किसी भी तरह के आर्थिक संकट से बचने के लिए लोग इंश्योरेंस का सहारा लेते हैं। पॉलिसी के बारे में एजेंट आपसे बड़े-बड़े दावे करता है, पर पॉलिसी खरीदना आपके लिए तभी फायदे का साबित हो सकता है, जब आपका इंश्योरेंस क्लेम बिना किसी परेशानी के आपको मिल जाए। कई बार लोगों का इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट भी हो जाता है। ऐसे में लोगों को काफी नुकसान होता है। अगर आपको इस तरह के नुकसान से बचना है या आप चाहते हैं कि आपका इंश्योरेंस क्लेम बिना किसी परेशानी के आपको मिल जाए, तो आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। आज हम आपको कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके चलते आपका इंश्योरेंस क्लेम रद्द हो जाता है। अक्सर लोग बीमा खरीदते समय कंपनी की ओर से दी गई टर्म्स एंड कंडीशन को ठीक से नहीं पढ़ते हैं। इसका खामियाजा उन्हें आगे चल कर भुगतना पड़ता है। आपको ऐसी गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

इंश्योरेंस क्लेम करते समय रखें इन बातों का ध्यान2 of 5

बीमा खरीदते समय आपको हर जानकारी खुद चेक करनी चाहिए। बीमा कंपनियां इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारियां अपनी वेबसाइट्स पर भी डालती हैं। बिना पूरा पढ़ें बीमा एजेंट की बातों में आकर पॉलिसी से जुड़े दस्तावेजों पर साइन करना आप पर भारी पड़ सकता है।

क्लेम में देरी

क्लेम समय से फाइल करना बहुत जरूरी है। ज्यादातर कंपनी आपको 7 दिन से 30 दिन तक का समय देती हैं। अगर आप क्लेम करने में देरी करते हैं तो ये आपके लिए सही नहीं रहेगा। आपको क्लेम की रकम से हाथ धोना पड़ सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय आपको पहले से हुई बीमारियों के बारे में जानकारी जरूर देनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर आगे चलकर आपका क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है। आपको प्री एग्जिस्टिंग इलनेस के बारे में कंपनी को ठीक तरह से जानकारी देनी चाहिए।

मोटर इंश्योरेंस

मोटर इंश्योरेंस के मामले में अगर आप अपनी गाड़ी में कोई बदलाव करते हैं जैसे आपने सीएनजी किट लगवाना या गाड़ी की बॉडी में कोई बदलाव, तो इसकी जानकारी बीमा कंपनी को जरूर दें। ऐसा नहीं करने पर आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। आपको एक बात पर ध्यान देना होगा कि कुछ खास नुकसान को पॉलिसी में कवर नहीं किया जाता है। इसके लिए आपको अलग से ऐड-ऑन कवर्स लेने चाहिए।

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