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Balod Collector : रानू साहू महिलाओं के लिए बनी मिसाल,किया कुछ ऐसा काम

Balod Collector

बालोद-जिला मुख्यालय बालोद में पहली बार कलेक्ट्रेट जाने के लिए खासतौर से महिलाओं के लिए बस सेवा शुरू की गई है।ये अनूठा प्रयास जिले की महिला कलेक्टर रानू साहू के द्वारा ही किया गया है।जिसे महिलाओं ने सराहना की।अपनी तरह का यह सबसे अलग ही प्रयास है। जो पूरे प्रदेश में एक मॉडल की तर्ज पर सामने आ रहा है।महिलाओं को जिला मुख्यालय बालोद से कलेक्ट्रेट जाने में बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती थी,क्योंकि भले ही जिला बालोद है लेकिन कलेक्ट्रेट का संचालन सिवनी में हो रहा है।वहीं पर भवन बना हुआ है जो शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर है।वहां तक कोई यात्री बस भी नहीं जाती है।लोगों को भी जाने के लिए बहुत परेशानी होती है।किसी को सिवनी से उतरकर पैदल जाना पड़ता है तो किसी को झलमला से। लेकिन सीधे जाने का रास्ता नहीं होने के कारण लोगों को पैदल भी सफर करना पड़ता है।ऐसी स्थिति में विभागीय कामकाज भी प्रभावित हो रहा था। जिसे देखते हुए खासकर महिला स्टाफ के लिए जिला प्रशासन ने बस की व्यवस्था करवाई।यह बस सुबह 10 बजे से नया बस स्टैंड परिसर से रवाना होती है।

जिसमें कलेक्ट्रेट में काम करने वाले सभी महिला स्टाफ व अन्य स्टाफ को भी सीट के हिसाब से बैठाकर कलेक्टर पहुंचाया जाता है।यही बस उन्हें छोड़ने के लिए भी वापस बस स्टैंड आती है। ज्ञात हो कि-कलेक्ट्रेट में कई महिला और युवतियां भी काम करती है जो बाहर के भी रहने वाले हैं।जो बस से आना-जाना करते हैं।कई बार उन्हें कलेक्टर ऑफिस दूर होने के कारण दफ्तर पहुंचने में देर हो जाती है।समय पर बस नहीं मिल पाती या फिर पैदल जाना पड़ जाता है या लिफ्ट लेकर जाना पड़ता है। इन सब दिक्कतों को देखते हुए जिला प्रशासन ने यह अनूठा इंतजाम किया है।

जब कलेक्टोरेट बना तब से हो रहा था इसका विरोध

जब कलेक्ट्रेट भवन निर्माण के लिए जगह की तलाश चल रही थी, तो उस समय भी सिवनी में कलेक्ट्रेट ले जाने का कुछ लोग विरोध कर रहे थे लेकिन कुछ लोगों की राजनीति के चलते जगह सिवनी में ही जगह फाइनल हो गई और वही भवन बन गया। जिसका दंश आज भी पूरी जनता को भुगतना पड़ रहा है।शहर में अगर कलेक्ट्रेट संचालित होता तो लोगों को आने जाने में भी सुविधा होती है लेकिन शहर से चार किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट होने से सभी वर्ग को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है अगर उस समय भवन निर्माण को लेकर किसी तरह की राजनीति ना होती, तो आज यह कलेक्ट्रेट शहर के भीतर होता और लोगों की पहुंच में होता।

शॉर्टकट है रास्ता पर बारिश में होती है परेशानी

ज्ञात हो कि कलेक्ट्रेट जाने के लिए सिवनी बस्ती से होकर जाया जाता है। यह रास्ता शॉर्टकट तो है लेकिन बारिश में कीचड़ से लोगों को परेशान होना पड़ जाता है। ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा कुछ दूरी तक यानी अपने पंचायत क्षेत्र में ही मनरेगा के तहत मिट्टीकरण का काम करवाया गया है, लेकिन वह नाकाफी है इस मार्ग के डामरीकरण की मांग लोगों द्वारा लंबे समय से की जा रही है। जिला प्रशासन से भी इसकी गुहार लगाई गई है कि इस सिवनी बस्ती से कलेक्टोरेट तक की सड़क पर डामरीकरण करवा दिया जाए ताकि लोगों को आने-जाने में कुछ हद तक राहत मिले वरना बरसात में उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है।

बस सेवा शुरू होने पर क्या कहा महिला स्टाफ ने

महिला रत्ना सिंह ठाकुर ने कहा कि आने जाने में बहुत असुविधा हो रही थी बस की सुविधा होने से अब हमें बहुत राहत मिल रही है। कलेक्टर का हम इस सुविधा के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।

महिला माधुरी साहू ने कहा कि-गाड़ी चलाना महिलाओं के लिए कठिन काम तो नहीं है वह आसान ही है, लेकिन ड्यूटी में गाड़ी पर जाने में कई बार दिक्कत होती थी दूर दराज से आने वाली महिलाओं को और ज्यादा परेशानी होती थी लेकिन अब बस सर्व सुविधा युक्त साधन हो गया है ।

खुशबु देशमुख ने कहा कि अब हमें दफ्तर पहुंचने में देर नहीं होगी पहले कई बार बस छूट जाने से और लेट हो जाता था, अब बस स्टैंड में अपने साधन से बस स्टैंड पहुंचते हैं फिर यहां खड़ी जिला प्रशासन की बस में सवार होकर सीधे दफ्तर पहुंच जाते हैं

त्रिवेणी साहू ने कहा कि कलेक्टर रानू साहू ने हम महिलाओं के दर्द को समझा और उनका समाधान निकाला, इसके लिए हम उनकी काफी सराहना करते हैं इस तरह का कलेक्टर हमने पहली बार देखा है, जिन्हें अपने स्टाफ की बहुत चिंता रहती है उनका ख्याल रखा जाता है। ऐसे अफसर गिने चुने ही होते हैं।

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