पंजीयन न कराने वाले झोलाछाप आयुष डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

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रायपुर – राज्य आयुर्वेदिक, यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड ने प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी की है। वहीं प्राइवेट या सरकारी सेवाएं देने वाले आयुष डॉक्टर, जिन्हाेंने पंजीयन नहीं कराया है। इनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर कड़क रुख अपनाया है। आयुष चिकित्सा बोर्ड के मुताबिक राज्य के शासकीय सेवाओं में कार्यरत पंजीयन न कराने वाले करीब दो दर्जन डॉक्टरों की सूची तैयार किया है। वहीं एम्स के आयुष विभाग के डॉक्टरों के भी पंजीयन के लिए प्रबंधन को तीन बार पत्र लिखा गया है।

एम्स में एक डॉक्टर का ही पंजीयन है, बाकि डॉक्टरों ने पंजीयन नहीं कराया है। बोर्ड ने प्राइवेट क्लीनिक, अस्पताल की भी की जांच के लिए टीम गठित किया है। अधिकारियों ने बताया कि कोरोनाकाल में कई मामले सामने आए , जिसमे गलत दवा देने व गलती की वजह से मरीज की हालत खराब हुई साथ ही कई की जान भी गयी । वहीं कई डॉक्टरों की डिग्री संदेहास्पद होने की भी आशंका जाहिर की है। साथ ही सड़कों पर आयुर्वेद के नाम पर जड़ी – बूटी बेंचने वाले छोलाछाप पर कार्रवाई होगी।

क्या है नियम

आयुष बोर्ड ने बताया कि आयुष के कई डॉक्टर जिन्होंने पंजीयन नहीं कराया है, उनका कहना है कि हमने अपने राज्य या केंद्रीय बोर्ड में पंजीयन करा लिया है। भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद अधिनियम 1970 के अंतर्गत चिकित्सक जिस राज्य में सेवाएं देता है, उसे वहां के परिषद में पंजीयन कराना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा अधिनियम-1973 राज्य में वर्ष 2001 से लागू है। इसमें जिन चिकित्सकों का राज्य बोर्ड में पंजीकृत नहीं है। अस्पतालों या क्लीनिक में सेवाएं नहीं दे सकते हैं।

पंजीयन के का उद्देश्य

  • राज्य सरकार के पास डिग्रीधारी डॉक्टरों की जानकारी होती है।
  • चिकित्सकों के फर्जी डिग्री या किसी तरह की अनियमिता पर लगाम।
  • चिकित्सा सेवाओं को बेहतर करने में मदद।

वर्जन

चिकित्सकों को राज्य के बोर्ड में पंजीयन कराना अनिवार्य है। छोलाझाप डॉक्टरों की मिल रही शिकायत पर टीम तैयार सभी जिलों में इनके खिलाफ अभियान शुरू किया गया है। इधर 20 से अधिक सरकारी सेवारत आयुष डॉक्टरों की सूची तैयार की है। जिन्होंने पंजीयन नहीं कराया है। एम्स में आयुष डॉक्टरों की जानकारी देने और पंजीयन के लिए तीन बार प्रबंधन को पत्र लिखा है। लेकिन किसी ने भी पंजीयन नहीं कराया है। सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन को पत्र भेजा जा चुका है।

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