After the resignation

कांग्रेस के अध्यक्ष पद से सार्वजनिक तौर पर इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी गुरुवार को संघ मानहानि मामले में मुंबई की शिवड़ी अदालत में पेश हुए।अदालत में उन्होंने खुद को बेकसूर बताया।जिसके बाद उन्हें 15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई।अदालत के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गांधी ने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है और मैं पहले से दस गुना ज्यादा लड़ाई लड़ूंगा।राहुल ने कहा कि इस्तीफा देने के बाद से उनपर हमला हो रहा है लेकिन मुझे इन हमलों पर मजा आ रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह विचारधारा की लड़ाई है। मैं गरीबों और किसानों के साथ हूं।यह लड़ाई (भाजपा के खिलाफ) जारी रहेगी।आक्रमण हो रहा है। मजा आ रहा है।’

अदालत से बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल से इस्तीफा वापस लेने को कहा

अदालत पहुंचे राहुल गांधी से कांग्रेस के कई समर्थकों ने पार्टी के अध्यक्ष पद से दिया गया उनका इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया।अदालत परिसर से बाहर एकत्र तकरीबन 150 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी इस मांग के समर्थन में नारे भी लगाए। इन लोगों के हाथों में तख्तियां थीं।

जब राहुल सुबह मुंबई हवाईअड्डे पर विमान से उतरे तब भी बाहर खड़े उनके समर्थकों ने नारेबाजी की और पार्टी अध्यक्ष पद से दिया गया इस्तीफा वापस लेने की मांग की।जब राहुल अदालत पहुंचे,तब माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी वहां पहुंचे। 

मोदी और संघ के खिलाफ लड़ाई में मैं अकेला खड़ा था

बुधवार को लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी ने सार्वजनिक तौर पर अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।उन्होंने पार्टी के पुनर्निर्माण और 2019 की विफलता के लिए लोगों को जवाबदेह बनाने के लिए कठोर निर्णय लेने का आह्वान किया।

अपने चार पेजों के खुले खत में राहुल ने कांग्रेस कार्यसमिति से अनुरोध किया कि वह लोगों का एक समूह बनाकार पार्टी का नया अध्यक्ष ढूंढ ले क्योंकि वह इसकी जिम्मेदारी नहीं निभा सकते।उन्होंने खत में लिखा,‘मैं एक कांग्रेसजन के तौर पर पैदा हुआ,यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और यह मेरी रगों में है और हमेशा रहेगी।’

चुनाव नतीजे आने के बाद 25 मई को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी।जिसमें राहुल ने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी।हालांकि उनका इस्तीफा नामंजूर कर लिया गया लेकिन वह तब से इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।जबकि कांग्रेस नेता और समर्थक लगातार उनसे पद पर बने रहने की अपील कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव की बात करें तो पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। उसे केवल 52 सीटों पर जीत मिली है। जो 2014 के चुनाव से केवल आठ सीट ज्यादा है। पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल ने पार्टी को आवश्यक रूप से अपने अंदर बदलाव लाने पर जोर दिया।उन्होंने पार्टी को मिली हार की भी जिम्मेदारी ली।

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