रायपुर – प्रदेश में विपक्ष अब कर्ज के मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष को घेरने की तैयारी में है। दरअसल, प्रदेश सरकार पर कर्ज का भार 84 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। यह राज्य के कुल बजट का करीब 87 प्रतिशत है। तीन वर्ष पहले जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब राज्य का कुल कर्जभार 41 हजार करोड़ था। वर्तमान में कर्ज के बदले में सरकार को हर माह करीब 400 करोड़ रुपये ब्याज देना पड़ रहा है। भाजपा अब इसे लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रही है।

बता दें कि कर्ज को लेकर विवाद की शुरुआत दो दिन पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के केंद्र सरकार के खिलाफ दिए उस बयान से हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है। इसके उत्तर में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने राज्य सरकार के कर्ज के आंकड़े जारी किए हैं। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए कृपया देश को बदनाम मत कीजिए।

साढ़े तीन वर्ष में 51 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज

प्रदेश सरकार ने बीते साढ़े तीन वर्षों में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया है। वह इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मामले में कई बार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार राज्य के हिस्से का पैसा समय पर नहीं देती, इस वजह से प्रदेश के किसानों व गरीबों के हित और राज्य के विकास के लिए कर्ज लेना पड़ता है। इधर, चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती तीन माह में राज्य सरकार ने रिजर्व बैंक के माध्यम से अभी तक कोई कर्ज नहीं लिया है।

बढ़ रहा है ब्याज का भार

कर्ज के साथ राज्य पर ब्याज भार भी बढ़ रहा है। इस वक्त राज्य सरकार हर माह 400 करोड़ रुपये से ज्यादा ब्याज का भुगतान कर रही है। 2020 में यह राशि करीब 360 करोड़ रुपये थी। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2018 से मार्च 19 तक सरकार ने 1771.94 करोड़ रुपये ब्याज जमा किया। वहीं, अप्रैल 19 से मार्च 20 तक 4970.34 करोड़, अप्रैल 20 से मार्च 21 तक 5633.11 करोड़ और अप्रैल 21 से जनवरी 22 तक 3659.54 करोड़ रुपये ब्याज जमा कर चुकी है।

भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कर्जभार कम

इधर, कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि प्रदेश सरकार का कर्जभार भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कम है। मार्च में हुए विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दूसरे राज्यों के कर्जभार की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि उत्तर प्रदेश का कर्जभार 92 प्रतिशत है। गुजरात 146, मध्य प्रदेश 125, हरियाणा 180 और कर्नाटक का कर्जभार 126 प्रतिशत है।

हमारी सरकार गांव, गरीब और किसान के कल्याण और राज्य के विकास के लिए कर्ज ले रही है। इसका सुपपरिणाम भी दिख रहा है। राज्य में खेती का रकबा बढ़ा है। करीब साढ़े चार लाख किसान खेती को ओर लौटे हैं। वहीं, भाजपा ने प्रदेश में अपने 15 वर्ष के कार्यकाल में 41 हजार करोड़ का कर्ज लिया था। इसके बावजूद किसान कर्ज में दबे हुए थे। हमारी सरकार में किसान कर्ज मुक्त हुए हैं। भाजपा के नेता केवल अफवाह फैलाते हैं। आज भी भाजपा शासित राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति बेहतर है।

– धनंजय सिंह ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस

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