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India Economy: CII की स्थापना के 125 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया कार्यक्रम

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Photo: PM Modi,ANI

नई दिल्ली/India Economy- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे हैं। यह कार्यक्रम सीआईआई की स्थापना के 125 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। बता दें कि उद्योग संगठन की स्थापना 1895 में हुई थी। सीआईआई 125वें वार्षिक सत्र की मुख्य विषय वस्तु ‘गेटिंग ग्रोथ बैक’ यानी वृद्धि की राह पर लौटना है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि-कोरोना संकट में लोगों के जीवन को बचाने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में भी गति लानी है।अर्थव्यवस्था (India economy) को फिर से मजबूत करना सबसे जरूरी है।भारत की अर्थव्यवस्था (India economy) पटरी पर जरूर लौटेगी।इसके लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से गरीबों को तुरंत लाभ मिला।74 करोड़ लोगों के घर तक राशन पहुंचाया गया। 

कार्यक्रम का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया गया है।कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण देश की आर्थिक रफ्तार में कमी आई है।पीएम मोदी का यह संबोधन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार लॉकडाउन में ढील देते हुए कंपनियों को फिर से खोलने की अनुमति देने लगी है।

आज देश की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि भारत लॉकडाउन को पीछे छोड़ अनलॉक फेज 1 में प्रवेश कर चुका है। अर्थव्यवस्था (India economy) का काफी हिस्सा खुल चुका है। आठ जून के बाद और भी खुलेगा। जब दुनिया में कोरोना वायरस पैर फैला रहा था तभी भारत ने सही समय पर सही तरीके से सही कदम उठाए। दुनिया के तमाम देशों से तुलना करें तो आज हमें पता चलता है कि भारत में लॉकडाउन का कितना प्रभाव पड़ा है। भारत ने कोरोना से लड़ने के लिए फिजिकल रिसोर्स को तैयार किया। 

पीएम मोदी ने कहा कि गरीब परिवारों को 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय मदद की जा चुकी है। महिलाएं दिव्यांग, बुजुर्ग श्रमिक को इससे लाभ मिला है। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने गरीबों को आठ करोड़ से ज्यादा गैस सिलिंडर उनके घर तक मुफ्त में पहुंचा दिया है। निजी क्षेत्र के करीब 50 लाख कर्मचारियों के खाते में 24 फीसदी ईपीएफ का योगदान किया गया है। 

भारत को तेज विकास के पथ पर लाने के लिए पांच जरूरी बातें

भारत को तेज विकास के पथ पर लाने के लिए पांच बातें बहुत जरूरी हैं – इंटेंट, इंक्लूजन, इंफ्रास्ट्रक्चर, इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन। हाल में कई फैसलों लिए गए हैं। इसमें इसकी झलक दिख जाएगी। भारत बड़ी उड़ान के लिए तैयार है। हमारे लिए सुधार का मतलब है, फैसले लेने का साहस करना। 

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार आज ऐसे पॉलिसी रिफॉर्म भी कर रही है जिनकी देश ने उम्मीद भी छोड़ दी थी। अगर मैं कृषि क्षेत्र की बात करूं तो हमारे यहां आजादी के बाद जो नियम-कायदे बने, उसमें किसानों को बिचौलियों के हाथों में छोड़ दिया गया था।

हमारे श्रमिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए, रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए लेबर रिफॉर्म भी किए जा रहे हैं। जिन गैर-रणनीतिक क्षेत्र में निजी सेक्टर को इजाजत ही नहीं थी, उन्हें भी खोला गया है।

हर क्षेत्र में इंडस्ट्री और युवा के लिए खुलेंगे नए अवसर

सरकार जिस दिशा में बढ़ रही है, उससे हमारे माइनिंग सेक्टर, एनर्जी सेक्टर, या रिसर्च और टेक्नोलॉजी, हर क्षेत्र में इंडस्ट्री और युवा के लिए नए अवसर खुलेंगे। एमएसएमई की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग लंबे समय से उद्योग जगत कर रहा था, वो पूरी हो चुकी है। इससे एमएसएमई बिना किसी चिंता के विकास कर पाएंगे और उनको एमएसएमई का स्टेट्स बनाए रखने के लिए दूसरे रास्तों पर चलने की जरूरत नहीं रहेगा।

स्वभाविक है कि इस समय नए सिरे से मंथन चल रहा है और ऐसे समय में भारत से दुनिया की अपेक्षा और बढ़ी है। आज दुनिया का भारत पर विश्वास भी बढ़ा है और नई आशा का संचार भी हुआ है। विश्व एक विश्वसनीय साथी की तलाश में है। भारत में क्षमता और ताकत है। आज पूरे विश्व में भारत के प्रति जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आप सभी को पूरा फायदा उठाना चाहिए।

भारतीय इंडस्ट्री के पास, एक साफ रास्ता है-आत्मनिर्भर भारत

‘गेटिंग ग्रोथ बैक’ इतना मुश्किल भी नहीं है और सबसे बड़ी बात कि अब आपके पास, भारतीय इंडस्ट्री के पास, एक साफ रास्ता है, आत्मनिर्भर भारत का रास्ता।देश को आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लें।सरकार आपके साथ खड़ी है।आप देश के साथ खड़े हों।

अब जरूरत है कि देश में ऐसे उत्पाद बनें जो ‘मेड इन इंडिया’ हों, ‘मेड फॉर वर्ल्ड’ हों।

आत्मनिर्भर भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ के साथ पूरी तरह एकीकृत भी होगा और सहायक भी।हमें अब एक ऐसी मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण में निवेश करना है, जो वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करे।अब जरूरत है कि देश में ऐसे उत्पाद बनें जो ‘मेड इन इंडिया’ हों, ‘मेड फॉर वर्ल्ड’ हों। कैसे हम देश का आयात कम से कम करें, इसे लेकर क्या नए लक्ष्य तय किए जा सकते हैं? हमें तमाम सेक्टर्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए अपने टार्गेट तय करने ही होंगे। मैं बहुत गर्व से कहूंगा कि सिर्फ तीन महीने के भीतर ही पीपीई की सैकड़ों करोड़ की इंडस्ट्री आपने ही खड़ी की है। 

देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें। इस संकल्प को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दें। सरकार आपके साथ खड़ी है, आप देश के लक्ष्यों के साथ खड़े होइए।ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश और किसानों के साथ साझेदारी का रास्ता खुलने का भी पूरा लाभ उठाएं। अब तो गांव के पास ही लोकल एग्रो प्रोडक्ट्स के क्लस्टर्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसमें सीआईआई के तमाम मेंबर्स के लिए बहुत अवसर हैं।

हमारी सरकार प्राइवेट सेक्टर को देश की विकास यात्रा का साझेदार मानती है।आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी आपकी हर आवश्यकता का ध्यान रखा जाएगा। आपसे, सभी स्टेकहोल्डर्स से मैं लगातार संवाद करता हूं और ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 

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