रायपुर MyNews36- तीरंदाजी खेल को पहले लोग कहानियों में सुना या देखा करते थे जिसे आज मूर्त रूप देने का काम किया छोटे से गांव राजनांदगांव सिंघोला के रहने वाले हीरु साहू ने।खेल के लिए नेताओं और अधिकारियों को इस उभरते हुए खिलाड़ी (कोच)के साथ ढेरों फोटो अखबारों में रेडियो चैनल के माध्यम से देखे होंगे लेकिन आज हीरू साहू बचपन की आर्थिक तंगी से उबर नहीं पाया है ।

आज 30 बरस होने के बाद भी एक अदद काम की तलाश है लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे देश प्रदेश में गरीब होना एक अभिशाप है बड़े-बड़े लोगों का ही आज बोलबाला है।हीरू साहू एक सपना देखा था कि मैं निस्वार्थ भाव से तीरंदाजी के क्षेत्र में बच्चों को प्रशिक्षण दे सकू। जिसके परिणाम स्वरूप छत्तीसगढ़ में कई बच्चे अनेक पदक लाकर प्रदेश का नाम गौरव ने किए हैं।

हीरू को एक बात का मलाल है की तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक डॉ रमन सिंह के आदेश से मंत्रालय से 2 बार पत्र के माध्यम से लिखित आश्वासन दिया कि हम आपके प्रतिभा को सम्मान करते हुए संविदा नियुक्ति देते हैं,लेकिन आज हीरू साहू दाने-दाने को मोहताज है ।

शुक्र है उनको प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान बनाने का मौका मिला और एक छोटा सा सपनों का घर अपने जमीन को बेचकर बनाया है उसी घर में आज बच्चे व्यायाम करते हैं एवं अपने खेल सामान को रखते हैं ।

हीरू साहू के साथ बड़े-बड़े नेताओं का अधिकारियों का अखबारों में और टीवी चैनलों के माध्यम से हुनर को सम्मान करते देखे होंगे लेकिन एक गरीब के पेट में अनाज नहीं मिलेगा और हाथों को रोजगार नहीं मिलेगा तो यह सम्मान ,अपमान के सामान लगता है।मैं आशा करता हूं की वर्तमान शासन प्रशासन इस हुनरमंद खिलाड़ी के प्रति ध्यान आकर्षित करें और हाथों को रोजगार दे पेट को अनाज दे और हम धन्यवाद ज्ञापित करते हैं शासन प्रशासन का ,की रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास की व्यवस्था किया।

हीरू साहू तो उनके खेल के क्षेत्र में अभिन्न योगदान के लिए महसूस किया कि ग्राम वासी मेरे रहने,पढ़ाई कराने खाने-पीने यहां तक कि खेल खेलने के लिए खेल किट सामान उपलब्ध कराएं उस दिन यह ठान लिया था कि आसपास के बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर कर्ज़ चुका रहे हैं।

खेल के क्षेत्र में अभिनय योगदान के लिए आज हीरू साहू को बड़े-बड़े सम्मान से नवाजा गया है।जैसे छत्तीसगढ़ राज्य खेल अलंकरण सम्मान सन 2016 ,ओलंपिक दिवस पर विशेष स्पेशल स्पोर्ट्स पर्सन के सम्मान एवं अनेक समाजसेवी संस्थाओं स्कूलों कॉलेजों और शासन प्रशासन के माध्यम से भी सम्मानित किया गया है।टीवी चैनलों के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया लेकिन यह सम्मान तब तक ना काफी रहेगा जब तक की हाथों को रोजगार ना मिल जाए।

हीरू साहू छत्तीसगढ़ का पहला अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच है,जिन्होंने अपने शिष्य को चीन के मकाउ से तक ले गया और वहां उसका बच्चा टॉप 8 में आकर पूरे भारतवर्ष का नाम रोशन किया हीरू साहू अपने खर्चे पर कर्ज लेकर चीन गया था।

चेन्नई में हुए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल होकर कोच हीरू साहू छत्तीसगढ़ के एक पहला ऐसे कोच है जिसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है।

आज हीरू साहू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है,शासन प्रशासन से निवेदन है कि कम से कम इस गरीब के कुटिया में आकर झांक कर देखें और अपने स्तर पर जो सुविधा हो सके उपलब्ध कराने का कष्ट करें ।

सभी सम्मानित नागरिकों से निवेदन की इस उभरते हुए खिलाड़ी एवं कोच के लिए आप सभी अधिक से अधिक शेयर करें और शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करा कर सहयोग प्रदान करें।

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