कोरोना के कारण करीब 45 फीसदी छात्र अब निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों का रुख करेंगे।कम आय वाले परिवारों के छात्र हर माह 500 रुपये स्कूल फीस देते थे।दरअसल कोरोना के कारण ऑनलाइन क्लास की फीस, स्मार्टफोन, लैपटॉप के कारण खर्च बढ़ने और आय के साधन कम या न होने से ये बच्चे निजी स्कूल छोड़ने को विवश हैं।यह खुलासा सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की प्राइवेट स्कूल इन इंडिया रिपोर्ट में हुआ। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बुधवार को वर्चुअल रिपोर्ट जारी की।

उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मॉडल रेग्युलेटरी एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। सरकार का लर्निंग आउटकम और गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर जोर है। इस प्रकार 4.5 लाख निजी स्कूलों में 12 करोड़ छात्र पढ़ते हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए 73 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं।

60 फीसदी बच्चे आसान सवाल भी नहीं कर पाते हल

अभिभावक बेहतर शिक्षा के लिए अपने बच्चों को निजी स्कूलों में जरूर पढ़ाते हैं, लेकिन आलम यह है कि पांचवीं कक्षा के करीब 60 फीसदी छात्र सामान्य सवाल भी हल नहीं कर पाते हैं। वहीं, 35 फीसदी छात्र दूसरी कक्षा के प्रश्नों के उत्तर देने में भी असमर्थ हैं।

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