रायपुर MyNews36- पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक धनेन्द्र ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करके देश की किसानो के लिए बड़ा लाभदायी फैसला निरूपित करते हुए किसानो हितैषी फैसला बताकर ढ़िढोरा पीटा जा रहा है। जबकि इससे उत्पादक किसानो को काई फायदा नही होने वाला है। कृषि क्षेत्र में बडे़ निजी निवेशको एवं कृषि उपज के विपणन एवं अन्य ट्रेडिंग व्यवसाय में जुड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ही यह संशोधन लागू किया गया है।इससे सिर्फ कृषि उत्पादो के विपणन एवं टेªडिंग व्यवसाय से जुडे़ बडे़ उद्योगपतियों को ही फायदा होगा। छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान कानून अनुसार किसानों को अपने कोई भी उपज को प्रदेश के किसी भी हिस्से में ले जाकर बेचने का अधिकार प्राप्त है।

विधायक धनेन्द्र साहू ने कहा है कि केन्द्र शासन द्वारा इसे किसानहित में बताते हुए ‘एक देश एक बाजार नीति’ “किसान अब अपने उत्पादको का भंडारण कर सकेगा।” ‘”किसान अपने उत्पाद को कहीं भी बेच सकेगा” और अधिक दामो में बेच सकेगा जैसे मुहावरे के द्वारा किसानो को फिर से धोखा दिया जा रहा है ।

साहू ने आगे कहा कि- केन्द्र शासन और प्रधानमंत्री को देश के आम किसानो की स्थिति की सही जानकारी ही नही है।देश के लघू एवं सीमान्त किसान एवं मंझोले किसानो की संख्या ही सर्वाधिक है।इन सामान्य किसानो के लिए यह ब्यवहारिक एवं लाभदायी नही है कि ये अपने उपज को प्रदेश के बाहर के मंड़ियो में ले जाकर बेच सके और न तो इतनी मात्रा में इतनी उपज होती है और न ही ट्रांसपोर्टिग का खर्च भी उस अन्तर के मूल्यो को लाभदायी बना सके।

देश का आम किसान आर्थिक रूप से इतना कमजोर है और कर्ज से लदा हुआ है , कि जैसे ही फसल की कटाई होती है तत्काल उसके सामने बेचने की जल्दी एवं मजबूरी रहती है । वे अच्छे दाम के इंतजार तक न तो फसल का अपना भंडारण मंहगे भंडार गृहों में करने की क्षमता है और न ही देश के दूसरे हिस्से में ले जा करके अनाज को उसके बेचने की क्षमता है।

साहू ने कहा है कि- देश के प्रायः सभी कृषि उपज मंडियो में किसानो को अपनी उपज को बेचने के लिए सही तौल से लेकर फसल की सहीं कीमत और समय पर भुगतान प्राप्त करने तक में शासन की लापरवाहियो के कारण किसानो को नुकसान उठाना पड़ता है।कृषि उपज मंड़ी में जहां किसानो की उपज का केन्द्र शासन द्वारा घोषित समर्थन मुल्यो पर बिक्री किये जाने की सुनिश्चितता किया जाना चाहिए।भुगतान 24 घण्टे के भीतर होना चाहिए।तौल में गड़बड़ी नही होना चाहिए, लेकिन ये सारी अनियमित्ता मंडियों में होने के कारण किसान अपने उपज को कोचिया, बिचैलिया एवं राईस मिलर्स लोगो के पास कम दामो में एवं लम्बे समय तक भुगतान होने के स्थिति में फसल बेचने पर मजबूर होता है ।

उन्होंने कहा है कि- देश के आम किसानो की ऐसी क्षमता नही है कि अपने फसलो का सहीं एवं अधिकत्तम मूल्य मिलते तक भंडारण कर सके एवं अन्य प्रदेश में जाकर बेच सके । इस नियम का फायदा पूंजीपति, बिचैलिया ही उठायेंगे।यदि केन्द्र सरकार एवं प्रधान मंत्री जी सहीं नियत से किसानो को फायदा पहुंचाना चाहते हैं तो सभी किस्म की अनाजों, दलहन,तिलहन एवं सभी तरह के कृषि उत्पादो का सही समर्थन देने मूल्य स्वामीनाथन आयोग कमेटी की सिफारिशों को इमानदारी से लागू करें तथा देश की सारी कृषि उपज मंड़ियों में किसानो की सारी उपज को समर्थन मूल्य के ऊपर ही बेचने की सुनिश्चता करे एवं समर्थन मूल्य से कम की खरीदी करने पर एवं समय पर भुगतान नही करने वाले क्रेताओ पर कठोर कार्यवाही करने हेतु कानून बनायी जावे।

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