें कुछ गलत नहीं होगा। बच्चे से लेकर बुजुर्ग लोग तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। वहीं युवा इससे खासतौर पर जुड़े रहते हैं। युवाओं के पास स्मार्टफोन मौजूद रहता है, जिससे वो अपने कई काम निपटाते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग करनी हो, घर पर खाना ऑर्डर करना हो, ऑनलाइन खरीदारी करनी हो, गेम खेलना हो, सोशल मीडिया चलाना हो आदि। मतलब सबकुछ घर बैठे एक क्लिक में हो जाता है। इन सब चीजों के लिए हमें कई तरह के एप डाउनलोड करने होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई तरह फर्जी एप भी मौजूद हैं, जो सेकंडों में आपके बैंक खाते को खाली कर सकते हैं। इन फर्जी एप को साइबर अपराधियों द्वारा तैयार किया जाता है। ऐसे में आपके लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि आप जो एप चला रहे हैं या डाउनलोड कर रहे हैं वो असली है या फिर फेक। तो चलिए आपको इस बारे में बताते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं…

साइबर अपराधी लोगों को चूना लगाने के लिए कई फर्जी एप को तैयार करते हैं, जिन्हें लोग डाउनलोड करते हैं तो उनके साथ फ्रॉड तक हो जाता है। दरअसल, एप को इस तरह से तैयार किया जाता है, जिससे इसे पहचान पाना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है। ऐसे में असली और नकली एप में फर्क बेहद कम रह जाता है।

थर्ड पार्टी एप से बचें

उदाहरण के लिए अगर आपका बैंक खाता भारतीय स्टेट बैंक में है, तो आपको अपने ही बैंक का एप डाउनलोड करना चाहिए और इसका इस्तेमाल करना चाहिए। आपको गलती से भी किसी थर्ड पार्टी एप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस मोबाइल में डाउनलोड करने से आपको चपत लग सकती है।

लिंक से नहीं प्ले स्टोर से करें डाउनलोड

कई बार देखने में आता है कि लोग किसी के दिए हुए या व्हाट्सएप पर मिले लिंक से भी बैंकिंग एप या किसी अन्य तरह के एप को डाउनलोड कर लेते हैं। इससे फ्रॉड होने का ज्यादा खतरा होता है। ऐसे में आपको गूगल प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करने चाहिए।

ऐसे पहचान कर सकते हैं फर्जी एप की

जो एप फर्जी होता है, उसको मोबाइल में इंस्टॉल करने पर फोन की बैटरी जल्दी-जल्दी खत्म होने लगती है। आप ध्यान दें अगर किसी एप को इंस्टॉल करने के बाद से आपकी बैटरी खत्म होने लगती है, तो आपको ऐसे एप को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए।

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